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20 साल पुराने केस में घिरे CEC ज्ञानेश कुमार, मलेशियाई इंजीनियर की मौत की फिर खुलेगी फाइल

October 4, 2026

20 साल पुराने केस में घिरे CEC ज्ञानेश कुमार, मलेशियाई इंजीनियर की मौत की फिर खुलेगी फाइल

By: Central Desk | Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 21:59:51 (IST)

मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की 2006 की मौत से जुड़े मामले में केरल सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं. उस वक्त ज्ञानेश कुमार PWD सेक्रेटरी थे. शिकायत में प्रोजेक्ट पेमेंट को लेकर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए थे.

नई दिल्‍ली (आलोक कुमार पांडेय)। CEC ज्ञानेश कुमार के लिए करीब 20 साल पुराना एक मामला फिर चर्चा में है। केरल सरकार ने 2006 में मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन की मौत से जुड़े केस की विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। उस समय ज्ञानेश कुमार केरल PWD के सेक्रेटरी थे। ली सी बीन KSTP के तहत MC रोड अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट से जुड़े PATI-BEL कंसोर्टियम के साथ काम कर रहे थे। शिकायत में प्रोजेक्ट का पेमेंट जारी करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। अब सरकार पुराने रिकॉर्ड दोबारा खंगालकर यह देखना चाहती है कि शुरुआती जांच कैसे हुई और क्या किसी बाहरी दबाव का असर पड़ा था।

2006 की मौत और फिर शुरू हुई जांच

अंगमाली से तिरुवनंतपुरम तक MC रोड के अपग्रेडेशन का काम 2006 में KSTP के तहत चल रहा था। करीब 215 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को वर्ल्ड बैंक से फंड मिला था। इसी प्रोजेक्ट से जुड़े मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की मौत के बाद मामले ने तूल पकड़ा। शिकायत के बाद उस समय विजिलेंस जांच हुई थी। अब गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को मिली शिकायत के आधार पर पुराने रिकॉर्ड फिर मंगाए गए हैं। नई जांच में उस वक्त लिए गए फैसलों, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जांच के आगे न बढ़ने की वजह देखी जाएगी।

पेमेंट को लेकर रिश्वत के आरोप, जांच में खुलेगा सच

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रोजेक्ट का पेमेंट जारी करने के बदले रिश्वत मांगी गई थी। इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि 2006 में हुई शुरुआती विजिलेंस जांच में क्या सामने आया था और बाद में केस किस वजह से आगे नहीं बढ़ा। अगर नई जांच में किसी तरह की गड़बड़ी या बाहरी दबाव के सबूत मिलते हैं तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल किसी आरोप को साबित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

CEC बनने तक लंबा रहा एडमिनिस्ट्रेटिव करियर

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। वह केरल में कई अहम पोस्ट पर रहे और 2005-07 के दौरान PWD सेक्रेटरी के साथ KSTP के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी रहे। बाद में केंद्र में डेप्युटेशन पर कई जिम्मेदारियां संभालीं। गृह मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सेक्रेटरी रहने के बाद मार्च 2024 में चुनाव आयुक्त बने। फरवरी 2025 में उन्होंने CEC का पद संभाला।

SIR को लेकर पहले से विपक्ष के निशाने पर

ज्ञानेश कुमार का नाम SIR को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद में है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें नए वोटर्स के Form-6 में बदलाव, वोटर डेटा तक पहुंच और नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े मुद्दे शामिल थे। चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि पिछले साल के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए।

केरल में 20 साल पुराने केस की जांच और SIR को लेकर चल रहे विवाद ने CEC ज्ञानेश कुमार को एक साथ दो अलग-अलग मुद्दों के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, पुराने मामले में अभी सिर्फ नई विजिलेंस जांच के आदेश हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि 2006 के केस में लगाए गए आरोपों में कितना दम है और उस वक्त की जांच में किसी तरह की गड़बड़ी हुई थी या नहीं।