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कटघोरा में लावारिस मवेशियों ने किसानों की फसलें की बर्बाद: रात में फसल चट कर रहे पशु, नगर पालिका और SDM को ज्ञापन सौंपा - Korba News

August 13, 2026

बंद पड़ा है गोठान, ग्रामीण बोले- सिर्फ चरवाहे की व्यवस्था कर शुरू किया जा सकता है

कोरबा के कटघोरा क्षेत्र के ग्राम जुराली में लावारिस मवेशियों की समस्या से किसान परेशान हैं। रात होते ही मवेशियों के खेतों में घुसने से खड़ी धान की फसल बर्बाद हो रही है। समस्या से नाराज सैकड़ों ग्रामीण और किसानों ने नगर पालिका पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई

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इसके बाद SDM कार्यालय में भी ज्ञापन सौंपकर मवेशियों से निजात दिलाने की मांग की। जुराली कृषि प्रधान गांव है और यहां करीब 90% आबादी खेती पर निर्भर है।

मांग पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

मांग पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

रात में खेतों में घुसकर फसल कर रहे बर्बाद

ग्रामीणों ने गर्मी में सब्जियों की खेती की थी, जबकि वर्तमान में धान की फसल खेतों में खड़ी है। किसानों का कहना है कि खेती का अधिकांश काम पूरा हो चुका है, लेकिन बारिश के मौसम में लावारिस मवेशियों ने नई परेशानी खड़ी कर दी है।

दिन में ये मवेशी सड़क और पुलों पर बैठे रहते हैं, जबकि रात होते ही खेतों में पहुंचकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। किसानों के मुताबिक कई खेतों में फसल काफी हद तक बर्बाद हो चुकी है।

मवेशियों से सड़क हादसों का भी खतरा

ग्रामीणों ने बताया कि लावारिस मवेशियों की वजह से केवल फसलों को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। सड़क पर बैठे या अचानक सामने आ जाने वाले मवेशियों की वजह से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या गंभीर होने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया।

बना हुआ है गोठान, फिर भी बंद पड़ा

ग्रामीणों का कहना है कि नगर पालिका परिषद ने जुराली में गोठान का निर्माण कराया है, लेकिन वर्तमान में इसका संचालन बंद है। गोठान की संरचना अभी भी ठीक है। न हाता टूटा है और न ही खंभे-तार खराब हुए हैं। किसानों के मुताबिक केवल गोठान शुरू करने और एक चरवाहे की व्यवस्था करने की जरूरत है।

किसान बोले- फसल नहीं बची तो पूरे गांव पर पड़ेगा असर

किसान नारायण पटेल ने कहा कि जुराली की अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है। यदि मवेशियों के कारण फसल खराब हुई तो इसका सीधा असर पूरे गांव की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से गोठान को तत्काल शुरू कराने और चरवाहे की व्यवस्था करने की मांग की।

मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर लावारिस मवेशियों को नियंत्रित करने और बंद पड़े गोठान को शुरू कराने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पूरे नगर और किसानों को साथ लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।

कोरबा के कटघोरा क्षेत्र स्थित ग्राम जुराली में लावारिस मवेशियों का आतंक बढ़ गया है। इन मवेशियों द्वारा रात भर में किसानों की फसलें बर्बाद की जा रही हैं, जिससे ग्रामीण परेशान हैं। सैकड़ों नगरवासी और किसानों ने आज नगर पालिका पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और बाद में SDM कार्यालय में भी ज्ञापन सौंपा।

ग्राम जुराली एक कृषि प्रधान गांव है, जहां लगभग 90% आबादी खेती पर निर्भर है। ग्रामीणों ने गर्मी में सब्जी और वर्तमान में धान की खेती की है। किसानों के अनुसार, खेती का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन बरसात के मौसम में लावारिस मवेशियों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

ये मवेशी दिन में सड़कों और पुलों पर बैठे रहते हैं, लेकिन रात होते ही खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को नष्ट कर देते हैं। किसानों का आरोप है कि कई खेतों में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।

यह समस्या केवल फसलों तक सीमित नहीं है। लावारिस मवेशियों के कारण आए दिन सड़क हादसे भी हो रहे हैं, जिनमें लोगों की जान तक जा चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

ग्रामीणों ने बताया कि नगर पालिका परिषद द्वारा जुराली में एक गोठान बनाया गया है, लेकिन उसका संचालन बंद है। गोठान की संरचना intact है, न हाता टूटा है और न ही खंभे-तार खराब हुए हैं। इसे केवल शुरू करने और चरवाहे की व्यवस्था करने की आवश्यकता है, लेकिन संबंधित अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे।

किसान नारायण पटेल ने बताया कि उनका गांव पूरी तरह किसानों पर निर्भर है। यदि फसल अच्छी नहीं हुई तो पूरे गांव को परेशानी होगी। उन्होंने शासन-प्रशासन से गोठान को तुरंत चालू करने और चरवाहे की व्यवस्था करने का आग्रह किया, ताकि किसानों की फसल और लोगों की जान दोनों सुरक्षित रह सकें।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे पूरे नगर और किसानों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे। फिलहाल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।