इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ के महाराजगंज थाने में दर्ज अश्लील वीडियो वायरल करने के मामले में विवेचक विनय कुमार मिश्रा के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट वापस ले लिया है। कोर्ट ने उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट होकर व्यक्तिगत उपस्थिति से भी अगली तारीख तक छूट
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वहीं, मामले की विवेचना में लापरवाही को लेकर एसएसपी आजमगढ़ और महाराजगंज थानाध्यक्ष को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है। एसएसपी के पीआरओ को भी कोर्ट ने तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने सचिन यादव की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।
क्या है पूरा मामला
एफआईआर के मुताबिक पीड़िता की शादी आवेदक सचिन यादव से तय हुई थी, लेकिन किसी गलतफहमी के चलते शादी नहीं हो सकी। आरोप है कि इसके बाद सचिन ने वीडियो कॉल के जरिए पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाया और उसे ब्लैकमेल किया। पीड़िता के इनकार करने पर कथित तौर पर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
3 सितंबर को सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने कहा कि सचिन के मोबाइल से कोई अश्लील वीडियो बरामद नहीं हुआ है। राज्य के जवाबी हलफनामे के साथ लगाए गए स्क्रीनशॉट में सामग्री 'राकेश' नाम के व्यक्ति ने भेजी थी, जिसका आवेदक से कोई संबंध नहीं है।
कोर्ट ने पाया कि जवाबी हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि राकेश कौन है और वीडियो किसने अपलोड किया। अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि आवेदक का मोबाइल एफएसएल भेजा गया है, लेकिन रिपोर्ट अभी नहीं आई है। केस डायरी में आईपी एड्रेस से संबंधित कोई जानकारी भी नहीं है।
इस पर कोर्ट ने विवेचक को केस रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जांच में हुई कमी का कारण बताने का निर्देश दिया था।
विवेचक नहीं पहुंचे तो जारी हुआ था वारंट
16 सितंबर को विवेचक विनय कुमार मिश्रा कोर्ट में पेश नहीं हुए। उनकी जगह उपनिरीक्षक अशोक कुमार सिंह को भेजा गया था। विवेचक की ओर से न तो कोई छूट की अर्जी दी गई थी और न ही अनुपस्थिति की सूचना दी गई।
कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए विवेचक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था।
विवेचक बोले- 20 जुलाई को ही हो गया था ट्रांसफर
29 सितंबर को विवेचक विनय कुमार मिश्रा कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने बताया कि उनका 20 जुलाई 2026 को यूपीपीसीएल की विजिलेंस विंग में ट्रांसफर हो चुका था। एसएसपी कार्यालय या थानाध्यक्ष की ओर से उन्हें कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं दी गई थी।
विवेचक के इस स्पष्टीकरण से कोर्ट संतुष्ट हुआ। इसके बाद गैर-जमानती वारंट वापस ले लिया गया और उन्हें अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी गई।
विवेचक ने कोर्ट को बताया कि जांच में सामने आया है कि 'राकेश यादव' के नाम से बनाई गई फेसबुक आईडी खुद आवेदक सचिन यादव ने बनाई थी। इस आईडी के लिए इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड भी सचिन के नाम पर जारी हुआ था।
कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर वह पेन ड्राइव पेश करें, जिसमें कथित तौर पर इसी फर्जी फेसबुक आईडी से अपलोड किया गया पीड़िता का वीडियो मौजूद है।
SSP और थानेदार पर लापरवाही, PRO को भी तलब किया
कोर्ट ने विवेचना में हुई लापरवाही को लेकर एसएसपी आजमगढ़ और महाराजगंज थानाध्यक्ष को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान अपर शासकीय अधिवक्ता अनुराग पांडेय ने कोर्ट को बताया कि एसएसपी के पीआरओ ने फोन पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें 'अनपढ़' कहा।
इस पर कोर्ट ने एसएसपी के पीआरओ को भी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
12 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी। कोर्ट के आदेश की प्रति रजिस्ट्रार (अनुपालन) के माध्यम से एसएसपी आजमगढ़, महाराजगंज थानाध्यक्ष और एसएसपी के पीआरओ को भेजी जाएगी।