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UCC पर बड़ा TARGET, 2029 तक 21 राज्यों का PLAN, सहयोगी क्यों अलग?

September 15, 2026

UCC पर बड़ा TARGET, 2029 तक 21 राज्यों का PLAN, सहयोगी क्यों अलग?

गृह मंत्री अमित शाहImage Credit source: TV9

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 बीजेपी-NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का ऐलान किया है. ये ऐलान बड़ा है और डेडलाइन भी तय है. लेकिन सवाल हैकि क्या 21 राज्यों का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार है? क्योंकि इनमें कई राज्यों में अगले दो साल में चुनाव हैं. कई जगह सरकार बीजेपी की नहीं, सहयोगियों की है. तो क्या 2029 सिर्फ TARGET है. या इसे पूरा करने का ठोस PLAN भी तैयार है?

दरअसल, अगले साल सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे. इनमें पंजाब में AAP की सरकार है और हिमाचल में कांग्रेस की. जबकि बाकी पांच राज्यों में बीजेपी सत्ता में है. उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है. गुजरात में बिल पास हो चुका है. लेकिन असली सवाल यूपी, गोवा और मणिपुर को लेकर है. उत्तर प्रदेश में अभी UCC का बिल पास नहीं हुआ है और करीब पांच महीने बाद चुनाव हैं. तो क्या चुनाव से पहले यूपी में UCC लागू होगा? या बीजेपी को भरोसा है कि चुनाव के बाद भी उसकी सरकार बनेगी और नई सरकार इसे लागू करेगी? क्योंकि सत्ता बदली तो 2029 का TARGET कैसे पूरा होगा?

मणिपुर की तस्वीर भी आसान नहीं

वहीं, मणिपुर की तस्वीर भी आसान नहीं है. यहां बड़ी आदिवासी आबादी है. हालांकि उत्तराखंड के UCC मॉडल में आदिवासी समुदायों को दायरे से बाहर रखा गया है. हालाकि UCC बीजेपी की लंबे समय से चली आ रही वैचारिक प्रतिबद्धता है. उत्तराखंड में लागू हो चुका है, गुजरात में बिल पास हो चुका है और दूसरे राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार इसके लिए तैयार है, लेकिन विरोध के बीच है.

2029 की डेडलाइन का रोडमैप क्या है?

2029 की डेडलाइन का रोडमैप क्या है? चुनाव के बाद अगर किसी राज्य में बीजेपी या NDA की सरकार नहीं बनी तो UCC कैसे लागू होगा? अब आते हैं साल 2028 पर. इस साल त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव होंगे. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है. पांच राज्यों में बीजेपी की सरकार और दो राज्यों में सहयोगी दल सत्ता में हैं. यानी 2029 के UCC TARGET में सिर्फ बीजेपी नहीं, NDA के सहयोगियों की भूमिका भी अहम होगी.

TDP और JDU में भी UCC को लेकर उहापोह

सबसे पहले बात करते हैं TDP की. TDP के लोकसभा नेता लावु कृष्ण देवरायलु ने UCC को समर्थन देने की बात कही है. लेकिन साथ ही ये भी कहा है कि पार्टी के भीतर अभी इस पर चर्चा नहीं हुई है. यानी सपोर्ट है. लेकिन फाइनल रोडमैप अभी सामने नहीं है. और यही सवाल NDA की दूसरी बड़ी सहयोगी JDU को लेकर भी है. JDU कभी भी UCC विधेयक के समर्थन में खुल कर नहीं रही है. बिहार में इसे लागू करने के खिलाफ है. JDU नेता श्याम रजक का कहना है कि बिहार में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा.

चिराग पासवान पहले करेंगे चर्चा

वहीं कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा चर्चा के पक्ष में हैं और अमित शाह से मुलाकात की बात कह चुके हैं. JDU के बाद LJP रामविलास का रुख भी महत्वपूर्ण है. चिराग पासवान ने साफ कहा है कि पार्टी एकरूपता के साथ विविधता के लिए भी प्रतिबद्ध है. उनका सवाल है UCC का प्रस्ताव सामने आए. उस पर व्यापक चर्चा हो और सभी हितधारकों की राय ली जाए. यानी LJP का MESSAGE साफ है, पहले मसौदा, फिर चर्चा और उसके बाद निर्णय.

NDA में UCC के खुले समर्थक भी

हालांकि NDA में UCC के खुले समर्थक भी हैं. शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे ने इसे समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता से जोड़ा है. HAM के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी अमित शाह के ऐलान का समर्थन किया है. लेकिन विपक्ष का रुख पूरी तरह अलग है. ओवैसी ने UCC का विरोध करते हुए भारत की पहचान को उसकी विविधता और अलग-अलग समुदायों की परंपराओं से जोड़ा है. वही उद्धव ठाकरे के पार्टी ने कहा कि हम ये चाहते हैं लेकिन अगर आप इसको लेकर राजनीति करते हैं तो हमारा विरोध रहेगा.

NCPI ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला

बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य UCC की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन बीजेपी की नई सहयोगी NCPI ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है. वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार का कहना है कि प्रस्ताव आएगा चर्चा होगी फिर पार्टी फैसला करेगी.

क्या आंध्र प्रदेश में UCC लागू होगा?

लोकसभा चुनाव के साथ आंध्र प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होंगे. आंध्र प्रदेश में TDP की सरकार है और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हैं. TDP ने UCC को समर्थन दिया है लेकिन अभी पार्टी के भीतर चर्चा नहीं हुई है. तो क्या बीजेपी TDP को आंध्र प्रदेश में UCC लागू करने के लिए तैयार कर पाएगी? फिलहाल इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता है.

वैसे अमित शाह ने 2029 का टारगेट सामने रख दिया है. लेकिन असली सवाल है कि 21 राज्यों तक पहुंचने का रास्ता क्या है? क्या चुनाव से पहले UCC लागू होगा या बीजेपी को भरोसा है कि चुनाव के बाद भी उसकी और उसके सहयोगियों की सरकारें बनी रहेंगी?

Amod Rai

Amod Rai

21 सालों से राजनीतिक, सामाजिक और पॉलिसी संबंधित विषयों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव। लगातार 2 दशक से बीजेपी, संघ परिवार, संसद और केंद्र सरकार की खबरों पर विशेष निगाह

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