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दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद की जमानत याचिका पर पुलिस को भेजा नोटिस - Haribhoomi

July 31, 2026

Umar Khalid: दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद की जमानत याचिका पर पुलिस को भेजा नोटिस

Umar Khalid: दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद की नई जमानत याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा है। अब इस मामले में 27 अगस्त को सुनवाई होगी।

Umar Khalid

उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस।

  • Published: 31 Jul 2026, 03:50 PM IST
  • Last Updated: 31 Jul 2026, 03:53 PM IST

Umar Khalid: दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में उमर खालिद  की नई जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा है। शुक्रवार को कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की है। कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई 27 अगस्त 2026 को तय की है।  

जानकारी के मुताबिक, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने 31 जुलाई को सुनवाई की है। उन्होंने इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वे उमर खालिद की नियमित और अंतरिम जमानत याचिकाओं पर 2 हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करें। इसके साथ ही कोर्ट ने उमर खालिद के मामले को सह-आरोपी शारजील इमाम की जमानत याचिका के साथ जोड़ दिया है। अब इन दोनों मामलों पर 27 अगस्त को एक साथ सुनवाई होगी।  

दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

बताया जा रहा है कि इस नई अपील को कड़कड़डूमा ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई, 2026 के फैसले के खिलाफ दायर की गई है। ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी, 2026 के पुराने आदेश के अनुसार आरोपी केवल तभी नई जमानत मांग सकते हैं, जब सुरक्षित गवाहों के बयान दर्ज हो जाएं, या फिर उस आदेश को आए हुए 1 साल बीत चुका है।  

उमर खालिद के वकीलों ने दी दलीलें

ॉउमर खालिद के वकीलों ने हाईकोर्ट के सामने 2 मुख्य दलीलें रखी हैं। बचाव पक्ष का कहना है कि आरोपी करीब 6 साल से जेल में बंद हैं। लेकिन मुकदमे में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। यहां तक कि अभी तक आरोपों को तय करने पर भी बहस पूरी नहीं हो सकी है। बिना किसी मुकदमे के इतने लंबे वक्त तक जेल में रहना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने ही 5 जनवरी के कड़े ऑर्डर पर कुछ गंभीर आपत्तियां जताई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बड़े सवाल को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया है कि UAPA जैसे कड़े कानून के तहत लंबे समय तक जेल में रखने और जमानत के अधिकारों के बीच कैसे संतुलन बनाया जाए।  वकीलों का तर्क है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक आरोपियों को अंतरिम राहत मिलनी चाहिए।