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Shardiya Navratri 2026: कन्या पूजन में क्या दें? जानें शुभ उपहार और किन चीजों से बचना चाहिए

October 8, 2026

Shardiya Navratri 2026: कन्या पूजन में क्या दें? जानें शुभ उपहार और किन चीजों से बचना चाहिए

शारदीय नवरात्रि 2026Image Credit source: PTI

Kanya Pujan 2026: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के दौरान अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की परंपरा है. इसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है. इसके बाद कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देने की परंपरा भी है. साल 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू हो रही है. ऐसे में कई घरों में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन की तैयारी शुरू हो जाएगी. कन्या पूजन के दौरान बच्चियों को क्या उपहार दिया जाए, इसे लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है. आइए जानते हैं

कन्या पूजन में क्या उपहार देना शुभ माना जाता है?

कन्या पूजन में लाल चुनरी या कपड़ा देना काफी प्रचलित परंपरा है. लाल रंग को देवी शक्ति से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए लाल चुनरी, रुमाल, दुपट्टा या बच्चियों के उपयोग का कोई अच्छा कपड़ा दिया जा सकता है. इसके अलावा चूड़ी, बिंदी, हेयर क्लिप, रिबन या छोटी श्रृंगार सामग्री भी दी जा सकती है. कई परिवारों में इन चीजों को पहले मां दुर्गा को अर्पित करने के बाद कन्याओं को देने की परंपरा है.

दक्षिणा के साथ फल और मिठाई भी दे सकते हैं

कन्या पूजन में भोजन कराने के बाद दक्षिणा देने की भी परंपरा है. कन्याओं को फल, मिठाई या सूखे मेवे भी दिए जा सकते हैं. कन्या पूजन में हलवा, पूरी और काले चने का भोग खास तौर पर प्रचलित है.

कन्या पूजन में क्या नहीं देना चाहिए?

फिर भी धार्मिक परंपराओं में चमड़े की वस्तुएं, तेज धार वाली चीजें जैसे अनुपयोगी वस्तुएं उपहार में देने से बचने की सलाह दी जाती है. कुछ मान्यताओं में काले रंग के कपड़ों से भी बचने की बात कही जाती है.

सिर्फ महंगा उपहार देना जरूरी नहीं

कन्या पूजन में अक्सर लोग यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि हर कन्या को महंगा गिफ्ट देना जरूरी है. ऐसा नहीं है. धार्मिक परंपरा में मुख्य महत्व कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर सम्मान, भोजन और श्रद्धा के साथ विदा करने का है.दक्षिणा, फल, मिठाई या छोटी-सी उपयोगी वस्तु भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार दी जा सकती है.

कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि में कन्या पूजन को मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि छोटी कन्याओं में देवी शक्ति का स्वरूप देखा जाता है. इसलिए अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और श्रद्धा के साथ भोजन कराया जाता है. कन्या पूजन में आमतौर पर 2 से 9 साल तक की कन्याओं को शामिल करने की परंपरा मिलती है. इन्हें मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है. कई जगह कन्याओं के साथ एक बालक को भी बटुक भैरव या लांगूर के रूप में भोजन कराने की परंपरा है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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