
हॉलीवुड फिल्मों पर सेंसर की कैंची
हॉलीवुड फिल्मों में दमदार एक्शन, बड़े स्टार्स और बोल्ड सीन्स कोई नई बात नहीं है. लेकिन जब यही फिल्में भारत में रिलीज होती हैं, तो कई बार दर्शकों को उनका ओरिजिनल वर्जन देखने को नहीं मिलता. वजह है सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC), जो भारतीय रिलीज से पहले फिल्मों के कुछ सीन्स या डायलॉग में बदलाव करने का निर्देश देता है. इस बार भी मार्वल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ सेंसर बोर्ड की कैंची से नहीं बच पाई.
भारत में रिलीज से पहले फिल्म से 8 सेकेंड का किसिंग सीन हटाया गया और कुछ आपत्तिजनक शब्दों को भी म्यूट कर दिया गया. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी हॉलीवुड फिल्म में ऐसे बदलाव किए गए हों. इससे पहले भी कई चर्चित फिल्मों के किसिंग और इंटीमेट सीन्स भारतीय दर्शकों के लिए छोटे या हटाए गए वर्जन में दिखाए गए. आइए जानते हैं ऐसी 7 हॉलीवुड फिल्मों के बारे में जिन पर भारत में रिलीज से पहले सीबीएफसी की कैंची चली.
स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे (2026)
टॉम हॉलैंड और जेंडाया स्टारर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ फिल्म को भारत में यूए 13+ सर्टिफिकेट मिला. CBFC ने फिल्म से करीब 8 सेकेंड का किसिंग सीन हटाने के साथ कुछ आपत्तिजनक शब्दों को म्यूट करने का निर्देश दिया. इसके बाद ही फिल्म को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज की मंजूरी मिली.

सुपरमैन (2025)
जेम्स गन की ‘सुपरमैन’ भी सेंसर बोर्ड की नजर से नहीं बची. भारत में रिलीज से पहले सुपरमैन और लोइस लेन यानी डेविड कोरेंसवेट और राहेल ब्रोसनाहन के बीच फिल्माए गए किसिंग सीन्स को छोटा कर दिया गया. सीन को 33 सेकेंड तक काट दिया गया था, इस सीन को काफी इंटिमेट बताया गया था.

लव एंड अदर ड्रग्स ( 2010)
जेक गिलेनहाल और ऐनी हैथवे स्टारर रोमांटिक ड्रामा ‘लव एंड अदर ड्रग्स’ में कई इंटीमेट सीन्स थे. भारतीय रिलीज से पहले सीबीएफसी ने फिल्म के कुछ रोमांटिक और बेडरूम सीन्स को छोटा करने का निर्देश दिया. कुछ किसिंग और इंटीमेट सीन्स को एडिट किया गया, जबकि कुछ हिस्सों को पूरी तरह हटा दिया गया.
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डेडपूल (2016)
मार्वल की फिल्म ‘डेडपूल’ अपनी बोल्ड कॉमेडी, जबरदस्त हिंसा और आपत्तिजनक भाषा के लिए दुनियाभर में चर्चा में रही. भारत में रिलीज से पहले सीबीएफसी ने फिल्म के कई सीन्स में बदलाव किए. कुछ इंटीमेट सीन्स और किसिंग शॉट्स को छोटा किया गया, वहीं गाली-गलौज वाले डायलॉग और कुछ हिंसक दृश्यों में भी कट लगाए गए. बदलावों के बाद फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ रिलीज किया गया.

द गर्ल विद द ड्रैगन टैटू (2011)
डेविड फिन्चर की इस क्राइम थ्रिलर फिल्म में बोल्ड कंटेंट, न्यूडिटी और हिंसक सीन्स को लेकर भारत में सेंसर बोर्ड ने कई बदलाव करवाए. फिल्म के कुछ इंटीमेट सीन्स और संवेदनशील हिस्सों को भारतीय दर्शकों के लिए एडिट किया गया. इसके बाद ही फिल्म को रिलीज की परमिशन मिली.

ओपेनहाइमर
क्रिस्टोफर नोलन की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘ओपेनहाइमर’ भारत में रिलीज के दौरान काफी चर्चा में रही. फिल्म के कुछ न्यूडिटी और इंटीमेट सीन्स को भारतीय दर्शकों के लिए मॉडिफाइड तौर पर दिखाया गया. हालांकि, CBFC ने फिल्म के किसी भी सीन को नहीं हटाया था.

फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे
यह फिल्म भारत में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली हॉलीवुड फिल्मों में रही. फिल्म के कंटेंट और इंटीमेट सीन्स की वजह से इसे भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज की मंजूरी नहीं मिली. बाद में इसे सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों ने देखा.

भारत में क्यों कटते हैं ऐसे सीन?
सीबीएफसी का कहना है कि फिल्मों को भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं के अनुसार सर्टिफिकेट दिया जाता है. कई बार मेकर्स खुद भी छोटे बदलाव स्वीकार कर लेते हैं ताकि फिल्म को कम उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त सर्टिफिकेट मिल सके. वहीं, हर बार ऐसे फैसलों के बाद सोशल मीडिया पर सेंसरशिप को लेकर बहस भी शुरू हो जाती है.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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