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प्रमोद यादव। प्रयागराज1 घंटे पहले
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प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए हाल ही में एक निगम बनाया है। इसके पूरी तरह शुरू होने से पहले ही प्रयागराज में आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर हुए भुगतान में गड़बड़ी सामने आई है।
मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) के विद्युत यांत्रिक खंड का है। इस खंड ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए लीलावती इंटरप्राइजेज को कुल 69.73 लाख रुपए का भुगतान किया। AG ऑफिस प्रयागराज की ऑडिट टीम ने इसमें 33,32,933 रुपए का भुगतान बिना बिल के पाया है।
ऑडिट रिपोर्ट में इसे वित्तीय गड़बड़ी माना गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ बिल दोबारा लगाए गए हैं। मामले में विभाग से जवाब मांगा गया है।
दो बार में हुआ 69.73 लाख का भुगतान
लीलावती इंटरप्राइजेज को 14 जुलाई को 34,75,923 रुपए और 25 जुलाई को 34,98,897 रुपए का भुगतान किया गया। ऑडिट में इन्हीं भुगतानों से जुड़े बिल और वाउचर की जांच की गई।
विद्युत यांत्रिक खंड के अधिशासी अभियंता अखिलेश कुमार ने कहा कि ऑडिट आपत्ति आई है। उसे देखा जा रहा है और उसका जवाब दिया जा रहा है। ऑडिट में एक भुगतान में 8,66,211 रुपए का अंतर मिला। वाउचर में 34,98,897 रुपए का खर्च दिखाया गया, जबकि इससे जुड़े बिल 26,32,686 रुपए के ही मिले। यानी 8,66,211 रुपए का बिल नहीं मिला।
दूसरे मामले में 1,62,326 रुपए का भुगतान बिना बिल के मिला। एक अन्य भुगतान में 9,09,173 रुपए खर्च दिखाए गए, जबकि 7,02,000 रुपए के ही बिल मिले। इसमें 2,07,173 रुपए का अंतर मिला।

विद्युत यांत्रिक खंड के अधिशासी अभियंता अखिलेश कुमार ने कहा कि ऑडिट आपत्ति आई है।
4.59 लाख के भुगतान के दस्तावेज नहीं मिले
ऑडिट में 4,59,379 रुपए के एक और भुगतान पर आपत्ति की गई है। इसके समर्थन में मूल बिल, वाउचर और दूसरे जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। सबसे बड़ी आपत्ति 16,45,017 रुपए की है। एक वाउचर में 34,75,026 रुपए का भुगतान दिखाया गया, जबकि 111 बिलों के आधार पर राशि 18,30,009 रुपए ही बनती है। दोनों रकम में 16,45,017 रुपए का अंतर है।
विद्युत यांत्रिक खंड ने इलाहाबाद हाईकोर्ट, लोक सेवा आयोग, सर्किट हाउस और PWD गेस्ट हाउस में आउटसोर्स पर 50 से ज्यादा इलेक्ट्रीशियन, हेल्पर और लिफ्ट ऑपरेटर लगाए हैं। लीलावती इंटरप्राइजेज कई साल से यह काम कर रही है। इन्हीं कर्मचारियों से जुड़ी सेवाओं के भुगतान की ऑडिट में जांच हुई है।
कम कर्मचारी, ज्यादा भुगतान की शिकायत
कटरा निवासी देवेश रंजन ने पहले विभाग में शिकायत की थी। उनका आरोप था कि मौके पर कर्मचारियों की संख्या कम है, लेकिन भुगतान ज्यादा लिया जा रहा है। उन्होंने फर्जी बिल से भुगतान का भी आरोप लगाया था।
अब ऑडिट में बिना बिल भुगतान और बिलों में अंतर की बात सामने आई है। ऐसे में कर्मचारियों की उपस्थिति, तैनाती, वेतन रिकॉर्ड, बैंक भुगतान और बिल-वाउचर की जांच से स्थिति साफ हो सकती है।
कुछ बिल दोबारा लगाए गए
ऑडिट में कुछ बिलों के दोबारा इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बिल पहले एक वाउचर के साथ लगाए गए और बाद में दूसरे वाउचर में भी शामिल कर दिए गए। इससे एक ही बिल के आधार पर दोबारा भुगतान किए जाने का सवाल उठता है।
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