world-news

‘आंखों के सामने बह गई कार…लगा अब हमारी बारी है’: नेपाल से रेस्क्यू 106 भारतीयों की आपबीती; बोले- जिस पुल से आए वो भी डूब गया - Sitamarhi News

August 29, 2026

‘काठमांडू से निकलते ही हमें अंदाजा हो गया था कि हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। पानी का फ्लो अचानक तेजी से बढ़ गया था। हमारी गाड़ी से करीब 500 मीटर की दूरी पर देखते ही देखते एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। उस मंजर को देखकर हमलोग घबरा गए थे।’

.

‘उस वक्त लगा कि अब हमलोगों की बारी है। हमारी गाड़ी भी पानी में बह सकती है। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचकर यहां तक पहुंच पाएंगे। भगवान और बिहार सरकार ने ही हमारी जान बचाई है।’

ये कहना है नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों का, 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित इनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया।

बता दें कि नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत और 1900 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं।

नेपाल से बिहार लौटे भारतीयों ने क्या बताया? दो दिन उन्होंने किन हालात में गुजारे? अपनी आंखों के सामने उन्होंने क्या-क्या देखा? नेपाल में फंसने से लेकर सुरक्षित बिहार लौटने तक का सफर कैसा रहा? अब भी उनके मन में किस बात का डर है? पढ़िए नेपाल की आंखों देखी…

पहले भारतीयों के चेहरे पर आई खुशी की तस्वीरें…

शुक्रवार को नेपाल में फंसे 106 भारतीयों को सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया।

शुक्रवार को नेपाल में फंसे 106 भारतीयों को सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया।

करीब 59 महिलाएं, 42 पुरुष और 5 बच्चे नेपाल से लौटे हैं।

करीब 59 महिलाएं, 42 पुरुष और 5 बच्चे नेपाल से लौटे हैं।

सभी यात्रियों का सामान भी सही सलामत बिहार लाया गया।

सभी यात्रियों का सामान भी सही सलामत बिहार लाया गया।

'बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे'

नेपाल घूमने और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए महाराष्ट्र के करीब 106 यात्रियों का ग्रुप अब काठमांडू से भारत लौट आया है। उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये दो दिन उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक पलों में बदल जाएंगे।

जब वे काठमांडू से बिहार आ रहे थे तो रास्ते में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया था। सड़कें टूट चुकी थीं। नदियां उफान पर थीं। जिस पुल को पार कर वे बिहार की सीमा में दाखिल हुए, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था।

हालांकि, किसी तरह बिहार सरकार और प्रशासन की मदद से सभी लोग सुरक्षित बचाए गए हैं। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने सभी सुरक्षित भारतीयों से बात की।

नागपुर के रहने वाले योगेश गावंडे ने बताया, नेपाल से बिहार में प्रवेश करने के लिए जिस पुल को हमने पार किया, उस समय उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था।

पानी लगातार बढ़ रहा था और बहाव बेहद तेज था। डर के बीच हमलोगों ने किसी तरह पुल पार किया, लेकिन इसके करीब आधे घंटे बाद हमें खबर मिली की पानी का लेवल और बढ़ गया है। जिस पुल को हमने क्रॉस किया वो पूरी तरह डूब चूका है।

योगेश ने कहा, जब हम नेपाल में फंसे थे, तब सच में लग रहा था कि हम बचेंगे भी या नहीं। सुरक्षित निकल पाएंगे, इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। अगर कुछ देर वहां और रुकते तो शायद ही आज जिंदा होते।

भारत सरकार ने हमारा बहुत साथ दिया। सरकार ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला, इंडिया लाया और फिर हमारे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके लिए बिहार के CM सम्राट चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद।

सीतामढ़ी पहुंचने पर पुलिस ने सभी यात्रियों को खाना खिलाया।

सीतामढ़ी पहुंचने पर पुलिस ने सभी यात्रियों को खाना खिलाया।

लोगों ने बताया कि वो नेपाल में 2 दिन से भूखे थे, बिहार आकर खाना मिला।

लोगों ने बताया कि वो नेपाल में 2 दिन से भूखे थे, बिहार आकर खाना मिला।

‘महाराष्ट्र और बिहार अलग-अलग नहीं, हम सब भारतीय हैं’

योगेश ने कहा, बिहार प्रशासन और यहां के लोगों के व्यवहार से हमें बहुत अच्छा लगा। हम सभी एक भारतीय हैं। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र अलग है और बिहार अलग। हम सब एक ही देश के हैं। आज यहां आकर यह बात और ज्यादा महसूस हो रही है कि मुश्किल वक्त में पूरा भारत एक साथ खड़ा होता है।

