
अमेरिका की सैन्य वापसीImage Credit source: getty image
अमेरिका ने इराक में चल रहे अपने बड़े सैन्य मिशन ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व को औपचारिक रूप से खत्म कर दिया है. पेंटागन के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं और सैन्य उपकरणों की इराक के एरबिल एयर बेस से वापसी पूरी हो गई है. यह मिशन 2014 में ISIS के खिलाफ शुरू हुआ था और करीब 12 साल तक चला. अमेरिका के मुताबिक इस अभियान का मुख्य उद्देश्य इराक में ISIS को एक संगठित सैन्य ताकत के तौर पर खत्म करना था.
इस वापसी के साथ इराक में अमेरिकी सैन्य भूमिका का एक बड़ा चरण खत्म हो गया है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका इराक से पूरी तरह अलग हो गया है. पेंटागन के अनुसार अब सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी इराकी सुरक्षा बलों की होगी, जबकि अमेरिका अपने साझेदारों को सीमित ट्रेनिंग और खुफिया सहयोग देता रहेगा. यानी सैन्य गठबंधन के मिशन की जगह अब दोनों देशों के बीच सामान्य द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों का नया दौर शुरू हो रहा है.
2014 में शुरू हुआ था मिशन
ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब ISIS ने इराक और सीरिया के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया था. अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इराकी सुरक्षा बलों को हवाई सहायता, प्रशिक्षण और खुफिया सहयोग दिया. बाद में ISIS ने इराक में अपना बड़ा क्षेत्रीय नियंत्रण खो दिया, लेकिन संगठन के बचे हुए सदस्यों के खिलाफ अभियान जारी रहा.
अब पेंटागन ने इस 12 साल लंबे सैन्य अभियान को औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की है. यह फैसला अमेरिका और इराक के बीच सितंबर 2024 में बनी सहमति के मुताबिक लिया गया है.
एरबिल से पूरी हुई अमेरिकी वापसी
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल के मुताबिक गठबंधन सेना और उसके उपकरणों की एरबिल एयर बेस से व्यवस्थित वापसी इस मिशन के औपचारिक अंत का अहम हिस्सा है. अमेरिका का कहना है कि अब इराक की सुरक्षा में वहां की अपनी सेना और कुर्द पेशमर्गा समेत स्थानीय सुरक्षा बलों की मुख्य भूमिका होगी.
हालांकि अमेरिका का सहयोग पूरी तरह खत्म नहीं होगा. पेंटागन के मुताबिक इराकी साझेदारों को लक्षित प्रशिक्षण और खुफिया सहायता जारी रहेगी. इसका उद्देश्य ISIS के बचे हुए नेटवर्क को दोबारा मजबूत होने से रोकना है.
ISIS का खतरा खत्म नहीं हुआ
अमेरिकी सैन्य मिशन खत्म होने के बावजूद पेंटागन ने यह नहीं कहा है कि ISIS पूरी तरह समाप्त हो गया है. अमेरिका के अनुसार संगठन अब इराक में पहले जैसी संगठित सैन्य ताकत नहीं है, लेकिन उसके बचे हुए सदस्य अभी भी कुछ दूरदराज इलाकों में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं.
इराक के सामने ISIS के अलावा ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों की चुनौती भी है. पेंटागन के मुताबिक अब इन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी इराक सरकार की होगी. अमेरिका ने कहा है कि वह आतंकवाद विरोधी सहयोग जारी रखेगा और ISIS को इराक की जमीन से दोबारा मजबूत होने से रोकने में साझेदारों के साथ काम करेगा.
अमेरिका-इराक संबंधों में नया दौर
अमेरिकी सैन्य मिशन का अंत अमेरिका-इराक संबंधों में बदलाव का संकेत है. अब अमेरिका की भूमिका सीधे सैन्य अभियान के बजाय सुरक्षा सहयोग, प्रशिक्षण और खुफिया साझेदारी पर केंद्रित होगी. 2024 के समझौते के तहत गठबंधन मिशन खत्म कर दोनों देशों के बीच सामान्य सुरक्षा संबंध बढ़ाने की योजना बनाई गई थी.
हालांकि, इसका मतलब इराक से अमेरिका की पूरी विदाई नहीं है. अब इराकी सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी बढ़ेगी. उन्हें ISIS के बचे नेटवर्क और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से खुद निपटना होगा. अमेरिका आतंकवाद विरोधी सहयोग और जरूरी सुरक्षा सहायता जारी रखेगा.

अंकिता पाण्डेय
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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