23 नवंबर 2005 को बिजली विभाग की टीम ने जांजगीर-चांपा जिले के रनपोता गांव में साहस राम के राइस मिल और आटा चक्की पर छापा मारा था।
बिजली चोरी के 20 साल पुराने मामले में आरोपी बरी
- Published: 16 Jul 2026, 05:42 PM IST
- Last Updated: 16 Jul 2026, 05:42 PM IST
पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिजली चोरी के एक 20 साल पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि, केवल निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि, आरोपी ने वास्तव में अवैध रूप से बिजली का उपयोग किया था। साथ ही कथित अवैध कनेक्शन में इस्तेमाल 25 फीट तार की बरामदगी भी नहीं हुई और बिजली के कथित अनधिकृत उपयोग का आकलन भी विद्युत अधिनियम की धारा 126 के तहत नहीं किया गया था।
अवैध कनेक्शन लेकर 10 एचपी का मोटर चलाने का था आरोप
दरअसल मामले के अनुसार 23 नवंबर 2005 को बिजली विभाग की टीम ने जांजगीर-चांपा जिले के रनपोता गांव में साहस राम के राइस मिल और आटा चक्की पर छापा मारकर बिजली के खंभे से अवैध कनेक्शन लेकर 10 एचपी मोटर चलाने का आरोप लगाया था। इसके बाद विशेष न्यायालय ने वर्ष 2008 में आरोपी को विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
खाली कागज पर हस्ताक्षर कराए गए
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि, जब्ती पंचनामा के गवाहों ने अदालत में कहा कि, उनसे खाली कागज पर हस्ताक्षर कराए गए थे और कथित जब्ती उनके सामने नहीं हुई थी। इसके अलावा जिस 25 फीट तार से बिजली चोरी का दावा किया गया था, उसकी बरामदगी भी नहीं हुई। कोर्ट ने यह भी पाया कि, बिजली विभाग ने अनधिकृत बिजली उपयोग का वैधानिक आकलन नहीं किया, जो कानूनन आवश्यक था।
अनधिकृत उपयोग का विधिवत आकलन और ठोस साक्ष्य आवश्यक
जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि, बिजली चोरी के मामलों में अनधिकृत उपयोग का विधिवत आकलन और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं। इन कमियों के कारण अभियोजन आरोप सिद्ध नहीं कर पाया। हाईकोर्ट ने विशेष न्यायालय का दोषसिद्धि आदेश निरस्त करते हुए साहस राम को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया और उसके जमानत बंधपत्र भी समाप्त करने के निर्देश दिए।
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