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Sawan Festival 2026: सावन में हरा रंग महिलाओं के लिए क्यों है इतना खास? जानिए धार्मिक मान्यता और महत्व - Haribhoomi

July 30, 2026

Sawan Festival 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और प्रकृति की हरियाली का प्रतीक माना जाता है। जानिए आखिर क्यों इस पूरे महीने महिलाएं हरे रंग के कपड़े और चूड़ियों को इतना महत्व देती हैं।

Green Colour in Sawan

सावन में हरे रंग को क्यों देती हैं महिलाएं इतना महत्व? (AI generated)

  • Published: 30 Jul 2026, 10:18 AM IST
  • Last Updated: 30 Jul 2026, 10:27 AM IST

Sawan Festival 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस पूरे महीने व्रत, पूजा और कई धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं। खास बात यह है कि इस दौरान महिलाएं हरे रंग की साड़ी, सूट, चूड़ियां और मेहंदी को अपने श्रृंगार का अहम हिस्सा बनाती हैं।

हरियाली तीज से लेकर सावन के अन्य त्योहारों तक हरा रंग सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सावन में हरे रंग को इतना महत्व क्यों दिया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के बारे में।

हरियाली और नई शुरुआत का प्रतीक है हरा रंग
सावन बारिश का महीना होता है। इस दौरान सूखी धरती हरियाली से ढक जाती है और प्रकृति एक नई ऊर्जा से भर उठती है। यही वजह है कि हरे रंग को नई शुरुआत, समृद्धि, खुशहाली और जीवन का प्रतीक माना जाता है। हरा रंग केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि यह सकारात्मक सोच, उम्मीद और प्रकृति के प्रति जुड़ाव का भी प्रतीक माना जाता है।

हरियाली और नई शुरुआत का प्रतीक है हरा रंग
हरियाली और नई शुरुआत का प्रतीक है हरा रंग

माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया था। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी वजह से सावन के महीने में महिलाएं माता पार्वती की पूजा करती हैं और हरे रंग के वस्त्र पहनकर सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की प्रार्थना करती हैं।

हरा रंग सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक

हरा रंग सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक
हरा रंग सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक

भारतीय संस्कृति में हरे रंग को शुभ, सौभाग्य और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए विवाहित महिलाएं सावन में हरी चूड़ियां पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं और हरे रंग के कपड़े धारण कर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मांगती हैं। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन सुखमय रहता है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।

खुशहाली का संदेश देता है हरा रंग

हरा रंग सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक
खुशहाली का संदेश देता है हरा रंग

हरा रंग केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि यह सकारात्मक सोच, उम्मीद और प्रकृति के प्रति जुड़ाव का भी प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि सावन शुरू होते ही बाजारों में हरी साड़ियों, चूड़ियों, मेहंदी, बिंदी और अन्य श्रृंगार के सामान की मांग बढ़ जाती है।

क्या सावन में हरा रंग पहनना जरूरी है?
धार्मिक मान्यताओं में हरे रंग को शुभ माना गया है, लेकिन इसे पहनना कोई अनिवार्य नियम नहीं है। यह पूरी तरह व्यक्ति की श्रद्धा और आस्था पर निर्भर करता है। कई महिलाएं परंपरा निभाने के लिए हरा रंग पहनती हैं, जबकि कुछ अपनी पसंद के अनुसार अन्य रंगों के वस्त्र भी धारण करती हैं।

हरियाली, सौभाग्य, सुख-समृद्धि का प्रतीक होने के कारण इस महीने में हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है। यही वजह है कि सावन आते ही महिलाएं श्रद्धा और उत्साह के साथ हरे रंग को अपने पहनावे और श्रृंगार का हिस्सा बनाती हैं।

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