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जवाबदेही और मुआवजा... डिजिटल अरेस्ट स्कैम रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए निर्देश, जानिए सरकार-RBI से क्या कहा

August 5, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है. इससे निपटने के लिए कोर्ट ने देशभर में निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को 4 हफ्ते में म्यूल अकाउंट्स पर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने को कहा है. साथ ही, देश भर में साइबर धोखाधड़ी रोकने के तंत्र को तेजी से लागू करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा है कि वे साइबर फ्रॉड की शिकायतों और पैसे वापस दिलाने की व्यवस्था को लागू करें. ई-ज़ीरो FIR सिस्टम अपनाएं और लोगों में जागरूकता बढ़ाएं. कोर्ट ने केंद्र सरकार से ‘साझा जवाबदेही’ और पीड़ित को मुआवजा देने के ढांचे पर विचार करने को भी कहा.

ठोस कदम उठाने के निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार, राज्यों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इस संबंध में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. बेंच ने कहा कि सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और पुलिस को गृह मंत्रालय की 2 जनवरी की SOP के तहत शुरू किए गए शिकायत निवारण और धन वापसी की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि प्रभावित लोग अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए पहले इन विकल्पों का लाभ उठा सकें.

CJI सूर्य कांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेशों (10 दिसंबर 2025 और 9 फरवरी 2026) में देश में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के संबंध में संबंधित मंत्रालयों से एक समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अंतरिम निर्देश जारी किए थे. कोर्ट ने कहा कि उन निर्देशों में CBI द्वारा जांच, म्यूल अकाउंट्स, सिम कार्ड और सिम बॉक्स का दुरुपयोग, मध्यस्थों का सहयोग, शिकायत निवारण और धोखाधड़ी से गंवाई गई रकम की वापसी, और संस्थागत समन्वय जैसे मामले शामिल थे.

गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा दायर चौथी स्टेटस रिपोर्ट इस कोर्ट को 11 मई 2026 और 14 जुलाई 2026 को अंतर-विभागीय समिति की चौथी और पांचवीं बैठकों में हुई चर्चाओं और संबंधित मंत्रालयों, नियामकों, जांच एजेंसियों, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स और मध्यस्थों द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देती है.

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में आई कमी

रिपोर्ट मुख्य रूप से बताती है कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर डिजिटल अरेस्ट स्कैम से संबंधित शिकायतों की संख्या 2024 में 1,23,672 से घटकर 2025 में 58,249 हो गई है, और 30 जून 2026 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए यह और घटकर 16,377 रह गई है. धोखाधड़ी से गंवाई गई रिपोर्ट की गई रकम में भी काफी कमी आई है.

36,290 मामलों में धोखाधड़ी से गंवाए पैसे वापस

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए, कोर्ट ने नोट किया कि 57 बैंकों और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से 36,290 मामलों में धोखाधड़ी से गंवाए गए पैसे वापस दिलाए गए हैं, जिनकी कुल राशि ₹18.05 करोड़ है. वहीं CBI ने डिजिटल अरेस्ट और संबंधित मामलों में कई केस दर्ज किए हैं.

16 राज्यों में 93 जगहों पर तलाशी अभियान

बेंच ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की प्रगति पर भी ध्यान दिया और पाया कि एजेंसी ने डिजिटल अरेस्ट के मामले और उनसे जुड़े अन्य मामले दर्ज किए, 67 फर्स्ट-लेयर बैंक खातों में लेन-देन के ज़रिए पीड़ितों की पहचान की है, और 16 राज्यों में 93 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया है.

कोर्ट ने दिए खास निर्देश

  • सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अधिकारी साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के कारण बैंक खाता फ्रीज़ करने से जुड़े मामलों के तेज़ी से निपटारे के लिए उचित कदम उठाएंगे.
  • अंतर-विभागीय समिति को निर्देश दिया गया है कि वह सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और सरकारी विभागों को जरूरी सलाह और निर्देश जारी करे, ताकि वे इन विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम चला सकें और उन्हें बढ़ावा दे सकें.
  • साइबर अपराध, शिकायत निवारण और पैसे की वापसी का मॉड्यूल, साथ ही धोखाधड़ी से गंवाए गए पैसे की कस्टडी और वापसी के लिए MHA की SOP (मानक संचालन प्रक्रिया).
  • एक अंतर-विभागीय समिति बैंकों के साथ मिलकर ऐसे उपायों पर समन्वय करेगी जिनसे डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोका जा सके, धोखाधड़ी से गंवाए गए पैसे को वापस पाने में मदद मिले, जांच में आसानी हो और सभी लागू कानूनों का पालन व सहयोग सुनिश्चित किया जा सके.
  • कानूनी सेवा समितियां ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम से बचाव, साइबर अपराध के बारे में जागरूकता, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी में गंवाई गई रकम वापस पाने में मदद के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाएंगी. साझा जवाबदेही और पीड़ित मुआवज़ा ढांचे के प्रस्ताव की जांच के लिए अंतर-विभागीय समिति बनाई जाएगी.
  • इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी, CBI जांच के लिए मौजूदा मॉनेटरी थ्रेशोल्ड (मौद्रिक सीमा) को कम करने और थ्रेशोल्ड तक पहुंचने के लिए एक ही संगठित नेटवर्क से जुड़े मामलों को एक साथ जोड़ने के सुझाव की जांच करेगी.

बेंच ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और I4C को ऑडियो और वीडियो कॉल के लिए टेलीकॉम सेवाओं पर समय-आधारित प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव की जांच करने का निर्देश दिया है. अधिकारियों से कहा गया है कि वे इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता, उपयोगिता और संभावित विकल्पों पर कोर्ट के सामने एक संक्षिप्त नोट पेश करें.

16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अब तक हुई प्रगति की सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि मौजूदा व्यवस्था को और बड़े स्तर पर लागू करने, मामलों का तेजी से निपटारा करने और लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख से पहले तक स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है. मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी.