GAYAJEE: पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की एक बड़ी मिसाल टिकारी प्रखंड की दिघौरा पंचायत में सामने आई है। पंचायत समिति सदस्य के पुत्र मिलन यादव की पहल पर सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से विकास योजनाओं में हुए कथित करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि कई योजनाएं केवल कागजों पर संचालित हुईं, जबकि सरकारी खजाने से करीब 45 से 50 लाख रुपये की निकासी कर ली गई।
RTI से सामने आए चौंकाने वाले दस्तावेज
मिलन यादव ने पंचायत में चल रही विकास योजनाओं में अनियमितता की आशंका जताते हुए RTI के तहत संबंधित योजनाओं का ब्योरा मांगा। लंबी प्रक्रिया के बाद प्राप्त दस्तावेजों में कई गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं। इसके आधार पर उन्होंने पंचायत की 10 योजनाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो पटना मुख्यालय पहुंचे
जब स्थानीय प्रशासन ने शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, तो मिलन यादव ने सीधे पंचायती राज विभाग के पटना मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम को टिकारी की संबंधित पंचायत में जांच के लिए भेजा।
जांच में 9 योजनाओं में मिली भारी अनियमितता
पटना से आई जांच टीम ने स्थल निरीक्षण के दौरान शिकायतों को सही पाया। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए। कुल 10 योजनाओं में से 9 योजनाओं में वित्तीय अनियमितता पाई गई। लगभग 45 से 50 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई। कई योजनाएं धरातल पर मौजूद ही नहीं थीं, फिर भी उनकी पूरी राशि निकाल ली गई। कुछ मामलों में एक ही कार्य के नाम पर अलग-अलग मदों से बार-बार भुगतान किया गया।
सात लोगों से मांगा गया स्पष्टीकरण
मिलन यादव ने बताया कि जांच में स्पष्ट हो गया कि अधिकांश योजनाओं में कार्य नहीं हुआ, लेकिन सरकारी राशि की निकासी कर ली गई। इस मामले में कुल सात लोगों को दोषी मानते हुए विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। जांच रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के मुख्यालय को सौंप दी गई है।
कार्रवाई का इंतजार
हालांकि जांच रिपोर्ट मुख्यालय पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का कहना है कि जल्द से जल्द दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कर सरकारी राशि की वसूली की जाए, ताकि पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
गया जी से नितम राज की रिपोर्ट