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अंतरिक्ष मलबे ने बढ़ाई चिंता, खतरे में 20 भारतीय सैटेलाइट; तबाही से बचाने के लिए ISRO ने अबतक 9 बार बदली कक्षा

August 5, 2026

देश

  • Edited by: अनुराग गुप्ता
  • Updated Aug 5, 2026, 08:01 PM IST

Space Debris: सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में मौजूद 22 भारतीय उपग्रहों में से 20 के अंतरिक्ष मलबे से टकराने का अत्यधिक खतरा है।

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अंतरिक्ष मलबा (फाइल फोटो)

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iStock

Space Debris: सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में मौजूद 22 भारतीय उपग्रहों में से 20 के अंतरिक्ष मलबे से टकराने का अत्यधिक खतरा है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह भी बताया कि पृथ्वी की निचली कक्षा (2,000 किलोमीटर से कम ऊंचाई) में मौजूद उपग्रहों के टकराने का खतरा ज़्यादा होता है क्योंकि उस क्षेत्र में अंतरिक्षीय वस्तुओं (स्पेस ऑब्जेक्ट्स) की संख्या ज्यादा है।

उपग्रह की कितनी बार बदली गईं कक्षा?

उन्होंने बताया कि 2026 में अब तक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस तरह की टक्कर से उपग्रहों को बचाने के लिए नौ बार उपग्रह की कक्षा में बदलाव किए हैं। 2025 में यह संख्या 20 थी। टक्कर से बचने के इस प्रयास को 'कोलिजन अवॉइडेंस मैन्यूवर' कहते हैं जो पहले से तय कक्षीय समायोजन है, जिसे उपग्रह संचालक किसी अन्य पिंड या अंतरिक्ष मलबे के साथ कक्षा में टक्कर को रोकने के लिए करते हैं।

अंतरिक्ष मलबे को लेकर क्या है ISRO का लक्ष्य?

जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि भारत अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग व्यवस्था में सक्रियता से शामिल है। जितेंद्र सिंह के अनुसार, अंतरिक्ष में मलबे को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत, 2024 में भारत ने 'डेब्रिस फ्री स्पेस मिशन' (मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन) पहल की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि इसरो का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सभी भारतीय संस्थाएं (चाहे वे सरकारी हों या निजी) 'शून्य मलबे' का लक्ष्य हासिल करें।

क्या है अंतरिक्ष मलबा

अंतरिक्ष मलबा से तात्पर्य ऐसी वस्तुओं या निष्क्रिय टुकड़ों से है, जो पृथ्वी की कक्षा में मंडरा रहे हैं और अब किसी काम के नहीं हैं। स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, औसतन हर हफ्ते कोई न कोई अंतरिक्ष यान या उसका हिस्सा पृथ्वी के वायुमंडल में वापस दाखिल होता है। इनमें अधिकतर वस्तुएं खाली रॉकेट स्टेज या निष्क्रिय सैटेलाइट होती हैं, जिनकी कक्षाएं समय के साथ घटती जाती हैं और ऐसी वस्तुएं मूल रूप से मानव निर्मित उल्काओं की तरह होती हैं।

Anurag Gupta

अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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