राजसमंद में 29 सितंबर को 17 मिमी बारिश दर्ज होने के बाद लगातार 8 दिन से बारिश नहीं हुई है। खेतों में खड़ी खरीफ फसलें अब पानी के इंतजार में सूखने लगी हैं। कृषि विभाग के अनुसार बारिश नहीं होने से फसलों को हुए नुकसान के आधार पर इस बार उत्पादन में करीब 30
.
इस बार जिले में अक्टूबर तक औसतन महज 407 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 948 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार बारिश करीब 57 प्रतिशत कम है। मानसून की वापसी का समय नजदीक आने के साथ किसानों की अच्छी बारिश की उम्मीद भी कमजोर होती जा रही है।
पढ़ें पानी के संकट पर ये रिपोर्ट

अब पढ़िए झीलों-बांधों की स्थिति
गौमती सूखी, नंदसमंद और बाघेरी में भी आवक का इंतजार
बारिश नहीं होने का असर जिले के जलस्रोतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सेवंत्री स्थित रामदरबार बांध में पानी की आवक नहीं होने से गौमती नदी सूखी पड़ी है। कुंभलगढ़ क्षेत्र में भी पर्याप्त बारिश नहीं होने से बनास नदी में पानी नहीं आया। इसका सीधा असर बाघेरी का नाका और नंदसमंद बांध पर पड़ा है। दोनों बांध पर्याप्त पानी की आवक का इंतजार कर रहे हैं।

राजसमंद झील में 18.95 फीट पानी राजसमंद शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली राजसमंद झील में भी अब पानी की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। झील की कुल भराव क्षमता 3786 एमसीएफटी है, जबकि वर्तमान में 1986.50 एमसीएफटी पानी बचा है। झील का पूर्ण भराव गेज 30 फीट है, जबकि वर्तमान जलस्तर 18.95 फीट है।
झील में पानी की आवक के दो प्रमुख स्रोत गौमती नदी और खारी फीडर हैं। गौमती नदी पहले ही सूखी है, जबकि खारी फीडर से पानी नंदसमंद बांध के ओवरफ्लो होने पर आता है। इस बार बनास नदी में पानी नहीं आने से नंदसमंद का जलस्तर भी नहीं बढ़ पाया। ऐसे में झील के लिए नंदसमंद से पानी मिलने की उम्मीद भी कमजोर हो गई है। आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

नंदसमंद में क्षमता का सिर्फ 19.50 प्रतिशत पानी
नंदसमंद बांध की कुल भराव क्षमता 786 एमसीएफटी है। वर्तमान में इसमें 153.40 एमसीएफटी पानी है। बांध का वर्तमान गेज 13.10 फीट है, जबकि ओवरफ्लो गेज 32 फीट है। ऐसे में बांध अभी ओवरफ्लो स्तर से काफी दूर है।
बाघेरी नाका में 106.28 एमसीएफटी पानी बचा -
बाघेरी नाका परियोजना एईन कुलदीप बारोड के अनुसार, बाघेरी नाका बांध से जिले के 264 गांवों में पेयजल आपूर्ति होती है। इस बार पानी की आवक नहीं होने से बांध का जलस्तर भी लगातार चिंता बढ़ा रहा है। बांध की कुल क्षमता 311.68 एमसीएफटी है, जबकि वर्तमान में 106.28 एमसीएफटी पानी बचा है। पूर्ण भराव गेज 32.80 फीट के मुकाबले वर्तमान गेज 13.90 फीट है।

88 हजार हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई, 20 से 30 प्रतिशत फसल सूखने लगी
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार राजसमंद भूपेन्द्र सिंह राठौड़ के अनुसार, जिले में इस बार 88 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में खरीफ फसलें बोई गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा करीब 60 से 65 हजार हेक्टेयर में मक्का की बुवाई हुई है। इसके अलावा 7 से 8 हजार हेक्टेयर में ज्वार, 700 से 800 हेक्टेयर में बाजरा, करीब 1200 हेक्टेयर में उड़द, 1200 हेक्टेयर में मूंग और करीब 3500 हेक्टेयर में कपास की बुवाई की गई है। शेष क्षेत्र में चारा और सब्जियां उगाई गई हैं।
बारिश नहीं होने और खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बचने से 20 से 30 प्रतिशत फसल सूखने की स्थिति में पहुंच गई है। किसानों को अब उत्पादन प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। कृषि विभाग के अनुसार मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो खरीफ उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।