Published: Sunday, October 4, 2026, 22:12 [IST]
Sant Ravidas Nagar Bhadohi UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही जिले का नाम बदलने का ऐलान किया है। अब जिले को 'संत रविदास नगर भदोही' के नाम से जाना जाएगा। रविवार, 4 अक्टूबर को, भदोही में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। इससे पहले 29 जुलाई को भी उन्होंने जिले का नाम संत रविदास के नाम पर करने की बात कही थी।
योगी सरकार इस फैसले को संत रविदास के सम्मान और सामाजिक एकता से जोड़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास ने अपनी आध्यात्मिक भक्ति के जरिए समाज को जोड़ने का काम किया। उनके मुताबिक, संत रविदास का सपना था कि किसी के साथ भेदभाव न हो और सभी को भोजन व कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। लेकिन इस फैसले का एक राजनीतिक पहलू भी है। भदोही वाराणसी के करीब है और पूर्वांचल में दलित मतदाताओं की राजनीतिक अहमियत रही है। ऐसे में संत रविदास का नाम जोड़ने को दलित समाज तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।
पहले समझिए, भदोही का नाम बार-बार क्यों बदला?
भदोही का नाम बदलने का इतिहास करीब तीन दशक पुराना है। जिले के गठन के बाद से ही इसके नाम को लेकर अलग-अलग सरकारों ने फैसले किए।
- 30 जून 1994: तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने वाराणसी से अलग करके भदोही को नया जिला बनाया।
- 4 दिसंबर 1997: मायावती सरकार ने जिले का नाम बदलकर 'संत रविदास नगर' कर दिया।
- 1999: तत्कालीन भाजपा सरकार में नाम के साथ भदोही भी जोड़ दिया गया और यह 'संत रविदास नगर भदोही' हुआ।
- 6 दिसंबर 2014: अखिलेश यादव सरकार ने 'संत रविदास नगर' हटाकर जिले का नाम फिर 'भदोही' कर दिया।
- 4 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर 'संत रविदास नगर भदोही' नाम रखने की घोषणा की।
इस तरह नाम के साथ संत रविदास की पहचान पहले भी जुड़ चुकी है। अब योगी सरकार ने उसी नाम को फिर से बहाल करने का ऐलान किया है।
संत रविदास का नाम क्यों चुना गया?
संत रविदास मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। उनकी शिक्षाओं में समानता, भक्ति और जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर इंसान को इंसान मानने का संदेश प्रमुख रहा है। उत्तर भारत में खासकर दलित समाज के एक बड़े हिस्से में संत रविदास के प्रति गहरी आस्था है।
योगी आदित्यनाथ ने नाम बदलने की घोषणा को इसी विरासत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने आध्यात्मिक भक्ति के जरिए समाज को एकजुट किया था। मुख्यमंत्री ने मुफ्त राशन और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि संत रविदास के समानता के संदेश को आज की योजनाओं में भी देखा जा सकता है। राजनीतिक तौर पर देखें तो संत रविदास का नाम जोड़ना दलित मतदाताओं के बीच प्रतीकात्मक संदेश देने वाला फैसला माना जा सकता है। खासकर ऐसे समय में जब यूपी में 2027 के चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और सभी दल सामाजिक समीकरण साधने में जुटे हैं।
2027 चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। भाजपा लंबे समय से दलित समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। संत रविदास के नाम पर जिले का नाम रखने का फैसला इसी रणनीति के संदर्भ में देखा जा सकता है।
हालांकि, केवल नाम बदलने से किसी समाज का राजनीतिक समर्थन तय नहीं होता। इसका असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि सरकार की योजनाओं और स्थानीय विकास का लाभ लोगों तक कितना पहुंचता है।यह भी ध्यान रखना होगा कि भदोही की पहचान सिर्फ धार्मिक या राजनीतिक नहीं है। यह जिला अपने कालीन उद्योग के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। इसलिए नए नाम में 'भदोही' को बनाए रखना स्थानीय पहचान और उद्योग से जुड़े लोगों के लिहाज से अहम है।
कालीन उद्योग की पहचान पर क्या असर पड़ेगा?
भदोही को 'कालीन नगरी' के रूप में जाना जाता है। यहां का कालीन उद्योग स्थानीय रोजगार और निर्यात से जुड़ा है। जिले के नाम में 'भदोही' बने रहने से इस पहचान को पूरी तरह हटाया नहीं गया है।
नए नाम 'संत रविदास नगर भदोही' में एक तरफ संत रविदास की विरासत को जगह दी गई है, तो दूसरी तरफ भदोही की पुरानी पहचान भी बरकरार रखी गई है। यही वजह है कि इस बार नाम में दोनों को साथ रखा गया है।
1,340 करोड़ की परियोजनाओं के बीच नाम बदलने का ऐलान
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद की। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में विकास और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस समय विकास का पैसा दूसरे कामों में इस्तेमाल होता था।
योगी ने दावा किया कि भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई और प्रदेश की छवि बदली है। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश को बीमारू या दंगों वाला राज्य नहीं कहा जा सकता। मुख्यमंत्री ने अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का भी दावा किया। साथ ही चेतावनी दी कि युवाओं के रोजगार के अवसरों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।