Aug 30, 2026 04:13 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

मेघालय की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने की आशंका है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के 12 में से कम से कम 9 विधायक और तृणमूल कांग्रेस के सभी चार विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

मेघालय में BJP का ऑपरेशन लोटस
मेघालय में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ जोर पकड़ता दिख रहा है। विधानसभा में फिलहाल सिर्फ दो विधायकों वाली पार्टी अचानक 15 के आंकड़े तक पहुंच सकती है। सूत्रों के मुताबिक यूडीपी के नौ और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के चार समेत कुल 13 मौजूदा विधायक भगवा पार्टी में शामिल होने को तैयार हैं। राज्य भाजपा नेताओं ने पुष्टि की है कि इस संबंध में केंद्रीय स्तर पर बातचीत चल रही है। बताया जा रहा है कि टीएमसी गुट में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मुकुल संगमा भी शामिल हैं। 60 सदस्यीय विधानसभा में यूडीपी के 12 और टीएमसी के चार विधायक हैं। इनमें से कुछ ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
कैबिनेट फेरबदल से बढ़ा असंतोष
नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के नेतृत्व वाली मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार में सहयोगी यूडीपी के भीतर सितंबर 2025 के कैबिनेट फेरबदल के बाद असंतोष उभरा। पर्यटन मंत्री पॉल लिंगदोह की जगह पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह को कैबिनेट में शामिल किए जाने से पार्टी में गुटीय संघर्ष गहरा गया। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले यह दरार और साफ हो गई है। हालांकि यूडीपी सूत्रों ने ऐसे कदम की संभावना से इनकार नहीं किया। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मैं इसकी पुष्टि या खंडन नहीं करना चाहता। अगर पार्टी का बंटवारा होना है तो होगा। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए पर्याप्त संख्या हो तो कोई उन्हें रोक नहीं सकता। यहां बता दें कि पॉल लिंगदोह ने पहले अफवाहों की बात स्वीकार की थी, लेकिन कहा था कि उनके पास पर्याप्त जानकारी नहीं है।
भाजपा ने बातचीत की पुष्टि की
वहीं, मेघालय के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि राज्य इकाई के अध्यक्ष ने यूडीपी विधायकों को आमंत्रित किया था, लेकिन अब वे सीधे केंद्रीय नेताओं से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय कोई अनुमान नहीं लगाना चाहते। नतीजे का इंतजार करेंगे। यहां बता दें कि वर्तमान में भाजपा के विधानसभा में दो विधायक हैं, अलेक्जेंडर लालू हेक और सनबोर शुल्लाई। शुल्लाई कैबिनेट मंत्री हैं। भाजपा नेता के अनुसार, 2028 के चुनाव में पार्टी का लक्ष्य राज्य में अपना नेतृत्व वाली सरकार बनाना है।
दो सप्ताह पहले शिक्षा मंत्री लाहकमेन रिम्बुई के नेतृत्व में यूडीपी के आठ सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने अमित शाह से मुलाकात की थी। बैठक में पूर्वोत्तर प्रभारी सांसद संबित पात्रा भी मौजूद थे। आधिकारिक तौर पर एफसीआरए संशोधन विधेयक समेत इनर लाइन परमिट, निवासी सुरक्षा अधिनियम, खासी-गारो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने, यूरेनियम खनन और मूल आस्थाओं की मान्यता जैसे मुद्दे उठाए गए। सूत्रों का दावा है कि संभावित विलय पर भी चर्चा हुई।
संख्या बल
बताया जा रहा है कि अगर यदि नौ यूडीपी और चार टीएमसी विधायक शामिल होते हैं तो भाजपा को 13 विधायकों का लाभ मिल सकता है। दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए विलय के रूप में कम से कम आठ यूडीपी और तीन टीएमसी विधायकों का जाना जरूरी होगा। ऐसा होने पर भाजपा की संख्या 15 हो जाएगी और वह गठबंधन में दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बन जाएगी। फिलहाल यह जगह यूडीपी के पास है।
गौरतलब है कि एनपीपी के पास 33 विधायक हैं और वह अकेले सरकार चला सकती है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा 2028 के चुनावों को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव से बच सकते हैं। एनपीपी केंद्र में एनडीए की सहयोगी भी है। हालांकि भाजपा के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। यूडीपी स्थानीय मुद्दों पर मुखर रही है। पार्टी इनर लाइन परमिट लागू करने की मांग करती रही है, जबकि केंद्र सरकार इसका विरोध कर रही है। शामिल होने वाले विधायकों को ऐसे कई मुद्दों पर भाजपा के रुख से तालमेल बैठाना होगा।