Flag on Car or Bike: 15 अगस्त को देशभर में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. इस बार हमलोग 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं. इस दिन हर तरफ देशभक्ति का माहौल देखने को मिलता है. लोग अपने घरों, स्कूलों, दफ्तरों और दुकानों पर तिरंगा लगाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत भी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. कई लोग अपनी कार के बोनेट या बाइक पर भी तिरंगा लगाने की तैयारी करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वाहन पर तिरंगा लगाने के भी कुछ नियम हैं? भारतीय ध्वज संहिता (फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002) के तहत तिरंगा लगाने की अनुमति हर किसी को नहीं होती है. अगर नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए गए तो आप पर कार्रवाई हो सकती है जिससे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. तो चलिए विस्तार से बताते हैं इन नियमों के बारे में…
हर कोई कार पर नहीं लगा सकता तिरंगा
भारत में तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002 में कई नियम बताए गए हैं. ये फ्लैग कोड 26 जनवरी 2002 से लागू है. गौरतलब है कि 2002 से पहले तिरंगा फहराने के नियम एम्बलेम्स एंड नेम्स (प्रिवेन्शन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट, 1950 और प्रिवेन्शन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 के तहत आते थे.
बता दें कि आम नागरिकों को अपनी निजी कार या बाइक पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने की अनुमति नहीं है. हालांकि, कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को वाहन पर तिरंगा लगाने की अनुमति दी गई है. इनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और कुछ अन्य वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारी शामिल हैं. विदेश में भारत के आधिकारिक प्रतिनिधियों को भी निर्धारित नियमों के तहत वाहन पर तिरंगा लगाने की अनुमति होती है.
वाहन पर तिरंगा लगाने का सही तरीका
आपको बता दें कि जिन लोगों को वाहन पर तिरंगा लगाने की अनुमति है, उनके लिए भी कुछ नियम तय हैं. वाहन पर तिरंगा दाईं तरफ लगाया जाता है. अगर कार में किसी दूसरे देश का गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद है, तो भारत का झंडा दाईं ओर और दूसरे देश का झंडा बाईं ओर लगाया जाता है. तिरंगा इस तरह लगाया जाना चाहिए कि वह जमीन, वाहन के नीचे या किसी अन्य वस्तु को न छुए. झंडे को हमेशा सम्मानजनक स्थिति में रखना जरूरी है.
फ्लैग कोड में हुए बदलाव
फ्लैग कोड ऑफ इंडिया में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं. पहले तिरंगे के लिए हाथ से बुनी और काती हुई खादी को प्राथमिकता दी जाती थी. अब मशीन से बने कपास, ऊन, रेशम और पॉलिएस्टर के तिरंगे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. पहले राष्ट्रीय ध्वज को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी. अब उचित सम्मान और रोशनी की व्यवस्था होने पर इसे रात में भी फहराया जा सकता है.
प्लास्टिक के तिरंगे से बचें
तिरंगे का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. प्लास्टिक के झंडों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. तिरंगे को फाड़ना, गंदा करना या क्षतिग्रस्त हालत में रखना नियमों के खिलाफ है. राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल किसी सजावट या विज्ञापन के लिए भी नहीं किया जाना चाहिए. नियमों का उल्लंघन करने पर कानून के तहत 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है.
तिरंगा लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा लगाना चाहते हैं, तो उसे हमेशा साफ और सही स्थिति में रखें.
फटा या गंदा झंडा न लगाएं.
तिरंगे को जमीन पर गिरने या वाहन के नीचे दबने से बचाएं.
रात में झंडा लगा रहने पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था रखें.
देशभक्ति दिखाना गर्व की बात है, लेकिन तिरंगे का सम्मान करना उससे भी ज्यादा जरूरी है. इसलिए 15 अगस्त पर तिरंगा लगाने से पहले फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के नियमों को जरूर समझ लें.
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