'साइबर ठगी हुई..गोल्डन आवर में 1930 पर करें कॉल': पाकिस्तान से चल रहे सेक्सटॉर्शन के जाल से डिजिटल अरेस्ट तक, ठगों के जाल से बचने का मंत्र - Muzaffarpur News
August 16, 2026
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Muzaffarpur Cyber Fraud Alert | Sextortion & Digital Arrest Prevention
मुजफ्फरपुर3 घंटे पहले
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साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। कभी वीडियो कॉल के जरिए अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जा रहा है, तो कभी पुलिस अधिकारी बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों को घंटों और कई दिनों तक डराकर रखा जा रहा है। मुजफ्फरपुर में हाल के दिनों में ऐसे मामलों में लाखों रुपए की ठगी के मामले सामने आए हैं।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि किसी भी तरह का साइबर फ्रॉड होने पर घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। पैसे कटने की स्थिति में सबसे पहले 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं और 24 घंटे के अंदर साइबर थाने में आवेदन दें।
'एंजेल प्रिया' जैसी आईडी से रहें सावधान
साइबर डीएसपी ने बताया कि सेक्सटॉर्शन में अक्सर सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिए लोगों को निशाना बनाया जाता है। 'एंजेल प्रिया' जैसी आईडी बनाकर पहले दोस्ती या बातचीत शुरू की जाती है। इसके बाद वीडियो कॉल पर आने के लिए उकसाया जाता है।
कई मामलों में सामने से चलाया जा रहा वीडियो पहले से रिकॉर्डेड होता है। जैसे ही व्यक्ति वीडियो कॉल पर किसी आपत्तिजनक स्थिति में आता है, उसका स्क्रीन रिकॉर्ड कर लिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का खेल। आरोपी वीडियो को पीड़ित के परिवार और दोस्तों के बीच भेजने की धमकी देकर पैसे मांगते हैं।
फोटो-वीडियो बन जाए तो एक रुपए भी न दें
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सेक्सटॉर्शन का शिकार हो जाता है तो डरने या शर्माने की जरूरत नहीं है। पीड़ित को अपराधी के दबाव में आकर पैसे नहीं देने चाहिए और न ही उससे बातचीत या मोलभाव करना चाहिए। सबसे पहले स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करें। जिस सोशल मीडिया अकाउंट से धमकी मिल रही है, उसका यूजर आईडी और यूआरएल सुरक्षित रखें।
पैसे कटे तो ‘गोल्डन आवर’ में 1930 पर करें कॉल
साइबर फ्रॉड में सबसे महत्वपूर्ण समय ठगी के तुरंत बाद का होता है। साइबर डीएसपी ने बताया कि पैसे कटने के बाद जितनी जल्दी हो सके 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसे ‘गोल्डन आवर' के तौर पर देखा जाता है। शिकायत मिलने के बाद संबंधित ट्रांजेक्शन को रोकने और रकम को आगे जाने से बचाने की कार्रवाई की जा सकती है।
अगर किसी कारण से 1930 पर तत्काल संपर्क नहीं हो पाता है तो cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही पीड़ित को 24 घंटे के अंदर साइबर थाने में आवेदन देना चाहिए। शिकायत में बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, स्क्रीनशॉट, चैट, लिंक और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य देना जांच में मददगार हो सकता है।
साइबर पुलिस ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
साइबर डीएसपी ने डिजिटल अरेस्ट को लेकर भी लोगों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई पुलिस अधिकारी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकता।
इस तरह के फ्रॉड में पहले व्यक्ति को डराया जाता है। कभी कहा जाता है कि उसके नाम से कोई संदिग्ध खाता चल रहा है, कभी किसी रिश्तेदार के अपराध में फंसने की बात कही जाती है तो कभी आतंकवादी गतिविधि से जोड़कर कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। इसके बाद वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी या किसी जांच एजेंसी के अधिकारी की तरह बात कर व्यक्ति को लगातार निगरानी में रखने का नाटक किया जाता है।
‘जल्दी करो’ सुनते ही समझें खतरे की घंटी
साइबर डीएसपी के अनुसार, फ्रॉड के लगभग हर तरीके में जल्दबाजी का दबाव बनाया जाता है। जैसे ‘अभी केवाईसी अपडेट करें’, ‘तुरंत पैसे भेजें’, ‘नहीं तो खाता बंद हो जाएगा’, ‘अभी भुगतान नहीं किया तो गिरफ्तारी होगी’ आदि।
10-10 दिन तक वीडियो कॉल पर बैठे रहने का भी डर
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में साइबर अपराधी पीड़ित को सिर्फ कुछ मिनट या घंटों तक नहीं, बल्कि कई दिनों तक वीडियो कॉल पर बनाए रखने की कोशिश करते हैं। पीड़ित को लगातार यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह किसी गंभीर जांच में फंसा है और कमरे से बाहर निकलने या किसी से बात करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई हो जाएगी।
मुजफ्फरपुर में भी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपए की ठगी के मामले सामने आए हैं। साइबर डीएसपी के मुताबिक…
‘डर और लालच’ से बचेंगे तो आधा साइबर फ्रॉड वहीं रुक जाएगा
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने साइबर फ्रॉड से बचने के लिए दो सबसे जरूरी बातें बताईं। पहला डरना नहीं है और दूसरा लालच में नहीं आना है।
अपराधी कभी गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं तो कभी जल्दी अमीर बनाने, निवेश पर भारी मुनाफा या इनाम का लालच देते हैं। कई बार मोबाइल पर एपीके फाइल भेजकर उसे डाउनलोड करवाने की कोशिश की जाती है। ऐसी फाइलों को बिना जांचे डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।
‘आपकी गलती नहीं, आप अपराध के शिकार हैं’
सेक्सटॉर्शन जैसे मामलों को लेकर साइबर डीएसपी ने खास तौर पर कहा कि पीड़ित को सामाजिक शर्म या बदनामी के डर से चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना किसी के साथ भी हो सकती है और पीड़ित को अपराधी को पैसे देकर मामले को दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
साइबर अपराध में चुप रहना अपराधी का हौसला बढ़ाता है, जबकि समय पर शिकायत करना पुलिस को कार्रवाई का मौका देता है। साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूक रहना है। साइबर अपराधी चाहे कितना भी डराने या जल्दबाजी कराने की कोशिश करें, व्यक्ति को रुककर सोचने और पुलिस से संपर्क करने की जरूरत है।
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार का कहना है कि साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूक रहना है। साइबर अपराधी चाहे कितना भी डराने या जल्दबाजी कराने की कोशिश करें, व्यक्ति को रुककर सोचने और पुलिस से संपर्क करने की जरूरत है।
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