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Vishwakarma Jayanti 2026: 16 या 17 सितंबर... विश्वकर्मा पूजा कब है? नोट करें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और विधि

September 16, 2026

Vishwakarma Jayanti 2026: सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार माना जाता है. इनका महत्व बहुत खास होता है. विश्वकर्मा जयंती के दिन इनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है. हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पर हुआ था. दरअसल, उनके जन्म की गणना चंद्र कैलेंडर के अनुसार नहीं की जाती है. सौर कैलेंडर के मुताबिक, कन्या संक्राति पर उनका जन्मोत्सव होता है. जन्मोत्सव ही विश्वकर्मा जयंती के नाम से जाना जाने वाला पर्व है. इस साल 17 सितंबर 2026 को विश्वकर्मा जयंती है. हालांकि, हर वर्ष 17 तारीख को ही इनकी पूजा की जाती है.

विश्वकर्मा जयंती के दिन विशेष रूप से कारखानों, फैक्ट्रियों, दुकानों, बड़े प्रतिष्ठान की मशीनों, औजार-उपकरण इस्तेमाल करने वाले स्थानों पर पूजा की जाती है. इस दिन इनकी पूजा करने से कार्यक्षेत्रों में उन्नति, सुख और समृद्धि आती है.

पूर्वी भारत का प्रमुख पर्व है विश्वकर्मा जयंती

विश्वकर्मा जयंती का त्योहार मुख्य रूप से पूर्वी भारत के राज्यों में ज्यादा मनाया जाता है. बिहार, बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत यूपी और कई राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल विश्वकर्मा जयंती पर अभिजीत मुहूर्त बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. चलिए जानते हैं इस साल विश्वकर्मा जयंती का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, पूजन सामग्रियां और महत्व.

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विश्वकर्मा पूजा कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026 को है. इस दिन गुरुवार है और भाद्रपद मास की सप्तमी तिथि है. इस दिन षष्ठी तिथि सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 1 मिनट पर होगा.

विश्वकर्मा पूजा 2026 शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त- प्रात:काल 04:27 से लेकर सुबह 5 बजकर 14 मिनट तक
  • अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर 12:32 मिनट तक
  • अमृत काल- सुबह 8:24 से 10 बजकर 10 मिनट तक
  • सायाह्न सन्ध्या- शाम 06:15 से शाम 07 बजकर 26 मिनट तक
  • निशिता मुहूर्त- रात 11:45 से लेकर रात 12 बजकर 32 मिनट तक (18 सितंबर)

विश्वकर्मा पूजा सामग्री लिस्ट

विश्वकर्मा पूजन विधि

विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले आपको अपने पूजा स्थल और कार्यस्थल की सफाई अच्छे से करनी है. इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और उनकी मूर्ति का गंगाजल से अभिषेक करें.अब एक चौकी बिठाएं और उस पर पीला वस्त्र बिछाएं.  इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर चौकी पर स्थापित करें. उनके समक्ष दीया जलाएं. उन्हें रोली, अक्षत, फूल माला, फल, मिठाई और खीरे का प्रसाद चढ़ाएं. उन्हें सुपारी और पान भी चढ़ाएं.

भगवान को पुष्प और चंदन अर्पित करें. इसके साथ ही कार्यस्थल पर मौजूद मशीनों, औजारों और वाहन तथा अन्य उपकरणों की सफाई भी करें और उन्हें रोली का टीका लगाएं. अक्षत लगाएं और फूल अर्पित करें. उनकी पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा के मंत्रों का जाप करें और श्रद्धा से उनकी आरती करें. भगवान को लगाया गया भोग सभी को बांटे.

विश्वकर्मा भगवान के शक्तिशाली मंत्र

  • ऊं विश्वकर्मणे नम:
  • ऊं ह्रीं विश्वकर्मणे नमः
  • ऊं श्री सृष्टनाय सर्वसिद्धाय विश्वकर्माय नमो नमः
  • ऊं प्रजापतये विद्महे पुरुषाय धीमहि तन्नो विश्वकर्मा प्रचोदयात्

विश्वकर्मा जयंती का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को यान्त्रिकी, वास्तुकला विज्ञान तथा स्थापत्य वेद के रचयिता के रूप में पूजा जाता है. सभी वर्ग एवं विधा के शिल्पकारों द्वारा भगवान विश्वकर्मा को संरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है. इसलिए, विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर अधिकांश शिल्पकार एवं व्यापारी आदि अपने व्यापारिक यन्त्रों की पूजा-अर्चना भी करते हैं.

ऋग्वेद में भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्माण्ड के वास्तुकार एवं रचनात्मकता के मूर्त स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है. विश्वकर्मा जी ने सृष्टि-सृजन के कार्य में भगवान ब्रह्मा की सहायता करने हेतु संसार के मानचित्र की रचना की थी. विभिन्न धर्मग्रंथों में प्राप्त वर्णन के अनुसार भगवान कृष्ण के लिए द्वारका नगरी, पाण्डवों के लिए खांडवप्रस्थ में इंद्रप्रस्थ का महल, सुदामा जी के लिए सुदामापुरी, सुवर्णमयी लंका तथा देवताओं के स्वर्गलोक का निर्माण विश्वकर्मा भगवान ने ही किया था. इसके अलावा, उन्होंने देवताओं के लिए अनेकों अस्त्र-शस्त्रों की रचना भी की थी. उन्होंने भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल तथा भगवान कार्तिकेय का भाला आदि इन सभी दिव्य आयुधों की रचना भी विश्वकर्मा जी ने ही की थी.

विश्वकर्मा जयंती पर मशीनों और औजारों की पूजा क्यों की जाती है?

विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ मशीनों, औजारों और काम में इस्तेमाल होने वाले दूसरे उपकरणों की भी पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्पकला और वास्तुकला के देवता है. यही वजह है कि इस दिन उन चीजों की पूजा की जाती है, जिनकी मदद से लोग अपना काम करते हैं और अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं. इस दिन मशीनों पर काम भी नहीं किया जाता है.

इस दिन फैक्ट्री, कारखाने, दुकान और वर्कशॉप में रखी मशीनों और औजारों की सबसे पहले अच्छी तरह सफाई की जाती है. इसके बाद मशीनों और उपकरणों पर रोली और अक्षत लगाकर फूल चढ़ाए जाते हैं. विश्वकर्मा पूजा का संबंध सिर्फ मशीनों से नहीं है. यह दिन मेहनत और काम के साधनों के सम्मान का भी प्रतीक माना जाता है. कारीगर, मैकेनिक, इंजीनियर, बढ़ई, लोहार, मशीन ऑपरेटर और निर्माण कार्य से जुड़े लोग इस दिन विशेष पूजा करते हैं. हालांकि, कई व्यापारी भी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों में रखे उपकरणों की पूजा इस दिन करते हैं.

विश्वकर्मा भगवान का विसर्जन कब किया जाएगा?

आमतौर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को होने के बाद अगले दिन पर मूर्ति विसर्जन किया जाएगा. मूर्ति का विसर्जन करने के लिए 18 सितंबर 2026 का दिन शुभ माना गया है. पूजा के अगले दिन प्रात:काल में या शुभ मुहूर्त में विश्वकर्मा भगवान का विसर्जन कर सकते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)