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Stock Market Crash: ईरान-अमेरिका तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 500 अंक टूटा - Haribhoomi

July 14, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹1.14 लाख करोड़ से अधिक की कमी दर्ज की गई।

stock market crash today

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  • Published: 14 Jul 2026, 09:46 AM IST
  • Last Updated: 14 Jul 2026, 09:46 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिसका असर एशियाई बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।

सोमवार को बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 24,050 के करीब पहुंच गया। बाजार में कमजोरी का असर बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया।

निवेशकों की दौलत में ₹1.14 लाख करोड़ की गिरावट
बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक कारोबारी सत्र में ₹1,14,545 करोड़ से अधिक घट गया।

13 जुलाई 2026 को बीएसई कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4,81,59,666 करोड़ था, जो 14 जुलाई की सुबह घटकर ₹4,80,45,121 करोड़ रह गया। इसका सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा।

सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
सुबह 9:20 बजे के आसपास
सेंसेक्स: 397.08 अंक गिरकर 77,219.32 पर
निफ्टी: 99.80 अंक टूटकर 24,111.20 पर
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,063 तक और निफ्टी 24,050 तक फिसल गया था।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव?
बाजार में सबसे ज्यादा बिकवाली ऑटो, प्राइवेट बैंक और रियल एस्टेट सेक्टर में देखने को मिली।
दबाव वाले सेक्टर:

  • ऑटो
  • प्राइवेट बैंक
  • रियल्टी

बेहतर प्रदर्शन वाले सेक्टर:
आईटी सेक्टर में सीमित खरीदारी देखने को मिली।

कौन से शेयर चमके, कौन फिसले?
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 8 शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।

बाजार क्यों टूटा?
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

यदि तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है और वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।