भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। पिछले कारोबारी सत्र में जोरदार तेजी के बाद बुधवार को निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत लगभग सपाट रही और शुरुआती गिरावट के बाद दोनों प्रमुख सूचकांकों में सुधार भी देखने को मिला। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने तेजी पर दबाव बनाए रखा।
पिछले दिन बाजार में आई थी जोरदार तेजी
मंगलवार, 13 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी दर्ज की गई थी। बीएसई सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी करीब 1.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,033.78 अंक पर बंद हुआ था। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 358.60 अंकों की तेजी आई और यह 22,721.95 अंक पर पहुंच गया था। आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन करों पर समीक्षा संबंधी टिप्पणियों से निवेशकों की उम्मीदों को बल मिला था।हालांकि, बुधवार को बाजार में पिछले दिन जैसी तेजी बरकरार नहीं र सकी। निवेशकों का ध्यान कंपनियों के तिमाही नतीजों, अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बना रहा।
आईटी शेयरों में खरीदारी से मिला बाजार को सहारा
बुधवार के कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। टीसीएस, एचसीएलटेक और इंफोसिस जैसे शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को सहारा दिया। पिछले सत्र में भी आईटी इंडेक्स में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई थी। एचसीएलटेक के बेहतर तिमाही नतीजों से इस सेक्टर के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ा था।
हालांकि, बाजार में सभी सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी रही, जबकि वित्तीय सेवाओं और फार्मा से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे बाजार में व्यापक तेजी की स्थिति नहीं बन पाई।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रहीं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 106 से 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी दबाव की वजह
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बाजार में विदेशी पूंजी की निकासी से प्रमुख शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, कंपनियों के तिमाही नतीजे कुछ शेयरों में खरीदारी को प्रोत्साहित कर रहे हैं। ऐसे में बाजार की दिशा तय करने में घरेलू और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
निवेशक किन बातों पर रखें नजर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़े भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल बाजार में तेजी और गिरावट, दोनों की संभावनाएं बनी हुई हैं। निवेशकों को किसी एक कारोबारी सत्र की तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। शेयरों में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, जोखिम और निवेश की अवधि का आकलन करना जरूरी है।