हमलोगों का ग्रुप 19 अगस्त को महाराष्ट्र से नेपाल पहुंचा था। सबसे पहले हमलोग पोखरा गए, वहां से मुक्तिनाथ और फिर काठमांडू पहुंचे थे। इसी दौरान ग्लेशियर से आई तबाही और बाढ़ के कारण कई रास्ते पूरी तरह टूट गए और बंद हो गए।

इसके चलते हमलोग भारत वापस नहीं आ पा रहे थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से तत्काल मदद की गई और नेपाल से भारत तक पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था कराई गई।

'50 सीटर बस पहाड़ में फंसी, छोटी गाड़ियों से निकालना पड़ा'

पुणे निवासी नारायण रेशमा बाजपेयी ने बताया, हम लोगों का ग्रुप करीब 50 सीटर बस से नेपाल गया था। शुरुआत के 7-8 दिन यात्रा सामान्य रही, लेकिन वापसी के समय रास्ते बंद होने लगे।

50 सीटर बस के लिए पहाड़ी और टूटे हुए रास्तों से आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर मदद मांगी गई। छोटी गाड़ियों की व्यवस्था की गई। इन्हीं छोटी गाड़ियों से यात्रियों को आगे निकाला गया।

जिस जगह बाद में सबसे ज्यादा तबाही हुई, उसी जगह से हमलोग एक दिन पहले ही निकल चुके थे। इस वजह से हमने तबाही का सबसे भयानक रूप सामने से नहीं देखा, लेकिन वापसी के दौरान रास्तों की हालत देखकर हमें खतरे का अंदाजा हो गया था।

काठमांडू में दो दिनों तक बिना खाए रहे लोग

आशा पांडे ने बताया, हमलोग 2 दिनों से बहुत ही मुश्किल में थे। भूखे-प्यासे सिर्फ जान की परवाह कर रहे थे। समझ में नहीं आ रहा था कि कब और कैसे इस भयानक तबाही से निकल पाएंगे।’

एक अन्य यात्री सरला ने बताया, 'नेपाल से निकलकर जब हमलोग भारतीय सीमा तक पहुंचे तो यहां प्रशासन और स्थानीय लोगों ने हमारी काफी मदद की। हमें बॉर्डर से आगे लाने, गाड़ी तक पहुंचाने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से पहले नाश्ता और भोजन कराया गया। रहने की भी व्यवस्था की गई।

उन्होंने भावुक होकर कहा, आज राखी का दिन है और ऐसा लग रहा है कि हमें यहां भाई मिल गए। हमारी बहुत बड़ी मदद हुई है। जिस तरह से प्रशासन और लोगों ने हमारा साथ दिया, वह हम कभी नहीं भूलेंगे।

वहीं, सरला की मौसेरी बहन निर्मला पांडे ने बताया, हमलोग नेपाल घूमने गए थे, लेकिन अचानक आई बाढ़ के कारण वहां फंस गए। इस बीच मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। नेपाल के हालात को देखकर वो घबरा गईं और उन्हें हार्ट अटैक आ गया।

फिलहाल, उनका इलाज नेपाल के काठमांडू के एक अस्पताल में चल रहा है। वहां की सरकार और मेरा भाई उनका ध्यान रख रहे हैं।’ बता दें कि ये सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में नौकरी करते हैं।

सीतामढ़ी सांसद ने महाराष्ट्र के लोगों से बातचीत की।

सीतामढ़ी सांसद ने महाराष्ट्र के लोगों से बातचीत की।

कई घंटे से भूखे थे यात्री

आपदा के ADM बृज किशोर पांडेय ने कहा, भारत से नेपाल घूमने गए ये यात्री बाढ़ की तबाही में फंस गए थे। 28 अगस्त को करीब 3 बजे दोपहर में मुख्यमंत्री सचिवालय और आपदा प्रबंधन विभाग से सूचना मिली कि नेपाल से कुछ भारतीय बिहार बॉर्डर पर आ रहे हैं।

जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने बॉर्डर पर पहुंचकर यात्रियों को रिसीव किया। गाड़ी नहीं होने पर प्रशासन ने अपने साधनों से उन्हें थाने तक पहुंचाया। थाने पहुंचने पर यात्रियों को नाश्ता, फल, पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया।

एक-दो यात्रियों ने कमजोरी और चक्कर की शिकायत की, जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

प्रशासन के अनुसार करीब 110 यात्री लौट रहे थे, जिनमें कुछ निजी साधनों से आगे निकल गए। फिलहाल 106 यात्रियों का ग्रुप प्रशासन के पास पहुंचा है। सभी को उनकी जरूरत के मुताबिक मदद देने के साथ पटना आने-जाने की व्यवस्था भी की गई है।

महाराष्ट्र के CM ने सीतामढ़ी सांसद से किया कॉन्टैक्ट

बता दें कि ये सभी यात्रियों ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क साधा था। इसके बाद इन्होंने तुरंत सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को पूरी स्थिति से अवगत कराया।

