आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जी क्लेम उठाने और जाली दस्तावेज तैयार करने के मामले में फंसे हिसार के उकलाना स्थित विधाता नर्सिंग होम के संचालक डॉ. बिजेंद्र टाक को अदालतों से बड़ा झटका लगा है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के
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सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, न्यायमूर्ति की पीठ के समक्ष 22 अगस्त को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामला निस्तारित कर दिया।

उकलाना स्थित विद्याता नर्सिंग होम।
हाईकोर्ट ने कहा- कस्टोडियल पूछताछ जरूरी
इससे पहले हाईकोर्ट के जजमेंट में अग्रिम जमानत खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की गई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड से यह साफ है कि जो मरीज अस्पताल में भर्ती ही नहीं थे, उनके फर्जी बिल तैयार कर आयुष्मान पोर्टल पर अपलोड किए गए।
जांच एजेंसी को यह पता लगाने के लिए आरोपी की पुलिस हिरासत में पूछताछ (कस्टोडियल इंटरोगेशन) बेहद जरूरी है कि क्या इस तरह की कार्यप्रणाली से अन्य मामलों में भी योजना का दुरुपयोग हुआ है।

सीएम फ्लाइंग की टीम अस्पताल के रिकॉर्ड को चेक करते हुए।
रेड में ऐसे खुली थी विधाता नर्सिंग होम की पोल…
गायब मरीज, फिर भी क्लेम: 22 मार्च को सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने नर्सिंग होम पर छापेमारी की थी। पोर्टल पर मरीज भर्ती दिखे, लेकिन मौके पर नदारद थे।
फर्जी सिग्नेचर और कटिंग: जांच में एक नवजात के डिस्चार्ज रिकॉर्ड में भारी कटिंग मिली। बच्चे के पिता संदीप ने बयान दिया कि बच्चा दोबारा भर्ती नहीं हुआ, लेकिन पोर्टल पर 48 हजार रुपए का फर्जी क्लेम क्लेम कर दिया गया।
ऑन-ड्यूटी डॉक्टर का इनकार: जिस डॉक्टर के नाम से इलाज दर्शाया गया था, उन्होंने भी अस्पताल जाने और रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया।

सीएम फ्लाइंग की टीम अस्पताल के रिकॉर्ड को चेक करते हुए। (फाइल)
BNS की गंभीर धाराओं में केस दर्ज
जांच टीम की शिकायत पर पुलिस ने डॉ. बिजेंद्र टाक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340 के तहत धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।