Aug 30, 2026 04:56 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

NEET-PG 2026 एग्जाम में जयपुर के सीतापुरा सेंटर्स पर भारी टेक्निकल दिक्कतें आईं। NBEMS ने 5 सितंबर को दोबारा एग्जाम कराने का ऐलान किया। इस बीच छात्रों ने बवाल काट दिया है।

नीट पीजी 2026 परीक्षा
नीट पीजी 2026 की परीक्षा रविवार 30 अगस्त 2026 को देशभर में 2 लाख 65 हजार से ज्यादा मेडिकल छात्रों के लिए कराई गई थी। लेकिन राजस्थान के जयपुर स्थित सीतापुरा परीक्षा केंद्र पर जो कुछ भी घटा उसने न सिर्फ छात्रों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया बल्कि देश की इतनी बड़ी परीक्षा व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुई थी लेकिन अचानक सीतापुरा के iON डिजिटल जोन में कंप्यूटर स्क्रीन काली पड़ने लगीं। एक या दो बार नहीं बल्कि छात्रों का दावा है कि बीसों बार सिस्टम बंद हुआ। इसी अव्यवस्था के चलते गुस्साए छात्रों ने परीक्षा केंद्र के बाहर जमकर हंगामा किया जिसके बाद मजबूरन नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) को इस केंद्र के 2,445 छात्रों के लिए 5 सितंबर को दोबारा परीक्षा करवाने का ऐलान करना पड़ा है।
सीतापुरा सेंटर पर आखिर क्या हुआ था?
देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 339 शहरों में कुल 1,111 सेंटर बनाए गए थे। इनमें 2,73,096 छात्रों को परीक्षा देनी थी, जिसमें से 2,65,980 छात्र सेंटर पर पहुंचे। बाकी पूरे देश में तो लगभग 2 लाख 63 हजार बच्चों ने अपना एग्जाम बिना किसी बड़ी दिक्कत के पूरा कर लिया, लेकिन जयपुर के सीतापुरा में बने iDZ सेंटर (TC नंबर 41682 और 41683) पर तकनीकी खामियों ने सारा खेल बिगाड़ कर रख दिया। जैसे ही परीक्षा ने रफ्तार पकड़ी, सिस्टम पूरी तरह से धड़ाम हो गया। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा दे रहे एक छात्र विष्णु शर्मा ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके सेंटर पर कम से कम 20 बार सिस्टम क्रैश हुआ। विष्णु का दावा है कि जब कंप्यूटर बंद पड़े थे, उस दौरान सेंटर पर इतनी अफरा-तफरी मच गई कि छात्र आपस में सवालों के जवाब तक डिस्कस करने लगे थे। विष्णु और उनके जैसे तमाम छात्रों की मांग है कि जब परीक्षा का माहौल ही खराब हो गया है, तो सिर्फ एक सेंटर क्यों, पूरे देश में नीट-पीजी 2026 की परीक्षा दोबारा आयोजित होनी चाहिए ताकि हर एक कैंडिडेट को बराबरी और ईमानदारी का मौका मिल सके।
सचिन पायलट ने सरकार पर दागे तीखे सवाल
छात्रों के इस हंगामे ने अब सियासी तूल भी पकड़ लिया है। राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने इस पूरी घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए सीधे तौर पर सिस्टम की जवाबदेही तय करने की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए पायलट ने लिखा कि जयपुर में परीक्षा के दौरान जो तकनीकी खामियां सामने आई हैं, वह कोई मामूली बात नहीं बल्कि एक बेहद गंभीर मुद्दा है। पायलट ने सीधा सवाल दागा कि आखिर इस तरह की लापरवाहियों का खामियाजा हमारे मेहनती छात्र कब तक भुगतते रहेंगे? उन्होंने उस दर्द को छुआ जो आज हर एक प्रतियोगी छात्र महसूस कर रहा है। उनका कहना था कि पेपरलीक और परीक्षा करवाने वाली संस्थाओं की बार-बार सामने आ रही कमियों के बीच सबसे बड़ा नुकसान उस युवा का होता है, जिसने अपनी रातों की नींद और दिन का चैन गंवाकर दिन-रात पढ़ाई की है।
पायलट ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि देशभर के युवा लगातार पेपरलीक को रोकने और सिस्टम में पारदर्शिता और भरोसे की मांग कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद, अगर हर बार परीक्षा केंद्रों पर वही पुरानी गलतियां और समस्याएं दोहराई जा रही हैं, तो यह सोचना लाजिमी है कि क्या सिस्टम ने अपनी पिछली विफलताओं से कोई सबक लिया भी है या नहीं?
बोर्ड ने क्या दी सफाई
मामला तूल पकड़ता देख NBEMS को तुरंत हरकत में आना पड़ा। बोर्ड ने एक बयान जारी करते हुए साफ किया कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी M/s TCS Ltd. की तरफ से इंटरनल पावर सप्लाई में दिक्कत आ गई थी। इसी वजह से 2,445 बच्चे अपनी परीक्षा पूरी नहीं कर पाए। बोर्ड ने इस पूरे वाकये पर अपनी तरफ से खेद जताया है। TCS जैसी बड़ी आईटी कंपनी, जिसके कंधों पर देश की कई बड़ी परीक्षाओं का जिम्मा होता है, उसके सिस्टम में पावर सप्लाई की दिक्कत आना कोई छोटी बात नहीं है। अब इन प्रभावित बच्चों को इंसाफ दिलाने के लिए नई तारीख तय कर दी गई है। बोर्ड का कहना है कि जिन 2,445 बच्चों की परीक्षा इस पावर कट और तकनीकी खराबी की भेंट चढ़ गई, उनके लिए 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दोपहर 3 बजे जयपुर में ही री-एग्जाम करवाया जाएगा।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwari
शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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