इसी तरह सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने गुरुवार की रात में काठमांडू के सांसद संदीप राणा से समन्वय स्थापित किया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह विशेष बसों की व्यवस्था कर सभी को वहां से रवाना किया गया।

रास्ते में दो बसें बदलकर तीर्थयात्री किसी तरह सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ सीमा पहुंचे, यहां सीतामढ़ी जिला प्रशासन की टीम पहले से मुस्तैद थी। सीमा पर पुपरी एसडीओ गौरव कुमार, सीओ सतीश कुमार, बीडीओ कर्मवीर कुमार प्रभाकर, आरओ ब्रजेश मिश्र और भिट्ठा थानाध्यक्ष दीपक पटेल सहित अधिकारियों ने सभी का स्वागत किया।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की देखरेख में सभी का हेल्थ चेकअप कराया गया। सभी को खाना खिलाय गया और फिर रेस्ट करने के लिए बिस्तर दिया गया।

सभी यात्रियों को सीतामढ़ी से पटना बस से भेजा गया।

सभी यात्रियों को सीतामढ़ी से पटना बस से भेजा गया।

बीमार यात्रियों को दवाइयां दी गईं।

बीमार यात्रियों को दवाइयां दी गईं।

सीतामढ़ी के प्रशासन की सांसद ने की तारीफ

शुक्रवार की शाम खुद सांसद थाने पहुंचे और सभी भारतीय का हालचाल लिया। उन्होंने हर किसी साथी से उसके हेल्थ से जुड़ा सवाल किया। इस दौरान सांसद ने भास्कर से बातचीत में बताया, नेपाल से लौटे यात्रियों के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने जिस तत्परता से काम किया, वह सराहनीय है।

मुख्यमंत्री को जैसे ही नेपाल में फंसे भारतीय यात्रियों की जानकारी मिली, उसके बाद तुरंत कार्रवाई हुई और उनका रेस्क्यू कराया गया। हमें सूचना बाद में मिली, लेकिन उससे पहले प्रशासन ने पूरा इंतजाम कर दिया था। बस से लेकर खाने-पीने तक की व्यवस्था कुछ ही समय में कर दी गई।

उन्होंने आगे कहा, एडीएम आपदा प्रबंधन राजेश पांडेय और एसडीएम गौरव बेहद सक्रिय अधिकारी हैं। यह जिले का सौभाग्य है कि ऐसे अधिकारी यहां हैं। भिट्ठा थाना की पुलिस ने भी बहुत अच्छा काम किया।

पुलिस को लोग अक्सर बदनाम करते हैं, लेकिन जब आपदा आती है तो सुरक्षा की उम्मीद भी हम पुलिस से ही करते हैं। आज सीतामढ़ी पुलिस के जवान यात्रियों का जूठा तक उठाते दिखे। जरूरत के समय पुलिस हर आपदा में लोगों के साथ खड़ी रहती है।

सीतामढ़ी के थानाध्यक्ष दीपक को महिलाओं ने राखी बांधी।

सीतामढ़ी के थानाध्यक्ष दीपक को महिलाओं ने राखी बांधी।

सीतामढ़ी SDM गौरव कुमार को भी महिला यात्रियों ने राखी बांधी।

सीतामढ़ी SDM गौरव कुमार को भी महिला यात्रियों ने राखी बांधी।

महाराष्ट्र की बहनों ने सीतामढ़ी SDM के साथ मनाई राखी

रक्षाबंधन के मौके पर यात्रियों की ओर से अधिकारियों को राखी बांधे जाने पर सांसद ने कहा, आज हमारे लिए भी यह बहुत भावुक पल है। ये लोग कह रहे हैं कि बिहार प्रशासन ने उनकी जान बचाई, इसलिए रक्षाबंधन पर इन्हें राखी बांधनी चाहिए। सच कहें तो हमें भी आज बहनें मिल गईं और इन्हें भाई मिल गए।

यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रेलवे मंत्री से भी बात की गई है। यात्रियों में कुछ लोग पटना-नांदेड़ एक्सप्रेस (17609) से जाना चाहते हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बात की गई है।

रेल मंत्री से बात कर ट्रेन में एक-दो अतिरिक्त कोच की व्यवस्था कराने को कहा गया है। ट्रेन शनिवार सुबह करीब 7 बजे है, इसलिए यात्रियों को समय पर स्टेशन पहुंचाकर आगे भेज दिया जाएगा। उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

वहीं, सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने SDM गौरव कुमार की कलाई पर बंधी कई राखियां देखीं तो कहा, वाह, क्या बात है… बता दें कि ये राखियां इन्हीं यात्रियों के साथ आई महिलाओं और लड़कियों ने बांधी थीं। उनका कहना था, आज बिहार प्रशासन ने हमारी जान बचाई है। रक्षाबंधन के मौके पर राखी तो इन्हीं के साथ मनानी चाहिए।