रांची में JPSC और JSSC उम्मीदवारों के विरोध-प्रदर्शन के बीच, छात्रों के साथ बातचीत के दो दौर के बाद कई मुद्दों पर सहमति बनी है. इसके अलावा, छात्रों की जायज मांगों को मानते हुए 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने पर भी सहमति बनी है.
रांची में JPSC और JSSC उम्मीदवारों के विरोध-प्रदर्शन के बीच, छात्रों के साथ बातचीत के दो दौर के बाद कई मुद्दों पर सहमति बनी है. इसके अलावा, छात्रों की जायज मांगों को मानते हुए 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने पर भी सहमति बनी है.
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Jharkhand Government: रांची की सड़कों पर जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं को लेकर न्याय की मांग कर रहे हजारों छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बीच झारखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की और दो दौर की लंबी बातचीत के बाद कई अहम फैसले लिए हैं. सरकार ने छात्रों की सबसे बड़ी मांग को मानते हुए 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने पर अपनी सहमति जता दी है.
विवादित JSSC-CGL की जांच करेगी CID
इस बैठक के बाद मंत्री दीपिका पांडेय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार छात्रों की सभी जायज चिंताओं को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने ऐलान किया कि टीडीपीएल (TDPL) द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाओं और विवादित JSSC-CGL की जांच अब राज्य की सीआईडी (CID) करेगी. अगर जांच के दौरान किसी केंद्रीय एजेंसी की जरूरत महसूस होती है, तो राज्य सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी मामले की जांच के लिए पत्र लिखेगी.
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फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए छात्रों को मिलेगा इंसाफ
JSSC-CGL मामले की गंभीरता को समझाते हुए मंत्री ने कहा कि इस परीक्षा के परिणाम सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत घोषित किए गए थे और चयनित उम्मीदवार करीब एक साल से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं. इसी संवेदनशीलता को देखते हुए सीआईडी की पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी एक न्यायिक समिति (Judicial Committee) के जिम्मे होगी. सरकार की कोशिश है कि पूरी जांच 90 दिनों के अंदर खत्म कर ली जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए छात्रों को जल्द से जल्द इंसाफ मिले.
'पेपर लीक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश का मामला'
पेपर लीक के मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए मंत्री दीपिका पांडेय ने कहा कि यह सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश का मसला है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए साल 2023 में ही विधानसभा में पेपर लीक के खिलाफ एक सख्त विधेयक पारित किया था. इस दौरान उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि उस वक्त भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में इस कानून का कड़ा विरोध किया था, लेकिन बाद में युवाओं के दबाव में आकर संसद में भी उन्हें इसी तरह का कानून लाना पड़ा.
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