उत्तराखंड चुनाव 2027: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की सियासत में 'पौड़ी गढ़वाल' केवल अलकनंदा-मंदाकिनी के संगमों, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला पूरे राज्य के राजनीतिक नेतृत्व की जननी और देवभूमि का शक्ति केंद्र माना जाता है. जहां हरिद्वार अपने मैदानी ताने-बाने और औद्योगिक बेल्ट के लिए जाना जाता है, वहीं पौड़ी गढ़वाल अपने समृद्ध ऐतिहासिक इतिहास, सैन्य परंपरा और राज्य को सबसे अधिक मुख्यमंत्री व शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी देने के गौरव के कारण राज्य के राजनीतिक पटल पर बेहद असरदार भूमिका निभाता है. 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर देवभूमि के इस रणनीतिक रूप से अहम जिले में भी राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं.
पौड़ी गढ़वाल की राजनीति का मिज़ाज राज्य के मैदानी जिलों से काफी अलग है. 6 विधानसभा सीटों वाला यह जिला (पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन और यमकेश्वर) सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बेहद प्रतिष्ठित है. यहां चुनावी वैतरणी पार करने के लिए पलायन की गंभीर चुनौती, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाओं का बुनियादी ढांचा, रिवर्स माइग्रेशन, पर्यटन, और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के मतदाताओं का विश्वास हासिल करना बेहद निर्णायक सिद्ध होता है.
‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात पौड़ी गढ़वाल जिले की...
पौड़ी गढ़वाल न केवल उत्तराखंड का प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि लैंसडाउन जैसी ऐतिहासिक सैन्य छावनी और श्रीनगर का गढ़वाल विश्वविद्यालय इसकी पहचान को मजबूती प्रदान करते हैं. कंडोलिया की वादियों से लेकर लैंसडाउन के देवदार के जंगलों तक, और कोटद्वार के मैदानी प्रवेश द्वार से लेकर चौबट्टाखाल व यमकेश्वर के दुर्गम पहाड़ों तक, पौड़ी गढ़वाल की जनता का हर राजनीतिक फैसला देहरादून की विधानसभा की राजनीति को गहराई से प्रभावित करता है.
ऐतिहासिक रूप से पौड़ी गढ़वाल की राजनीति राज्य के सत्ता पक्ष और विपक्ष के सबसे बड़े चेहरों की कर्मभूमि रही है. राज्य गठन के बाद से ही यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच सीधी और तीखी टक्कर देखने को मिली है. पहाड़ी जनसांख्यिकी के कारण यहां स्थानीय अस्मिता, भूतपूर्व सैनिकों व रक्षा परिवारों के मुद्दे और दूरदराज के गांवों का विकास हमेशा से चुनावी नतीजों की दिशा तय करता आया है.
यहाँ के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे पहाड़ों से होता पलायन, जंगली जानवरों से खेती को नुकसान, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, रोजगार के अवसर, और ऑल वेदर रोड के बाद स्थानीय पर्यटन को गति देने के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर पौड़ी गढ़वाल जिले की 6 विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस दिग्गज का पलड़ा भारी रहा है? और 2027 के इस महामुकाबले में किसकी चुनावी रणनीति सटीक बैठेगी? आइये सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं…
2011 की जनगणना के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर
| श्रेणी | कुल | पुरुष | महिला |
| जनसंख्या | 6,87,271 | 3,26,829 | 3,60,442 |
| साक्षरता दर | 82.02% | 92.71% | 72.60% |
पौड़ी गढ़वाल जिले की धार्मिक आबादी
| धर्म | जनसंख्या प्रतिशत (%) |
| हिंदू | 96.11% |
| मुस्लिम | 3.34% |
| ईसाई | 0.31% |
| सिख | 0.09% |
| जैन | 0.03% |
| बौद्ध | 0.01% |
| अन्य | 0.01% |
2022 विधानसभा चुनाव परिणाम
| विधानसभा सीट (संख्या) | उम्मीदवार का नाम | राजनीतिक पार्टी | कुल मिले वोट |
| 1. यमकेश्वर (36) | रेनू बिष्ट | BJP | 28,390 |
| शैलेंद्र सिंह रावत | INC | 17,980 | |
| शांति प्रसाद भट्ट | UKD | 613 | |
| 2. पौड़ी (SC) (37) | राजकुमार पोरी | BJP | 25,865 |
| नवल किशोर | INC | 20,127 | |
| मनोहर लाल | AAP | 736 | |
| 3. श्रीनगर (38) | डॉ. धन सिंह रावत | BJP | 29,618 |
| गणेश गोदियाल | INC | 29,031 | |
| मोहन काला | UKD | 4,271 | |
| 4. चौबट्टाखाल (39) | सतपाल महाराज | BJP | 24,927 |
| केसर सिंह (नेगी) | INC | 13,497 | |
| दिगमोहन नेगी | AAP | 1,908 | |
| 5. लैंसडाउन (40) | दलीप सिंह रावत | BJP | 24,504 |
| अनुकृति गुसाईं रावत | INC | 14,636 | |
| आनंद प्रकाश | UKD | 843 | |
| 6. कोटद्वार (41) | ऋतु खंडूरी भूषण | BJP | 32,103 |
| सुरेंद्र सिंह नेगी | INC | 28,416 | |
| धीरेंद्र सिंह चौहान | IND | 12,484 |
(नोट: बोल्ड में दिए गए उम्मीदवार प्रत्येक सीट के विजयी प्रत्याशी हैं.)
जानें सभी सीटों के बारे में....
1. यमकेश्वर (Yamkeshwar): इस सीट पर भाजपा की रेनू बिष्ट ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस के शैलेंद्र सिंह रावत को 10,410 वोटों के भारी अंतर से मात दी थी. इस चुनाव में भाजपा को कुल वैध मतों का लगभग 59% हिस्सा मिला, जिसने इस सीट पर पार्टी की पकड़ को और मजबूत किया.
2. पौड़ी (Pauri SC): अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा के राजकुमार पोरी ने 25,865 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के नवल किशोर को 5,738 वोटों के अंतर से हराया, जबकि आम आदमी पार्टी सहित अन्य दल यहाँ तीसरे स्थान पर बेहद पीछे छूट गए.
3. श्रीनगर (Srinagar): यह पूरे जिले की सबसे रोमांचक और कड़े मुकाबले वाली सीट थी, जहाँ भाजपा के डॉ. धन सिंह रावत ने अपने प्रतिद्वंद्वी को पटखनी दी. उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता गणेश गोदियाल को महज 587 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराकर इस सीट पर दोबारा कब्जा किया.
4. चौबट्टाखाल (Chaubattakhal): इस हाई-प्रोफाइल सीट से वरिष्ठ भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने 24,927 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के केसर सिंह नेगी को 11,430 वोटों के विशाल अंतर से पराजित किया, जबकि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे.
5. लैंसडाउन (Lansdowne): इस पारंपरिक सीट पर भाजपा के दलीप सिंह रावत ने 24,504 वोट पाकर पार्टी का परचम लहराए रखा. उन्होंने कांग्रेस की चर्चित उम्मीदवार अनुकृति गुसाईं रावत को 9,868 वोटों के अंतर से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था.
6. कोटद्वार (Kotdwar): इस बेहद चर्चित सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की बेटी ऋतु खंडूरी भूषण ने 32,103 वोट लाकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेंद्र सिंह नेगी को 3,687 वोटों से हराया और बाद में वे उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला स्पीकर भी बनीं.