गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में CM मोहन यादव ने मादा चीता CCB-2 को छोड़ा। इसके साथ यहां चीतों की संख्या 4 हो गई है। जानिए चीता प्रोजेक्ट और स्थानीय लोगों पर इसके असर की पूरी कहानी।
मध्य प्रदेश की धरती पर करीब 100 साल बाद चीते की वापसी अब एक नए पड़ाव पर पहुंचती दिख रही है। नीमच जिले की गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में रविवार को एक और मादा चीता छोड़ी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता CCB-2 को सैंक्चुरी में रिलीज किया। इसके साथ ही गांधी सागर में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।
गांधी सागर में अब 2 नर और 2 मादा चीते
CCB-2 के गांधी सागर पहुंचने के बाद सैंक्चुरी में अब कुल चार चीते हो गए हैं। इनमें दो नर और दो मादा चीते शामिल हैं। ऐसे में आने वाले समय में यहां चीता परिवार के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चीता को जंगल में छोड़ने के बाद कहा कि मध्य प्रदेश सरकार चीता संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने इसे केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि एशिया के लिए भी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परियोजना बताया।
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‘जियो और जीने दो’ की भावना से जुड़ा संरक्षण
CM यादव ने कहा कि कभी एशिया से चीते पूरी तरह विलुप्त हो गए थे और मध्य प्रदेश में भी उनकी मौजूदगी खत्म हो चुकी थी। अब प्रदेश की धरती पर चीते दोबारा स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। उन्होंने इसे वन्यजीवों के प्रति “जियो और जीने दो” की भावना का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में वर्तमान में 56 चीते और उनके शावक मौजूद हैं।
वन विभाग की भूमिका को बताया अहम
मुख्यमंत्री ने चीता संरक्षण में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का वनांचल और वन्यजीव संरक्षण का पुराना समृद्ध इतिहास रहा है। गांधी सागर में चीतों की मौजूदगी को उन्होंने प्रदेश की जैव-विविधता और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
चीता प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को क्या मिला?
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चीता प्रोजेक्ट का असर केवल जंगल और वन्यजीवों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और ग्रामीणों के जीवन में बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट की शुरुआत के समय स्थानीय ग्रामीणों के बीच कुछ संशय था, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बेहतर हुईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण स्थानीय लोगों के सकारात्मक सहयोग से ही सफल हो सकता है।
गांधी सागर में अब आगे क्या?
CCB-2 के आने के साथ गांधी सागर सैंक्चुरी में नर और मादा चीतों की संख्या बराबर हो गई है। ऐसे में अब यहां चीता आबादी के प्राकृतिक विस्तार और उनके व्यवहार पर नजर रखना अहम होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साल छोड़े गए पावक और प्रभास स्वस्थ हैं। इसके अलावा हाल में चार नए चीतों के आने का भी उन्होंने उल्लेख किया। सरकार का फोकस अब केवल चीतों को बसाने तक नहीं, बल्कि उनके लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय भागीदारी को मजबूत करने पर है।
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