Published: Monday, August 17, 2026, 15:15 [IST]
Twisha Sharma Death Case CBI Chart Sheet: भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब 636 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां, रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है।
दोनों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, दहेज से जुड़ी मौत और आत्महत्या के लिए उकसाने समेत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 80(2), 85, 108 और 3(5) तथा दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, 636 पन्नों की चार्जशीट सामने आने के बाद भी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ट्विशा की हत्या किसने की या उनकी मौत सीधे तौर पर पति और सास के हाथों हुई। CBI ने जिन धाराओं में दोनों को आरोपी बनाया है, वे मुख्य रूप से दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप हैं। अब अदालत में जांच एजेंसी के साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपों की न्यायिक जांच होगी। आइए विस्तार से जानते हैं...
12 मई को ससुराल में ट्विशा मिली थीं मृत
नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा ने दिसंबर 2025 में वकील समर्थ सिंह से शादी की थी। समर्थ, मध्य प्रदेश की रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। शादी के बाद ट्विशा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने पति और सास के साथ रहने लगी थीं।
12 मई 2026 को ट्विशा अपने ससुराल में मृत मिलीं। ससुराल पक्ष की ओर से इसे आत्महत्या बताया गया, जबकि ट्विशा के मायके वालों ने उनकी मौत पर गंभीर सवाल उठाए और दहेज उत्पीड़न के साथ उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया। यही विरोधाभासी दावे आगे चलकर पूरे मामले की जांच का सबसे अहम हिस्सा बने। ट्विशा और समर्थ की सगाई 12 मई 2025 को नोएडा के एक फ्लैट में हुई थी। शादी के करीब छह महीने बाद हुई ट्विशा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए।
FIR से CBI तक कैसे पहुंचा मामला?
ट्विशा की मौत के बाद पुलिस ने उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया। शुरुआती जांच को लेकर ट्विशा के परिवार ने लगातार सवाल उठाए। परिवार ने आरोप लगाया कि जांच में लापरवाही हुई और प्रभावशाली परिवार होने के कारण मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है। पुलिस ने जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) भी बनाया। इस दौरान समर्थ की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया। 22 मई को समर्थ जबलपुर की जिला अदालत पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
मामले में ट्विशा के परिवार ने स्वतंत्र जांच की मांग की। परिवार की आपत्तियों के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर दिल्ली AIIMS की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI की FIR में 2 लाख रुपये के दहेज का आरोप
CBI की शुरुआती FIR में आरोप लगाया गया था कि शादी के समय विदाई के दौरान ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर उनके परिवार से 2 लाख रुपये की मांग की थी। परिवार की ओर से यह रकम दिए जाने का भी आरोप लगाया गया था। CBI ने इसी के आधार पर दहेज से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि, गिरिबाला सिंह ने इन आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने दावा किया था कि 2 लाख रुपये मांगने का सवाल ही नहीं उठता और उनकी अपनी आय भी करीब इतनी थी। इसलिए दहेज मांगने के आरोप को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं।
गर्भावस्था और मानसिक प्रताड़ना का आरोप भी जांच के दायरे में
मामले की जांच के दौरान ट्विशा की गर्भावस्था को लेकर भी कई गंभीर दावे सामने आए। ट्विशा के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि उन पर गर्भपात के लिए दबाव बनाया गया और पति तथा सास ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष ने ट्विशा की मानसिक स्थिति और गर्भावस्था को लेकर अलग दावे किए। गिरिबाला सिंह ने सार्वजनिक रूप से ऐसे आरोप भी लगाए थे जिनमें ट्विशा के स्वास्थ्य और कथित नशीले पदार्थों के सेवन का जिक्र था। CBI ने इन दावों की भी जांच की और डॉक्टरों, मेडिकल रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों को खंगाला।
इसी वजह से जांच केवल दहेज के आरोपों तक सीमित नहीं रही। CBI ने डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोपियों से वॉयस सैंपल लेने और उनके संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाने की कोशिश भी की थी।
क्या ट्विशा की हत्या हुई या उसने सुसाइट किया?
यह इस मामले का सबसे बड़ा सवाल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ससुराल पक्ष ने ट्विशा की मौत को आत्महत्या बताया, जबकि मायके वालों ने हत्या का आरोप लगाया। लेकिन CBI की 636 पन्नों की चार्जशीट में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ जिन धाराओं में आरोप लगाए गए हैं, उनमें दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप प्रमुख हैं।
इसलिए फिलहाल यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि चार्जशीट ने यह साबित कर दिया है कि ट्विशा की हत्या पति ने की या सास ने। चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं।
क्राइम सीन से डिजिटल सबूत तक, CBI ने क्या खंगाला?
CBI ने जांच के दौरान फॉरेंसिक साक्ष्यों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह के घर में क्राइम सीन का रीक्रिएशन भी किया था। इसके अलावा ट्विशा और आरोपियों से जुड़े डिजिटल उपकरणों व घटना से पहले और बाद के संपर्कों की जांच की गई। जांच के दौरान AIIMS दिल्ली की मेडिकल टीम की रिपोर्ट भी अहम रही। जुलाई में सामने आई जानकारी के मुताबिक AIIMS की मेडिकल टीम ने CBI को अपनी अंतिम फॉरेंसिक मेडिकल राय सौंप दी थी। जिम्नास्टिक बेल्ट से जुड़े फॉरेंसिक साक्ष्यों की भी जांच की गई थी।
अब अदालत में क्या होगा?
636 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला अब अगले न्यायिक चरण में पहुंच गया है। CBI ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया है और दोनों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अभियोजन आगे बढ़ाने का आधार पेश किया है। दोनों फिलहाल भोपाल सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। अब अदालत चार्जशीट में पेश किए गए दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि CBI के साक्ष्य दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों को किस हद तक साबित करते हैं और ट्विशा की मौत की परिस्थितियों को अदालत किस तरह देखती है।
यानी 636 पन्नों की चार्जशीट ने मामले में एक बड़ा कानूनी पड़ाव जरूर पार कर दिया है, लेकिन ट्विशा की मौत के पीछे अंतिम रूप से कौन जिम्मेदार है, इसका फैसला अब अदालत की सुनवाई और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही होगा।
मदद बस एक कॉल दूर
पहचान पूर्णतः गोपनीय , पेशेवर परामर्श सेवा
iCALL मेंटल हेल्पलाइन नंबर: 9152987821
सोम - शनि: सुबह 10 बजे - शाम 8 बजे