माधुरी दीक्षित की शादी का प्रस्ताव कोई कैसे ठुकरा सकता है, यह सवाल कई फैंस के मन में आता है। हालांकि, एक ऐसे सिंगर हैं, जिन्होंने कथित तौर पर माधुरी क ...और पढ़ें

सिंगर ने माधुरी दीक्षित को किया था रिजेक्ट/ फोटो- Instagram

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 90 के दशक की मशहूर अदाकारा माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) पर लाखों फैंस जान छिड़कते हैं। कई लोगों की ख्वाहिश रहती है कि 'धक-धक गर्ल' की एक झलक उन्हें देखने को मिल जाए। अपनी अदाकारी और डांस से उन्होंने करोड़ों दर्शकों को अपना दीवाना बनाया है।
कोई शायद यह सोच भी नहीं सकता कि माधुरी दीक्षित जैसी खूबसूरत और सफल अदाकारा को भी कभी रिजेक्शन का सामना करना पड़ा होगा। हालांकि, उनके शुरुआती दौर में उनकी शादी से जुड़ा एक किस्सा काफी चर्चा में रहा था। कौन थे वे सिंगर, जिनका नाम माधुरी संग शादी के प्रपोजल से जुड़ा था? आइए पढ़ें यह दिलचस्प कहानी।
क्या इस सिंगर ने ठुकराया था माधुरी संग शादी का प्रपोजल?
अक्सर यह दावा किया जाता रहा है कि जिस सिंगर को माधुरी दीक्षित संग शादी का प्रपोजल भेजा गया था, वे कोई और नहीं बल्कि दिग्गज गायक सुरेश वाडकर हैं। सुरेश वाडकर ने 'लगी आज सावन की', 'तुम से मिलके ऐसा लगा', 'मेरी किस्मत में तू नहीं शायद' और 'राम तेरी गंगा मैली हो गई' जैसे कई सदाबहार गाने गाए हैं।
कई सालों तक बॉलीवुड के गलियारों में यह खबर गूंजती रही कि सुरेश वाडकर के पास जब माधुरी दीक्षित का रिश्ता भेजा गया, तो उन्होंने यह कहकर मना कर दिया था कि लड़की काफी दुबली-पतली है। हालांकि, कई सालों बाद खुद सिंगर ने इन रिपोर्ट्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेश वाडकर ने उस दौर को याद करते हुए स्पष्ट किया था कि मीडिया में आई खबरें पूरी तरह से सही नहीं हैं। उन्होंने कहा था, "अब उस समय क्या हुआ होगा, वह तो भगवान ही जाने, लेकिन यह अफवाह किसने उड़ाई, यह नहीं पता। अगर माधुरी की शादी मेरे साथ हुई होती, तो क्या वे आज के दौर में इस मुकाम पर होतीं?" उन्होंने यह भी साफ किया था कि माधुरी उनकी एक बहुत अच्छी दोस्त हैं।
1987 में 'रामायण' में गाया था भजन
सुरेश वाडकर के सिंगिंग करियर की बात करें तो उन्होंने बॉलीवुड में तो एक से बढ़कर एक गाने गाए ही हैं, साथ ही रामानंद सागर की 1987 में दूरदर्शन पर आई ऐतिहासिक धारावाहिक 'रामायण' में भी अपनी आवाज दी थी। उन्होंने भगवान शिव को समर्पित 'जय देव जय जय महादेव' भजन गाया था। यह भजन उस दृश्य में आता है जब श्री राम अपने भाइयों के साथ गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं और भगवान भोलेनाथ की स्तुति करते हैं। उस दौर में यह भजन घर-घर में काफी लोकप्रिय हुआ था।

सुरेश वाडकर को उनके करियर का पहला बड़ा मौका साल 1976 में 'सुर-सिंगार' प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद मिला था। वहां संगीतकार रवींद्र जैन उनकी गायकी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस उभरते गायक को राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म 'पहेली' में गाने का मौका दिया। इसके बाद संगीतकार जयदेव ने फिल्म 'गमन' में उनसे एक गजल गवाई, जिसके बोल थे "सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है"। यह गजल इतनी हिट हुई कि रातों-रात सुरेश वाडकर म्यूजिक इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम बन गए।