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सिंहदेव बोले- मंदिरों से हटाया जाए RSS का कब्जा: कहा-सुप्रीम कोर्ट एक्शन ले, जमीन घोटाले से लेकर अब तक जांच की मांग की - Ambikapur (Surguja) News

July 16, 2026

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चंदे में कथित गड़बड़ी देश की आस्थावान जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि राम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों की प्रबंधन समितियों से आरएसएस से जुड़े लोगों क

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सिंहदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान ले, क्योंकि प्रबंधन समिति का गठन अदालत के आदेश से हुआ था। उन्होंने जमीन खरीद से लेकर चंदे में कथित अनियमितताओं तक की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा कि पिछले तीन-चार दशकों से राम मंदिर को लेकर एक विशेष राजनीतिक अभियान चलाया गया। उस समय संसद में भाजपा की केवल दो सीटें थीं।

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत के फैसले में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की अनुमति देते हुए एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति गठित करने का निर्देश दिया गया, ताकि मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन का कार्य निष्पक्ष रूप से किया जा सके।

डिप्टी सीएम बोले- संत, पुजारियों को बाहर कर RSS ने कब्जा किया

टीएस सिंहदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति बनाई गई। उनका आरोप है कि पहले रामलला की सेवा और देखरेख करने वाले संतों और पुजारियों को समिति में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जबकि प्रबंधन में आरएसएस से जुड़े लोगों को शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि आरएसएस कोई संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि व्यक्तियों का एक समूह है।

सिंहदेव ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से चंदा जुटाया गया, लेकिन चंदे की कुल राशि को लेकर भाजपा और आरएसएस से जवाब मांगे जाने पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर परिसर के विस्तार और जमीन खरीद में कथित करोड़ों रुपए के घोटाले का मुद्दा उठाया था, जिसे राजनीतिक बताकर खारिज कर दिया गया। राम मंदिर निर्माण के नाम पर जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी हुई।

आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप

टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि देश के शंकराचार्यों ने मंदिर का शिखर और निर्माण कार्य पूरा नहीं होने का हवाला देते हुए उस समय प्राण प्रतिष्ठा नहीं करने की बात कही थी, लेकिन चुनावी लाभ के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी कर लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्होंने दावा किया कि 40 दिनों में 70 बार वित्तीय अनियमितताएं हुईं और लाखों रुपये की हेराफेरी सामने आई।

उनके अनुसार, प्रबंधन समिति से जुड़े चंपत राय सहित कुछ पदाधिकारियों ने जवाबदेही स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

राम मंदिर ट्रस्ट की जांच और प्रबंधन में बदलाव की मांग

टीएस सिंहदेव ने कहा कि राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। उनका आरोप है कि राम मंदिर सहित कई प्रमुख मंदिरों की प्रबंधन समितियों में आरएसएस से जुड़े लोगों का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन से जुड़े व्यक्ति को ऐसे धार्मिक न्यासों की प्रबंधन समिति का सदस्य नहीं होना चाहिए।

सिंहदेव ने कहा कि यदि उनकी व्यक्तिगत छवि भी अच्छी मानी जाती है, तब भी उन्हें ऐसी समिति में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रबंधन समिति में चारों शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों और बेदाग छवि वाले प्रतिष्ठित लोगों को स्थान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन होना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को धार्मिक न्यासों की प्रबंधन समिति में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस पूरी तरह राजनीतिक संगठन की तरह कार्य कर रही है।

सिंहदेव ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान लेकर राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए चंदे और कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराए। उन्होंने कहा कि चूंकि प्रबंधन समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी थी, इसलिए जांच की जिम्मेदारी भी सुप्रीम कोर्ट को उठानी चाहिए।