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आमरण अनशन पर बैठे TGT-PGT अभ्यर्थी की तबियत बिगड़ी: एंबुलेंस से बेली अस्पताल में लाया गया, सिर-पेट में भयंकर दर्द - Prayagraj (Allahabad) News

September 11, 2026

प्रयागराज में टीजीटी पीजीटी अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे पांच आंदोलनकारियों में से एक युवक की तबियत शुक्रवार को खराब हो गई। आमरण अनशन कर रहे अभिषेक की तबीयत बिगड़ने के बाद तत्काल एंबुलेंस में लादकर शहर के बेली अस्पताल में भर्ती कराय

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एंबुलेंस में लादकर शहर के बेली अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

एंबुलेंस में लादकर शहर के बेली अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अनशनकारी के साथी आशुतोष पांडेय ने बताया कि वे लोग 5 तारीख से आमरण अनशन पर बैठे हैं। आज शाम 6 बजे तक वे सभी डीएम कार्यालय पर डटे हुए थे, तभी अचानक अभिषेक की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। अनशन के सातवें दिन अभिषेक का शरीर पूरी तरह टूट चुका है।

उनके पूरे शरीर, सिर और पेट में भयंकर दर्द है। उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि वे न तो कुछ बोल पा रहे हैं और न ही उनसे चला जा रहा है। दर्द से तड़पते देख साथियों ने उन्हें बिना देरी किए बेली अस्पताल में एडमिट कराया।

बेली अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया।

बेली अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया।

​प्रशासन पर आंदोलन दबाने का आरोप

आशुतोष ने कहा कि प्रशासन ने एक बार उनके आंदोलन का दमन करने (दबाने) की कोशिश की थी, लेकिन इसके बावजूद किसी भी अनशनकारी ने अपना अनशन नहीं तोड़ा। फिलहाल बेली अस्पताल में अभिषेक का इलाज जारी है और अन्य साथी उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

डॉक्टर ने इंजेक्शन लगा कर ऑब्जर्वेशन में रखा है।

डॉक्टर ने इंजेक्शन लगा कर ऑब्जर्वेशन में रखा है।

31 अगस्त से सिविल लाइंस के धरना स्थल पर पुरानी नियामावली और पुराने पैटर्न से परीक्षा कराने को लेकर टीजीटी पीजीटी अभ्यार्थियों का अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन जारी था। इसके साथ ही 5 सितंबर से पांच अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे थे। दस दिन तक प्रदर्शन और पांच दिन तक आमरण अनशन के बाद बुधवार यानी 9 सितंबर की देर रात पुलिस ने धरना खत्म करवा दिया था।

जिसके विरोध में गुरूवार को हजारों छात्रों सड़क पर प्रदर्शन किया। शुक्रवार को दोबारा धरने की मांग को लेकर सभी छात्र डीएम ऑफिस पहुंचे थे।

इन बदलावों का सबसे ज्यादा विरोध

  • PGT में B.Ed अनिवार्य: पुरानी नियमावली में प्रवक्ता पद के लिए B.Ed अनिवार्य नहीं था। नई नियमावली में इसे जरूरी किए जाने का अभ्यर्थी विरोध कर रहे हैं।
  • प्राविधिक कला से अवसर खत्म: अभ्यर्थियों का कहना है कि करीब 105 वर्षों से प्राविधिक कला के आधार पर कला शिक्षक बनने का अवसर था, जिसे नई व्यवस्था में खत्म कर B.Ed अनिवार्य किया गया है।
  • हिंदी में संस्कृत की बाध्यता: नई नियमावली में इंटरमीडिएट में संस्कृत को अनिवार्य किए जाने का भी विरोध है। पहले इंटर या स्नातक में से किसी एक स्तर पर संस्कृत होने पर अभ्यर्थी पात्र होते थे।
  • संगीत और गृह विज्ञान में B.Ed जरूरी: संगीत में प्रभाकर के साथ B.Ed और गृह विज्ञान में भी B.Ed अनिवार्य किए जाने पर अभ्यर्थी आपत्ति जता रहे हैं।
  • C.P.Ed और सिंगल सब्जेक्ट के अभ्यर्थी प्रभावित: शारीरिक शिक्षा में C.P.Ed धारकों को पात्रता से बाहर किए जाने और सामाजिक विज्ञान समेत कुछ विषयों में 'सिंगल सब्जेक्ट' से डिग्री लेने वाले अभ्यर्थियों के अवसर कम होने का दावा किया जा रहा है।