August 3, 2026

एंटरटेनमेंट डेस्क: अभिनेता, फिल्म निर्माता और समाजसेवी रणदीप हुड्डा एक बार फिर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। इस बार वह बाढ़ से प्रभावित असम पहुंचे, जहां उन्होंने राहत कार्यों में खुद हिस्सा लिया।
कई वर्षों से जुड़े हुए ग्लोबल सिख्स NGO के साथ मिलकर रणदीप ने असम के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक शिवसागर में दो दिन बिताए और बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने में सहयोग किया।
पिछले एक सप्ताह से ग्लोबल सिख्स असम के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार राहत कार्य कर रहा है। संस्था जरूरतमंद लोगों तक भोजन, आश्रय और अन्य , ज़रूरी सामान पहुंचा रही है।
रणदीप एक दिन पहले संस्था के स्वयंसेवकों के साथ जुड़े और शिवसागर रेलवे स्टेशन पर शरण लिए हुए परिवारों के बीच राशन किट, ताज़ा बना भोजन, गद्दे, तिरपाल, बिस्तर, घरेलू ज़रूरत का सामान और टॉयलेटरीज़ जैसी आवश्यक चीज़ें वितरित कीं। ये परिवार आसपास के उन गांवों से आए हैं, जो बाढ़ के पानी में डूब गए हैं।
यह पहली बार नहीं है जब रणदीप हुड्डा ने ग्लोबल सिख्स के अमरप्रीत सिंह के साथ किसी मानवीय संकट के दौरान राहत कार्यों में हिस्सा लिया हो। रणदीप कई वर्षों से इस संस्था से जुड़े हुए हैं। इससे पहले उन्होंने पिछले साल पंजाब में आई बाढ़, 2018 की केरल बाढ़, और नौशेरा के सीमा क्षेत्र में बसे प्रवासी शिविरों में भी जाकर राहत सामग्री वितरित की थी। प्राकृतिक आपदाओं और सीमा संघर्षों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए उनका यह समर्पण लंबे समय से जारी है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद रणदीप हुड्डा ने कहा, “जब आप उन लोगों के बीच खड़े होते हैं जिन्होंने एक ही रात में अपना घर, अपना सामान और कई बार अपनी सुरक्षा का एहसास तक खो दिया हो, तब समझ आता है कि जिंदगी कितनी नाजुक है।
इन परिवारों को हमारी सहानुभूति नहीं, बल्कि सहयोग, सम्मान और उम्मीद की जरूरत है। शिवसागर में ग्लोबल सिख्स के साथ बिताए ये दो दिन मेरे लिए बेहद भावुक और सीख देने वाले रहे। मैं कई वर्षों से इस संस्था से जुड़ा हूं और हर बार इनके स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा भावना मुझे प्रेरित करती है। वे यह नहीं पूछते कि सामने वाला किस राज्य, भाषा या धर्म का है। वे सिर्फ इतना देखते हैं कि कोई इंसान मुश्किल में है और उसे मदद की जरूरत है। मेरे लिए यही सच्ची इंसानियत है।”
उन्होंने आगे कहा, “यहां जो तबाही मैंने देखी, वह दिल तोड़ देने वाली है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पूरे परिवारों को सब कुछ छोड़ने के लिए मजबूर होते देख यह एहसास होता है कि प्राकृतिक आपदाएं किसी के साथ भेदभाव नहीं करतीं।
इस समय उन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है भोजन, साफ पानी, रहने की सुरक्षित जगह, दवाइयों, बिस्तर और इस भरोसे की कि वे अकेले नहीं हैं। मैं सभी लोगों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि सबसे ऊपर इंसानियत को रखें और अपनी क्षमता के अनुसार मदद करें। चाहे दान देकर, स्वयंसेवक बनकर या ज़मीन पर काम कर रही विश्वसनीय संस्थाओं का सहयोग करके हर छोटी मदद किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।”
असम दौरे के दौरान रणदीप ने शिवसागर गुरुद्वारा साहिब में भी मत्था टेका और बाढ़ प्रभावित, लोगों की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और जल्द सामान्य जीवन की प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने राहत कार्यों में जुटे सभी स्वयंसेवकों और बचावकर्मियों के लिए भी अरदास की।
सिर्फ अपनी आवाज़ ही नहीं, बल्कि खुद राहत कार्यों में पहुंचकर रणदीप हुड्डा ने एक बार फिर साबित किया कि समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ग्लोबल सिख्स के साथ उनका लगातार जुड़ाव इस विश्वास को और मजबूत करता है कि मानव सेवा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उनका यह प्रयास दूसरों को भी आगे आकर आपदा प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित करता है।