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Radha Ashtami Puja Muhurat 2026: आज राधा अष्टमी पर सिर्फ डेढ़ घंटे का शुभ समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त - Haribhoomi

September 19, 2026

Radha Ashtami 2026: आज 19 सितंबर को राधा अष्टमी मनाई जा रही है। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, अष्टमी तिथि, व्रत पारण का समय और पूजा विधि।

Radha Ashtami 2026

Radha Ashtami 2026

  • Published: 19 Sep 2026, 10:22 AM IST
  • Last Updated: 19 Sep 2026, 10:22 AM IST

Radha Ashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के करीब 15 दिन बाद राधा अष्टमी आती है।

इस दिन राधा रानी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में राधा-कृष्ण की संयुक्त आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त इस अवसर पर व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करते हैं।

राधा अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
राधा अष्टमी के दिन पूजा के लिए बताए गए प्रमुख समय इस प्रकार हैं—
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 सितंबर 2026, दोपहर 1:02 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर 2026, दोपहर 3:28 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: 19 सितंबर, सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक
व्रत पारण: 20 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे

यानी आज राधा रानी की पूजा के लिए 11:01 बजे से 1:28 बजे तक करीब 2 घंटे 27 मिनट का समय है। इसलिए आपकी मूल हेडिंग में लिखा “सिर्फ डेढ़ घंटे” का दावा दिए गए समय से मेल नहीं खाता। SEO में इसे ठीक रखना बेहतर रहेगा।

राधा अष्टमी व्रत का पारण कब करें?
राधा अष्टमी व्रत का पारण अगले दिन नवमी तिथि में करने की परंपरा बताई गई है। 20 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे व्रत खोलने का समय बताया गया है।

पारण से पहले स्नान और पूजा करने के बाद जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जा सकता है।

राधा अष्टमी पर ऐसे करें पूजा
राधा अष्टमी के दिन पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। राधा रानी का पंचामृत से अभिषेक करके उन्हें नए वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। पूजा में रोली, चंदन, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद राधा रानी को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और खीर का भोग लगाया जा सकता है।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक भोजन का संकल्प ले सकते हैं। दी गई धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत के दौरान अनाज, सामान्य नमक, प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है।

राधा रानी के मंत्र का करें जाप
राधा अष्टमी पर राधा रानी के मंत्रों का जाप करने की भी परंपरा है। पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं “ॐ ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा” या “ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै नमः”

धार्मिक मान्यताओं में मंत्र जाप को भक्ति और साधना का माध्यम माना गया है। मंत्रों के प्रभाव से जुड़ी मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।