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उर्सुला फॉन डेयर लेयेन ने 200 मिलियन यूरो निवेश पैकेज का क‍िया ऐलान | Ursula von der Leyen announces 200 million euro investment package

September 8, 2026

ओस्लो, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेयर लेयेन ने ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक की यात्रा के दौरान 200 मिलियन यूरो के निवेश पैकेज की घोषणा की। इसका उद्देश्य यूरोपीय संघ (ईयू) और ग्रीनलैंड के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।

यूरोपीय आयोग की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह ग्लोबल गेटवे पार्टनरशिप पैकेज 2026 और 2027 के दौरान ग्रीनलैंड में विभिन्न निवेश परियोजनाओं को समर्थन देगा।

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ के अनुसार, इस यात्रा के दौरान फॉन डेयर लेयेन, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने सोमवार को एक संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य तीनों पक्षों के बीच साझेदारी को और मजबूत बनाना है।

समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद फॉन डेयर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर लिखा, "यह ग्रीनलैंड के उस स्पष्ट फैसले को दिखाता है जिसमें उसने ईयू के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने का विकल्प चुना है। यह उसके मूल्यों, आजादी और हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यूरोप भी एक फैसला कर रहा है कि वह ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और भागीदारी बढ़ाएगा।"

बयान के मुताबिक, इस घोषणा और निवेश पैकेज के तहत शिक्षा और मत्स्य पालन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा। साथ ही सैटेलाइट और केबल कनेक्टिविटी, हाइड्रोपावर और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों से जुड़ी परियोजनाओं को भी समर्थन मिलेगा।

इस पैकेज में बेहतर आवास, टिकाऊ पर्यटन और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए भी सहायता शामिल है।

फॉन डेयर लेयेन ने कहा, "ग्रीनलैंड ईयू पर भरोसा कर सकता है।" उन्होंने ग्रीनलैंड को 'एक रणनीतिक सहयोगी और भरोसेमंद मित्र' बताया।

उन्होंने कहा कि यह निवेश पैकेज नए अवसर पैदा करेगा और ग्रीनलैंड तथा पूरे आर्कटिक क्षेत्र में यूरोपीय संघ की मौजूदगी और भागीदारी को मजबूत करेगा।

ग्रीनलैंड, डेनमार्क के साम्राज्य के भीतर एक स्वशासित क्षेत्र है। हाल के वर्षों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर बार-बार दिए गए बयानों ने यूरोप के सहयोगी देशों के बीच चिंता बढ़ाई है। इसके साथ ही आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा, संप्रभुता और नाटो की एकजुटता को लेकर बहस भी फिर से तेज हो गई है।