Illegal Content On Phone: दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेट स्टोर और सर्कुलेट करने का आरोप है.
Written By : प्रमोद कुमार | Updated at : 20 Jul 2026 04:14 PM (IST)

Illegal Content On Phone: दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है
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- दिल्ली पुलिस ने बाल शोषण सामग्री रखने वाले 10 पकड़े।
- गूगल के सिस्टम ने अवैध सामग्री का ऑटोमेटिक पता लगाया।
- NCMEC की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा।
- भारत में बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना दंडनीय है।
Illegal Content On Phone: आपके फोन में स्टोर कंटेट आपको जेल भी पहुंचा सकता है. एक ऐसा ही मामला अभी सामने आया है, जहां दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. इन पर अपने फोन में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेट स्टोर और उसे सर्कुलेट करने का आरोप है. गूगल के डिटेक्शन सिस्टम से इसकी जानकारी मिली और पुलिस ने 5 दिन का ऑपरेशन चलाकर इन लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने गैर-कानूनी कंटेट को डाउनलोड, स्टोर और डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए क्लाउड स्टोरेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मोबाइल ऐप्स का यूज किया था.
फोन में स्टोर कंटेट का गूगल ने लगाया पता
गूगल अपनी सर्विसेस पर चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज मैटेरियल (CSAM) का पता लगाने के लिए हैश मैचिंग और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का यूज करती है. हैश मैचिंग में किसी इमेज या वीडियो को एक यूनिक डिजिटल फिंगरप्रिंट में बदला जाता है, जिसे हैश कहते हैं. जब भी कोई फाइल गूगल के सर्वर पर अपलोड होती है, कंपनी का सिस्टम इसके हैश को CSAM के डेटाबेस से कंपेयर करता है. अगर ये मैच हो जाता है तो सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से इसे लेकर अलर्ट कर देता है. उसे न तो फाइल ओपन करने की जरूरत होती है और न ही खोलने की जरूरत पड़ती है. अगर सिस्टम को ऐसा कोई मैटेरियल मिलता है, जिसका पहले से हैश मौजूद नहीं है तो गूगल एआई मॉडल के सहारे उसके पैटर्न को पहचान लेती है. इस तरह वह नए और एडिटेड कंटेट को डिटेक्ट कर पाती है.
गूगल के सिस्टम से जानकारी पुलिस तक कैसे पहुंचती है?
जब गूगल का सिस्टम आपत्तिजनक और गैर-कानूनी कंटेट को डिटेक्ट कर लेता है तो यह उसे रिमूव कर इसकी रिपोर्ट अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रन (NCMEC) के पास भेजता है. इस रिपोर्ट में कंटेट, अकाउंट डिटेल्स और दूसरी जरूरी जानकारी होती है. इसके बाद NCMEC इस रिपोर्ट को संबंधित देश की कानूनी एजेंसियों के पास भेजता है, जो इसकी जांच करती है.
ऐसा कंटेट भूलकर भी फोन में न रखें
भारत में बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेट को डाउनलोड, स्टोर और शेयर करने पर कानूनी प्रतिबंध लगा हुआ है. कोई भी व्यक्ति अपने फोन या सोशल मीडिया अकाउंट आदि पर ऐसा कंटेट स्टोर या शेयर नहीं कर सकता. अगर कोई ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. उसके खिलाफ आईटी एक्ट के साथ-साथ पॉस्को एक्ट के तहत भी एक्शन लिया जा सकता है.
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About the author प्रमोद कुमार
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला.
विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला.
काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.
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Published at : 20 Jul 2026 04:13 PM (IST)
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