Published: Friday, September 18, 2026, 12:13 [IST]
UPI MDR Monitoring: 15 अक्टूबर 2026 से कुछ बड़े UPI भुगतान पर नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होने जा रहा है। इसके बाद 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा। लेकिन ये चार्ज कस्टमर को नहीं बल्कि कारोबारी को करना होगा। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने साफ किया है कि दुकानदार इस लागत को सीधे ग्राहक पर नहीं डाल सकता।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। अगर किसी दुकानदार की लागत बढ़ी, तो क्या वह सामान का दाम बढ़ाकर इसकी भरपाई करेगा? या फिर UPI लेने से ही मना कर देगा? कैश में डील करेगा। सरकार अब पेमेंट एग्रीगेटर्स और बैंकों के जरिए ऐसे लेन-देन पर नजर रखने की तैयारी में है।
दुकानदार ने ग्राहक से MDR मांगा तो क्या होगा?
सरकार का रुख साफ है कि MDR ग्राहक से अलग से नहीं वसूला जाना चाहिए। बैंकों और पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि नया शुल्क ग्राहक तक न पहुंचे। सरकार के मुताबिक 15 अक्टूबर से व्यवस्था लागू होने के बाद मर्चेंट लेन-देन की निगरानी भी की जाएगी। जहां नियम तोड़ने की बात सामने आएगी, वहां जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
मतलब अगर 10,000 रुपये का सामान खरीदकर आपने UPI से भुगतान किया, तो आपसे 40 रुपये का अलग MDR मांगना इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। 0.4 फीसदी शुल्क कारोबारी स्तर पर लगेगा।
2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर कितना MDR?
नई व्यवस्था में सामान्य पर्सन-टू-मर्चेंट UPI भुगतान में 2,000 रुपये से ज्यादा की रकम पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा। 10,000 रुपये के भुगतान पर यह 40 रुपये बैठेगा। 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के भुगतान पर अधिकतम MDR 300 रुपये रहेगा। यानी 1 लाख रुपये का भुगतान होने पर भी तय सीमा से ज्यादा MDR नहीं लिया जाएगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा।
हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज
पर्सन-टू-पर्सन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजा गया पैसा पहले की तरह मुफ्त रहेगा। 2,000 रुपये तक के सामान्य मर्चेंट भुगतान भी इस MDR से बाहर रहेंगे।
छोटे कारोबारियों के लिए भी अलग छूट रखी गई है। सरकार के मुताबिक, करीब 96 फीसदी P2M लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे। इसका सीधा मतलब है कि रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतान करने वाले ज्यादातर ग्राहकों पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
रेलवे, ईंधन और बीमा के लिए अलग नियम
कुछ सेवाओं के लिए सामान्य 0.4 फीसदी दर नहीं रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर 5 रुपये का तय MDR रखा गया है।
पूंजी बाजार से जुड़े भुगतान के लिए भी अलग दर रखी गई है। म्यूचुअल फंड और शेयर कारोबार से जुड़े भुगतान पर 0.02 फीसदी MDR, अधिकतम 300 रुपये तक, लागू होगा। वहीं बीमा प्रीमियम, एसआईपी और दूसरे ऑटो-डेबिट भुगतान पर MDR नहीं लगाया गया है।
छोटे दुकानदारों को कितनी राहत?
छोटे कारोबारियों को नए ढांचे में बड़ी राहत दी गई है। UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान लेने वाले पात्र छोटे विक्रेताओं को MDR से छूट मिलेगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस व्यवस्था से करीब 96 फीसदी मर्चेंट लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे।
हालांकि, व्यापारिक संगठनों की तरफ से इस सीमा को लेकर सवाल भी उठाए गए हैं। कुछ कारोबारी संगठनों का कहना है कि कम मुनाफे वाले कारोबार में अतिरिक्त लागत संभालना आसान नहीं होगा।
क्या दुकानदार सामान महंगा कर सकते हैं?
यही इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा व्यावहारिक सवाल है। कारोबारी अगर MDR को अपनी लागत मानकर कीमत में बदलाव करते हैं, तो ग्राहक पर इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। कुछ व्यापारी UPI लेने से इनकार कर सकते हैं या नकद भुगतान के लिए कह सकते हैं। व्यापारिक संगठनों ने ऐसे जोखिमों को लेकर चिंता जताई भी है।
लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दुकानदार बड़े पैमाने पर सामान महंगा कर देंगे। यह कारोबार की लागत, प्रतिस्पर्धा और ग्राहक के व्यवहार पर निर्भर करेगा। 15 अक्टूबर के बाद जमीन पर इसका असली असर ज्यादा साफ होगा।
UPI पर GST लगेगा या नहीं?
सरकार ने UPI पर अलग से GST लगाए जाने की बात को खारिज किया है। सरकारी पक्ष के मुताबिक, MDR पर अलग GST नहीं लगाया गया है। कारोबारियों को MDR के भुगतान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ा लाभ मिल सकता है। अगर लागू होने के दौरान GST को लेकर कोई नया सवाल सामने आता है, तो GST परिषद उस पर विचार कर सकती है।
अब सरकार की असली परीक्षा क्या है?
इस पूरे बदलाव में सबसे अहम चीज सिर्फ MDR की दर नहीं, बल्कि उसका जमीन पर पालन है। सरकार ने कहा है कि पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ मिलकर मर्चेंट लेन-देन पर निगरानी रखी जाएगी। मकसद यही है कि कारोबारी ग्राहक से अलग से UPI शुल्क न मांगें।
अब नजर 15 अक्टूबर के बाद के व्यवहार पर रहेगी। अगर दुकानदार खुद लागत संभालते हैं, तो ग्राहक पर सीधा असर सीमित रहेगा। लेकिन अगर UPI लेने से इनकार, अतिरिक्त रकम की मांग या कीमत बढ़ाने जैसी प्रथाएं बढ़ती हैं, तो सरकार की निगरानी व्यवस्था की असली परीक्षा वहीं होगी।