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हिंदी न्यूज़लाइफस्टाइलधर्मRishi Panchami 2026: व्रत कथा में मासिक धर्म का जिक्र जानें धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक फेक्ट
Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी की व्रत कथा में मासिक धर्म का प्रसंग क्यों आता है? जानें इसका धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ तथा क्या पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 15 Sep 2026 05:56 PM (IST)

ऋषि पंचमी 2026
Source : abplive
Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी 2026 आज, 15 सितंबर को मनाई जा रही है. पंचमी तिथि सुबह 7 बजकर 44 मिनट से शुरू हुई और 16 सितंबर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी. सप्तऋषियों की पूजा के साथ इस दिन ऋषि पंचमी व्रत कथा पढ़ने की परंपरा है. हालांकि कथा सुनते समय एक प्रश्न अक्सर मन में आता है, इसमें मासिक धर्म का प्रसंग क्यों है और क्या यह व्रत केवल महिलाओं के लिए बनाया गया है?
ऋषि पंचमी की कथा में क्या बताया गया है?
प्रचलित व्रत कथा में उत्तंक नामक ब्राह्मण, उनकी पत्नी सुशीला और उनकी पुत्री का वर्णन मिलता है. कथा के अनुसार, पूर्व जन्म में मासिक धर्म के दौरान अनजाने में परंपरागत नियमों का उल्लंघन होने के कारण पुत्री को कष्ट सहना पड़ा. बाद में ऋषि पंचमी व्रत करने पर उसे उस कथित दोष से मुक्ति मिली.
यहां यह समझना जरूरी है कि यह धार्मिक कथा और प्राचीन सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी मान्यता है. इसे महिलाओं के शरीर या मासिक धर्म को वैज्ञानिक रूप से अशुद्ध घोषित करने वाला प्रमाण नहीं माना जा सकता.
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मासिक धर्म का उल्लेख क्यों आया?
पुराने समय में स्वच्छ पानी, सुरक्षित सैनिटरी साधन और स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं थीं. महिलाओं को इस अवधि में घरेलू काम से विश्राम देने के लिए भी कई सामाजिक नियम बनाए गए होंगे. समय के साथ ये नियम धार्मिक शुद्धता और दोष जैसी धारणाओं से जुड़ते चले गए.
विज्ञान के अनुसार मासिक धर्म महिलाओं के शरीर में होने वाली सामान्य जैविक प्रक्रिया है. इससे महिला अपवित्र नहीं होती. इसलिए ऋषि पंचमी की कथा पढ़ते समय उसके धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ को समझना आवश्यक है, न कि किसी महिला में अपराधबोध पैदा करना.
क्या ऋषि पंचमी व्रत केवल महिलाएं रख सकती हैं?
ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं में अधिक प्रचलित है, लेकिन सप्तऋषियों की पूजा पर केवल महिलाओं का अधिकार होने जैसी कोई सार्वभौमिक रोक नहीं मानी जाती. पुरुष भी कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वसिष्ठ ऋषि का स्मरण एवं पूजन कर सकते हैं. कई परिवारों में पति-पत्नी या पूरा परिवार मिलकर सप्तऋषियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है.
आज के समय में ऋषि पंचमी का अर्थ
ऋषि पंचमी को केवल मासिक धर्म से जुड़े कथित दोष तक सीमित करना इसके व्यापक संदेश को छोटा कर देता है. यह दिन ज्ञान देने वाले ऋषियों के सम्मान, अपनी जाने-अनजाने गलतियों पर विचार और जीवन में अनुशासन लाने का अवसर भी है.
यदि कोई महिला स्वास्थ्य, गर्भावस्था, मासिक धर्म या दवा के कारण उपवास नहीं रख सकती, तो उसे अपराधबोध महसूस करने की जरूरत नहीं है. वह श्रद्धापूर्वक सप्तऋषियों का स्मरण, दीपदान या कथा पाठ कर सकती है. आस्था का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि विवेक और आत्मचिंतन जगाना होना चाहिए.
FAQ
सवाल: ऋषि पंचमी की कथा में मासिक धर्म का जिक्र क्यों है?
जवाब: प्रचलित व्रत कथा में मासिक धर्म के दौरान पुराने सामाजिक और धार्मिक नियमों के उल्लंघन का प्रसंग मिलता है. इसे प्राचीन मान्यता के संदर्भ में समझना चाहिए, वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं.
सवाल: क्या ऋषि पंचमी का व्रत केवल महिलाएं रख सकती हैं?
जवाब: यह व्रत महिलाओं में अधिक प्रचलित है, लेकिन पुरुषों के सप्तऋषियों का पूजन या स्मरण करने पर कोई सार्वभौमिक प्रतिबंध नहीं माना जाता.
सवाल: क्या मासिक धर्म के कारण महिला अशुद्ध हो जाती है?
जवाब: नहीं. विज्ञान के अनुसार मासिक धर्म एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है. इससे महिला अशुद्ध या अपवित्र नहीं होती.
सवाल: स्वास्थ्य के कारण व्रत न रख सकें तो क्या करें?
जवाब: श्रद्धालु उपवास के स्थान पर सप्तऋषियों का स्मरण, दीपदान या कथा पाठ कर सकते हैं. बीमारी, गर्भावस्था या दवा की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए.
सवाल: ऋषि पंचमी पर किन सप्तऋषियों की पूजा होती है?
जवाब: इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वसिष्ठ ऋषि के साथ अरुंधती के पूजन की परंपरा है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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Published at : 15 Sep 2026 02:14 PM (IST)
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