Published: Saturday, September 12, 2026, 18:07 [IST]
Ganesh Chaturthi 2026 Sanyog: गणपति बप्पा के भक्तों के लिए साल 2026 का गणेशोत्सव खास रहने वाला है। इस बार गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी के बीच सामान्य 10 दिनों की जगह 12 कैलेंडर दिन का अंतर रहेगा। पंचांग की तिथि गणना के कारण ऐसा संयोग बन रहा है। गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा और इसी दिन घरों, पंडालों और सार्वजनिक जगहों पर गणपति की स्थापना होगी।
इसके बाद 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाएगा। यानी भक्तों को बप्पा की पूजा, आरती, भजन और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए सामान्य से दो दिन ज्यादा समय मिलेगा। खास बात यह है कि 9 साल बाद ऐसा मौका फिर आया है। इससे पहले 2017 में 12 दिनों का गणेशोत्सव पड़ा था।
14 सितंबर को होगी गणेश चतुर्थी
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 5 बजकर 22 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय के समय चतुर्थी तिथि होने के कारण गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इसी दिन गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
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गणेश स्थापना और पूजा का शुभ समय
2026 में गणेश स्थापना और पूजा के लिए अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं।
- गणेश पूजा का शुभ समय: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक
- गणेश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:09 बजे से 12:58 बजे तक
- शाम का गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:42 बजे से 7:05 बजे तक
भक्त अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन समयों में पूजा और स्थापना कर सकते हैं।
इस बार 12 दिन का क्यों है गणेशोत्सव?
गणेशोत्सव की अवधि हर साल एक जैसी नहीं रहती। हिंदू पंचांग में तिथियों की गणना चंद्रमा की चाल के आधार पर होती है। चंद्रमा की गति के कारण किसी तिथि की अवधि कभी कम और कभी ज्यादा हो सकती है। इसी वजह से तिथियों के बीच दिनों की संख्या में भी बदलाव आता है। वृद्धि तिथि और सूर्योदय के समय मौजूद तिथि की गणना का असर भी त्योहारों की तारीख पर पड़ता है।
इसी तिथि गणना के कारण 2026 में गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी के बीच 12 कैलेंडर दिन बन रहे हैं। इसलिए इस बार गणेशोत्सव सामान्य 10 दिनों की तुलना में दो दिन लंबा रहेगा।
14 सितंबर को होगी बप्पा की स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन यानी 14 सितंबर को घरों, गणेश पंडालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके बाद भक्त पूरे उत्सव के दौरान गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना, आरती और भजन करेंगे। कई जगहों पर अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा के साथ गणेशजी की पूजा करने से जीवन की परेशानियां और बाधाएं दूर होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि आती है।
25 सितंबर को होगा गणपति विसर्जन
2026 में गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ होगा। इसी दिन भक्त गणपति बप्पा को विदाई देंगे और उनकी प्रतिमा का विसर्जन करेंगे। 14 सितंबर को स्थापना और 25 सितंबर को विसर्जन को मिलाकर इस बार कुल 12 कैलेंडर दिन बन रहे हैं। यानी भक्तों को बप्पा की आराधना के लिए सामान्य वर्षों की तुलना में ज्यादा समय मिलेगा।
9 साल बाद फिर बना ऐसा संयोग
12 दिनों का गणेशोत्सव 2026 को और खास बना रहा है। इससे पहले साल 2017 में भी गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी के बीच 12 दिनों का अंतर रहा था। अब करीब 9 साल बाद 2026 में एक बार फिर ऐसा संयोग बना है। गणपति भक्तों के लिए यह उत्सव सिर्फ लंबा होने की वजह से खास नहीं है, बल्कि उन्हें बप्पा की पूजा और आराधना के लिए दो अतिरिक्त दिन भी मिल रहे हैं।
14 सितंबर को गणपति स्थापना के साथ शुरू होने वाला यह उत्सव 25 सितंबर को विसर्जन के साथ पूरा होगा। इस दौरान 'गणपति बप्पा मोरया' के जयघोष के साथ देशभर में गणेशोत्सव का उत्साह देखने को मिलेगा।
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