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Who Is Anil Menon: कौन हैं अनिल मेनन? शुभांशु शुक्ला के बाद जा रहे स्पेस मिशन पर, भारत से क्या है रिश्ता?

July 13, 2026

Time Published: Monday, July 13, 2026, 11:37 [IST]

Who Is Anil Menon: 25 जून 2025, ये वो तारीख है जब भारत का नाम इतिहास में दर्ज हुआ। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला पहले ऐसे भारतीय शख्स बने जो अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS तक पहुंचे। हालांकि इससे पहले राकेश शर्मा भी जा चुके थे लेकिन उन्हें ISS पहुंचने का मौका नहीं मिला था। इसके अलावा कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसे भारतीय मूल के नाम भी हैं जो स्पेस की सैर कर चुके हैं। अब इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ने जा रहा है। ये नाम है भारतीय मूल के शख्स अनिल मेनन का। जानेंगे कौन हैं अनिल मेनन और कैसे उन्हें ये मौका मिल रहा है।

भारतीय मूल के अनिल मेनन अपने पहले स्पेस मिशन के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मेनन पहले ऐसे शख्स होंगे जो मलयाली मूल से आते होंगे और अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे। वे 14 जुलाई को कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से उड़ान भरेंगे, जिसके बाद आठ महीने का यह मिशन शुरू होगा।

Who Is Anil Menon
Source- X/@astro_anil

कौन-कौन जा रहा अनिल के साथ?

इस सफर में अनिल मेनन अकेले नहीं जा रहे हैं। वे रूसी कॉस्मोनॉट्स प्योत्र दुब्रॉव और एना किकिना के साथ यात्रा करेंगे। ISS पर पहुंचने के बाद, यह पूरी क्रू टीम आने वाले वक्त के मानव अंतरिक्ष मिशनों को सपोर्ट करने के लिए कई तरह के वैज्ञानिक प्रयोग और एडवांस टेक्नोलॉजी का टेस्ट करेगी, जिससे आगे के स्पेस ट्रेवल को बेहतर समझा जा सके। दोनो देशों के वैज्ञानिक इस मिशन पर नजर रख रहे है।

केरल के मुख्यमंत्री ने दी बधाई

मेनन की इस कामयाबी पर केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सेमीकंडक्टर क्रिस्टल और मेडिसिन पर रिसर्च करने का उनका यह मिशन ह्यूमन एक्सीलेंस का एक बड़ा उदाहरण है। पूरा मलयाली समुदाय उनके सुरक्षित और सफल मिशन के लिए सामूहिक प्रार्थना और शुभकामनाएं देता है।" मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह रिसर्च आने वाले समय मे मददगार होगी।

पिता केरल से और मां यूक्रेनी

अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था। उनके पिता भारत के केरलम राज्य से आते हैं और मां यूक्रेनी हैं। अनिल प्रोफेशन से एक इमरजेंसी डॉक्टर हैं और इसके साथ ही वे यूएस स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर भी अपनी सेवाएं दे रहे है। अपने इस आठ महीने के मिशन के दौरान मेनन कई साइंस एक्सपेरिमेंट्स का हिस्सा बनेंगे, जिससे रिसर्चर्स को यह समझने में मदद मिलेगी कि स्पेस में इंसानी शरीर कैसे बदलता है। वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन करेंगे कि जीरो ग्रेविटी में शरीर में ब्लड फ्लो कैसे होता है, नसें किस तरह प्रभावित होती हैं और क्या खून की बनावट में कोई बदलाव आता है, जिसके निष्कर्ष बाद में पब्लिक के लिए छापे जाएंगे।

मिशन में अनिल का क्या होगा रोल?

इस मिशन पर अनिल मेनन एक बेहद खास टेस्ट में मदद करेंगे, जिसमें यह देखा जाएगा कि क्या स्पेस स्टेशन के पीने के पानी का इस्तेमाल करके सुरक्षित इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड बनाया जा सकता है। अगर यह टेस्ट सफल रहता है, तो आने वाले वक्त में चांद और मंगल के लंबे मिशनों पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से भारी मात्रा में IV फ्लूइड ले जाने की जरूरत नही पड़ेगी और वे स्पेस में ही डिहाइड्रेशन या मेडिकल इमरजेंसी का इलाज कर सकेंगे, जिस्से उनका काम आसान होगा।

अंतरिक्ष में अल्ट्रासाउंड करेंगे मेनन?

नासा के मुताबिक, मेनन अपने मिशन के दौरान कई मेडिकल और टेक्नोलॉजी टेस्ट में भी भाग लेंगे। इनमें ऑगमेंटेड रियलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अल्ट्रासाउंड स्कैन का इस्तेमाल करना शामिल है। इस तकनीक का टेस्ट इसलिए किया जा रहा है ताकि भविष्य में चांद, मंगल और उससे भी आगे के लंबे मिशन्स पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्री खुद ही अपना मेडिकल चेक-अप आसानी से कर सकें, और उन्हे तत्काल धरती से मदद न मांगनी पड़े।

भले ही अमेरिकी, पर दिल में बसता भारत और केरलम

अनिल भले ही अमेरिका में पैदा हुए, पले-बड़े और अमेरिका के लिए ही काम किया। लेकिन उनका भारत से प्रेम कभी अलग नहीं हुआ। वे अक्सर अपनी मातृभाषा मलयालम में पोस्ट करते हैं, उसे समझते हैं और पढ़ते भी हैं। इसके अलावा वे ISRO की सफलताओं को भी सेलिब्रेट करते हैं।

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