world-news

नई मेरिट लिस्ट आई तो जाएगी 10 हजार टीचर की नौकरी? यूपी के 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद में क्या है अपडेट?

September 17, 2026

Time Published: Thursday, September 17, 2026, 15:07 [IST]

UP Teacher Recruitment Dispute: उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद कई साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। भर्ती पूरी हो चुकी है और हजारों अभ्यर्थी लंबे समय से शिक्षक के पद पर काम कर रहे हैं, लेकिन आरक्षण और मेरिट से जुड़ा मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

16 सितंबर की सुनवाई में चयनित शिक्षकों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक नई मेरिट सूची बनाई जाती है तो करीब 10 हजार ऐसे शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जो लगभग छह साल से नौकरी कर रहे हैं। सुनवाई में TET में आरक्षण, मुख्य भर्ती में आरक्षण और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के सामान्य वर्ग में जाने जैसे सवाल भी उठे। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होनी है।

UP Teacher Recruitment Dispute

10 हजार शिक्षकों की नौकरी का मुद्दा

चयनित अभ्यर्थियों की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि यदि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को लागू करते हुए नई मेरिट सूची तैयार की जाती है, तो करीब 10 हजार मौजूदा शिक्षकों की नौकरी पर असर पड़ सकता है। ये शिक्षक करीब छह साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

ये भी पढ़ें: पेट्रोल, रेलवे टिकट और बिल पेमेंट करने वालों की बल्ले-बल्ले! UPI के नए MDR नियमों में मिली बड़ी राहत

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि अदालत का फैसला मौजूदा चयन को बनाए रखने या नई मेरिट सूची बनाने तक सीमित नहीं है। कोर्ट को यह देखना है कि लागू नियमों और कानून के हिसाब से किन अभ्यर्थियों का चयन का अधिकार बनता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2024 में 69 हजार शिक्षकों की नई चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया था और पुराने चयन को हटाकर आरक्षण नीति के अनुसार नई सूची बनाने की बात कही थी।

TET और आरक्षण पर क्या सवाल उठा?

सुनवाई में चयनित अभ्यर्थियों की ओर से आरक्षण को लेकर अहम दलील दी गई। वकील की ओर से कहा गया कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी में पहले ही छूट का लाभ मिल चुका था। इसके बाद सहायक शिक्षक भर्ती में भी उन्हें आरक्षण का लाभ मिला।

इसे एक ही भर्ती प्रक्रिया में दोहरे लाभ के रूप में पेश किया गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि टीईटी भर्ती परीक्षा नहीं, बल्कि पात्रता परीक्षा है। ऐसे में टीईटी में मिली छूट को मुख्य भर्ती में आरक्षण के बराबर कैसे माना जा सकता है, यह सवाल महत्वपूर्ण है। यानी इस मामले में कोर्ट के सामने यह सवाल भी है कि पात्रता परीक्षा में मिली राहत और मुख्य भर्ती में मिलने वाले आरक्षण को कानून के हिसाब से किस तरह देखा जाए।

817 अनारक्षित अभ्यर्थियों का भी जिक्र

चयनित अभ्यर्थियों की ओर से यह दलील भी रखी गई कि अगर हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलती है तो करीब 817 अनारक्षित अभ्यर्थियों को ही नौकरी मिलने की स्थिति बन सकती है। वकील ने कहा कि आरक्षित वर्ग के उन अभ्यर्थियों की संख्या इससे काफी ज्यादा है, जो भर्ती प्रक्रिया में अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं। ऐसे में केवल 817 अनारक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता अपनाने से दूसरे अभ्यर्थियों के अधिकार का सवाल खड़ा होगा।

सुनवाई में यह बात भी सामने आई कि जिन अभ्यर्थियों का चयन का कानूनी अधिकार बनता है, उन्हें प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। अंतिम स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही साफ होगी।

आरक्षण की छूट लेकर सामान्य सीट का सवाल

सुनवाई में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग में जाने का मुद्दा भी उठा। चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वकील शोभा गुप्ता ने इस पर सवाल रखा। उनकी दलील थी कि अगर किसी अभ्यर्थी ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़ी छूट का फायदा लिया है तो बाद में अधिक अंक होने के आधार पर वह सामान्य वर्ग की सीट पर जाने का दावा कैसे कर सकता है।

वकील ने इस तर्क के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों का भी हवाला दिया। हालांकि यह अभी वकील की ओर से रखी गई दलील है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।

22 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

16 सितंबर की सुनवाई में चयनित अभ्यर्थियों की ओर से पक्ष रखा गया। अब मामले में उन अभ्यर्थियों के वकीलों की दलीलें सुनी जानी हैं, जो आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होनी है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है। इसलिए 69 हजार शिक्षक भर्ती में किसकी नौकरी रहेगी, नई मेरिट सूची बनेगी या चयन प्रक्रिया में क्या बदलाव होगा, इसे लेकर अभी कोई अंतिम स्थिति नहीं बनी है।

69 हजार शिक्षक भर्ती का पूरा मामला क्या है?

उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए 5 दिसंबर 2018 को विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती परीक्षा 6 जनवरी 2019 को हुई। इसके बाद चयन और आरक्षण से जुड़े विवाद ने धीरे-धीरे कानूनी मामला ले लिया। भर्ती में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परिणाम आने के बाद करीब 1.47 लाख अभ्यर्थियों को सफल घोषित किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद 69 हजार पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

कटऑफ भी इस भर्ती में चर्चा का बड़ा मुद्दा रहा। सामान्य वर्ग की कटऑफ 67.11 प्रतिशत और ओबीसी वर्ग की कटऑफ 66.73 प्रतिशत बताई गई थी।

बाद में भर्ती की मेरिट और आरक्षण व्यवस्था को लेकर अलग-अलग स्तर पर आपत्तियां उठीं। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नई चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे विवाद से जुड़ी अपीलों और अलग-अलग पक्षों की दलीलों पर सुनवाई कर रहा है।

ये भी पढ़ें: रेलवे में 10th पास के लिए बंपर मौका, ईस्ट कोस्ट रेलवे में निकली भर्ती, बिना परीक्षा सीधे मेरिट से चयन