इनकम टैक्स विभाग की तलाशी में करीब ₹14.69 करोड़ की ज्वेलरी और बुलियन मिला था. संबंधित व्यक्ति ने ₹1.56 करोड़ की ज्वेलरी को पैतृक संपत्ति बताते हुए कहा कि यह उसके दिवंगत दादा-दादी और पिता की थी. मामले में कोलकाता ITAT ने उपलब्ध दस्तावेजों और लॉकर की जानकारी को अहम माना.
बैंक लॉकर से मिली थी करोड़ों की ज्वेलरी
मामला मिराज दिग्विजय शाह से जुड़ा है. 21 जून 2022 को उनके घर और कारोबारी परिसरों पर इनकम टैक्स विभाग ने तलाशी ली थी. इस दौरान करीब ₹14.69 करोड़ की ज्वेलरी और बुलियन मिला. इसमें से करीब ₹14 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई थी. विवाद मुख्य रूप से ₹1.56 करोड़ की ज्वेलरी को लेकर था, जिसका वजन 3,233.11 ग्राम था.
शाह ने दावा किया कि यह ज्वेलरी उनकी निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि उनके दिवंगत दादा, दादी, पिता और पिता के HUF से संबंधित है.
ज्वेलरी शाह के निजी लॉकर में नहीं थी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि विवादित ज्वेलरी शाह के निजी लॉकर से नहीं मिली थी. यह UCO Bank के उन लॉकरों में रखी थी, जो परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर थे. इनमें उनकी मां, दिवंगत पिता और दादा, भाई, बुआ और अन्य रिश्तेदारों के नाम शामिल थे.
शाह ने यह भी बताया था कि वह UCO Bank के इन लॉकरों में करीब 5-7 साल से नहीं गए थे. इसलिए सिर्फ ज्वेलरी लॉकर में मिलने के आधार पर उसे उनकी व्यक्तिगत संपत्ति मानने पर विवाद हुआ.
1997 की वैल्यूएशन रिपोर्ट बनी अहम सबूत
शाह ने अपने दिवंगत परिवार के सदस्यों की 1997 की वैल्यूएशन रिपोर्ट पेश की. अपीलीय प्राधिकरण ने पाया कि इन पुरानी रिपोर्टों में दर्ज ज्वेलरी का विवरण तलाशी में मिली ज्वेलरी से मेल खाता था. उनकी मां ने भी ज्वेलरी पर अपना दावा करते हुए हलफनामा दिया था.इन दस्तावेजों को ज्वेलरी के पुराने स्वामित्व और स्रोत को समझने में महत्वपूर्ण माना गया.
₹1.56 करोड़ की ज्वेलरी पर ITAT का फैसला
कोलकाता की ITAT बेंच ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए ₹1.56 करोड़ की ज्वेलरी को शाह की अघोषित संपत्ति मानने से इनकार किया. ट्रिब्यूनल ने ज्वेलरी के परिवार के लॉकरों में होने, पुरानी वैल्यूएशन रिपोर्ट और मां के हलफनामे जैसे दस्तावेजों पर ध्यान दिया.ITAT ने ₹1.56 करोड़ की ज्वेलरी से जुड़ी टैक्स एडिशन को हटाने के फैसले को बरकरार रखा.
₹64.93 लाख की ज्वेलरी का मामला भी सामने आया
मामले में 1,293.43 ग्राम ज्वेलरी, जिसकी कीमत ₹64.93 लाख थी, भी शामिल थी. शाह ने इसे अपनी मां की संपत्ति बताया था. इसके समर्थन में 9 अप्रैल 1997 की वैल्यूएशन रिपोर्ट और हलफनामा पेश किया गया था. CIT(A) ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार किया और राजस्व विभाग ने ITAT में इस हिस्से को चुनौती नहीं दी.
फैसले का मतलब हर पैतृक सोने पर छूट नहीं
इस फैसले को यह समझना जरूरी है कि इनकम टैक्स सर्च में मिली हर पैतृक या विरासत में मिली ज्वेलरी अपने आप टैक्स से बाहर नहीं हो जाती. इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, लॉकर के स्वामित्व और ज्वेलरी के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए फैसला दिया गया.
ITAT के आदेश में यह भी सामने आया कि परिवारों के लिए पुरानी वैल्यूएशन रिपोर्ट, खरीद की रसीदें, वसीयत, उत्तराधिकार से जुड़े दस्तावेज और फैमिली सेटलमेंट जैसे रिकॉर्ड संभालकर रखना उपयोगी हो सकता है.

कन्हैया पचौरी
कन्हैया पचौरी एक अनुभवी पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन मीडिया में 10 वर्षों का अनुभव है. उन्होंने प्रिंट पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और पिछले कुछ वर्षों से उन्होंने टेक और ऑटो सेक्शन को कवर कर रहे हैं. वह टेक्नोलॉजी पर बारीकी से रिसर्च करते है और लेटेस्ट ट्रेंड्स और डेवलपमेंट्स पर नजर रखते हैं. वर्तमान में, कन्हैया टीवी9 के साथ जुड़े हुए हैं, यहां ये टेक और ऑटो सेक्शन कवर कर रहे हैं. उन्होंने इंडस्ट्री में लेटेस्ट डेवलपमेंट के गहन कवरेज करने को लेकर अपना नाम बनाया है. यूजर्स को किसी भी न्यूज की पूरी और सही जानकारी देने में तत्पर हैं. जब वह टेक्नोलॉजी पर काम नहीं कर रहे होते हैं तो अपने शौक पूरे करने में उन्हें अच्छा लगता है. उन्हें म्यूजिक सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. उनका मानना है कि काम में व्यस्त दिन के बाद म्यूजिक और किताबें आराम करने का एक शानदार तरीका है.
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