
वास्तु शास्त्रImage Credit source: pexels
Pendulum Clock: घर की सजावट हो या समय देखने की जरूरत, दीवार घड़ी हर घर का एक अहम हिस्सा होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घड़ी सिर्फ समय बताने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आपके घर की ऊर्जा, तरक्की और भाग्य को भी तय करती है? वास्तु शास्त्र में घड़ी को बहुत ही शक्तिशाली साधन माना गया है. विशेष रूप से पेंडुलम वाली घड़ी, अगर इसे वास्तु के अनुसार सही दिशा में लगाया जाए, तो यह सोई हुई किस्मत को जगा सकती है और घर से नकारात्मक ऊर्जा को पल भर में बाहर कर सकती है. आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार पेंडुलम वाली घड़ी किस दिशा में लगानी चाहिए और इससे जुड़े क्या खास नियम हैं
पेंडुलम वाली घड़ी किस दिशा में लगाएं?
वास्तु के अनुसार, घर में पेंडुलम वाली घड़ी लगाने के लिए उत्तर दिशा को शुभ माना जाता है. उत्तर दिशा का संबंध धन के देवता कुबेर से माना जाता है. ऐसे में इस दिशा में घड़ी लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने और आर्थिक स्थिति बेहतर होने की मान्यता है. इसके अलावा पेंडुलम वाली घड़ी को पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है. पूर्व दिशा का संबंध उगते हुए सूर्य से माना जाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस दिशा में घड़ी लगाने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के लिए तरक्की के नए अवसर आने की संभावना बढ़ती है.
उत्तर दिशा में घड़ी लगाने से क्या होता है?
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि इस दिशा को घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता के अनुसार, अगर पेंडुलम वाली घड़ी उत्तर दिशा की दीवार पर लगाई जाए तो इससे घर में धन-धान्य और समृद्धि का माहौल बना रहता है.
पूर्व दिशा भी मानी जाती है शुभ
पूर्व दिशा को भी पेंडुलम वाली घड़ी लगाने के लिए अच्छा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, यह दिशा सूर्य की ऊर्जा से जुड़ी हुई है. इस दिशा में घड़ी लगाने से घर में सकारात्मक माहौल बना रहने की मान्यता है. अगर आपके घर में उत्तर दिशा की दीवार पर घड़ी लगाने की जगह नहीं है, तो आप पूर्व दिशा की दीवार पर पेंडुलम वाली घड़ी लगा सकते हैं. इससे घर की सजावट भी अच्छी नजर आती है और वास्तु के लिहाज से भी इसे शुभ माना जाता है.
घर में दक्षिण दिशा में घड़ी लगाने से बचें
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा में घड़ी लगाने से बचना चाहिए. इस दिशा को शुभ कार्यों और सकारात्मक ऊर्जा के लिहाज से कम अनुकूल माना जाता है. इसलिए पेंडुलम वाली घड़ी को दक्षिण दिशा की दीवार पर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.
पेंडुलम वाली घड़ी क्यों मानी जाती है खास?
पेंडुलम वाली घड़ी लगातार चलती रहती है और उसका पेंडुलम एक निश्चित गति से आगे-पीछे होता रहता है. वास्तु मान्यताओं में चलती हुई घड़ी को समय की गति और आगे बढ़ने का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि पेंडुलम वाली घड़ी को घर में सकारात्मक बदलाव और नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि अगर ऐसी घड़ी सही दिशा में लगी हो और लगातार सही समय दिखा रही हो तो यह घर के वातावरण में सकारात्मकता बनाए रखने में मदद कर सकती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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