Aug 31, 2026 03:36 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

Success Story: 15 से अधिक परीक्षाओं में फेल, नहीं मानी हार, चौथे अटेंप्ट में UPSC CAPF में 121वीं रैंक लाकर बनें असिस्टेंट कमांडेंट

बिलाल खान सक्सेस स्टोरी
कहते हैं कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो मुश्किल हालात में भी कोशिश करना नहीं छोड़ते हैं। कई बार लगातार असफलताएं इंसान का आत्मविश्वास तोड़ देती हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर नाकामी को अगली कोशिश की वजह बना लेते हैं। बिलाल खान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि 15 से ज्यादा डिफेंस परीक्षाओं में हिस्सा लिया। कई बार सफलता उनके बेहद करीब आई, लेकिन मंजिल हाथ नहीं लगी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार UPSC CAPF असिस्टेंट कमांडेंट एग्जामिनेशन 2025 में अपने चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की। चलिए आज सक्ससे स्टोरी में बात बिलाल खान की।
NCC से शुरू हुआ वर्दी पहनने का सपना
बिलाल ने साल 2019 में ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने NCC कैडेट कैप्टन के तौर पर काम किया। यहीं से उनका जुनून देश सेवा के लिए मजबूत हुआ। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज में जाने का लक्ष्य तय किया और इसके लिए लगातार परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि उनके लिए यह आसान नहीं था।
15 से ज्यादा डिफेंस परीक्षाओं में किया प्रयास
टाइम्स नाउ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिलाल ने पिछले कुछ सालों में 15 से अधिक डिफेंस परीक्षाएं दीं। उन्होंने अकेले कंबाइंड डिफेंस सर्विसेस (CDS) परीक्षा में उन्होंने करीब 10 बार प्रयास किया। बार-बार प्रयास करने के दौरान बिलाल ने परीक्षाओं के पैटर्न और अपनी कमियों को बेहतर तरीके से समझा। हर कोशिश के साथ उन्होंने अपनी तैयारी और स्ट्रैटेजी में सुधार किया। उनका सफर तुरंत सफलता हासिल करने का नहीं, बल्कि लगातार मैदान में बने रहने का था।
चौथे प्रयास में मिली बड़ी सफलता
लगातार मेहनत और धैर्य का नतीजा आखिरकार सामने आया। बिलाल ने UPSC CAPF (AC) 2025 परीक्षा अपने चौथे प्रयास में पास कर ली और ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की। यह सफलता उनके लिए सिर्फ एक परीक्षा पास करने या रैंक हासिल करने का मौका नहीं था। यह उन वर्षों की मेहनत का परिणाम था, जिनमें उन्होंने कई बार असफलता का सामना किया, अपनी रणनीति बदली और फिर से तैयारी में जुट गए।
पिता चलाते हैं लॉन्ड्री की दुकान
बिलाल की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा। उनके माता-पिता ठाणे में एक छोटी लॉन्ड्री की दुकान चलाते हैं। पैसों की कमी होने बावजूद परिवार ने उनकी तैयारी में किसी तरह की कमी नहीं आने दी। उनके पिता ने उनकी पढ़ाई और तैयारी का पूरा सपोर्ट किया, जबकि उनकी मां और दो बड़ी बहनों ने हर असफलता के दौर में उनका हौसला बढ़ाया। परिणाम चाहे जैसे रहे हों, परिवार का बिलाल पर भरोसा कभी कम नहीं हुआ।