डॉ. जवाहरलाल मनसुखानी, सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई
Psoriasis Awareness Month: सोरायसिस क्या है और इसके लक्षण कैसे पहचानें? क्या यह संक्रामक बीमारी है? इसका इलाज संभव है? सोरायसिस को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, सोरायसिस एक क्रॉनिक ऑटोइम्यून और इंफ्लेमेटरी बीमारी है, जिसे सही इलाज और नियमित देखभाल के जरिए काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
अगस्त में Psoriasis Awareness Month के अवसर पर जानते हैं सोरायसिस से जुड़ी जरूरी बातें- इसके कारण, प्रमुख लक्षण, सोरायटिक अर्थराइटिस का खतरा और इलाज के आधुनिक विकल्प।
क्या है सोरायसिस?
सोरायसिस त्वचा से जुड़ी एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम त्वचा की कोशिकाओं को प्रभावित करता है और त्वचा की नई कोशिकाएं सामान्य से कहीं तेजी से बनने लगती हैं। इसके कारण त्वचा की सतह पर कोशिकाएं जमा होकर मोटे, लाल और पपड़ीदार चकत्ते या प्लाक बना सकती हैं।
सोरायसिस किसी भी उम्र में हो सकता है। यह संक्रामक या छूत की बीमारी नहीं है। यानी सोरायसिस से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने, उसके साथ बैठने या खाना खाने से यह बीमारी दूसरे व्यक्ति को नहीं होती।
हालांकि, सोरायसिस केवल त्वचा तक सीमित समस्या नहीं है। कुछ मरीजों में आगे चलकर सोरायटिक अर्थराइटिस विकसित हो सकता है, जिसमें जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए सोरायसिस के मरीज को लगातार रहने वाले जोड़ों के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सोरायसिस क्यों होता है?
सोरायसिस का कोई एक कारण नहीं होता। इसके पीछे मुख्य रूप से इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी, आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों की भूमिका मानी जाती है।
इस बीमारी में इम्यून सिस्टम गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला करने लगता है। इसके कारण शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रिया बढ़ती है और त्वचा कोशिकाओं का निर्माण सामान्य से अधिक तेजी से होने लगता है।
आनुवंशिक कारण भी महत्वपूर्ण
अगर परिवार में माता-पिता या किसी करीबी सदस्य को सोरायसिस है, तो व्यक्ति में इसके विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, केवल आनुवंशिक कारणों से ही बीमारी होना जरूरी नहीं है। कई पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक भी सोरायसिस को ट्रिगर या बढ़ा सकते हैं।
कुछ लोगों में संक्रमण, तनाव, त्वचा पर चोट या कुछ अन्य ट्रिगर बीमारी को बढ़ा सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, तनाव, संक्रमण, त्वचा पर चोट और कुछ अन्य कारक सोरायसिस को भड़का सकते हैं।
सोरायसिस के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
सोरायसिस के लक्षण व्यक्ति और बीमारी की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसके सबसे आम लक्षणों में शामिल हैं:
- त्वचा पर लाल और उभरे हुए चकत्ते या मोटे प्लाक बनना।
- प्लाक के ऊपर सफेद या सिल्वर रंग की पपड़ी जमना।
- त्वचा में खुजली, जलन या अत्यधिक सूखापन।
- शुरुआत में छोटे-छोटे दाने बनना और धीरे-धीरे उनका आकार बढ़ना।
- खुजलाने पर पपड़ी का त्वचा से अलग होना और कभी-कभी खून निकलना।
- कोहनी और घुटनों पर ज्यादा असर होना।
- सिर की त्वचा यानी स्कैल्प पर पपड़ी और चकत्ते बनना।
- पीठ के निचले हिस्से में प्लाक दिखाई देना।
- नाखूनों का रंग या बनावट बदलना और नाखून खराब होना।
सोरायसिस में बनने वाले प्लाक मृत त्वचा कोशिकाओं के तेजी से जमा होने के कारण बनते हैं। बीमारी की गंभीरता हल्की से लेकर गंभीर तक हो सकती है।
सोरायसिस और सोरायटिक अर्थराइटिस का क्या संबंध है?
सोरायसिस वाले कुछ मरीजों में सोरायटिक अर्थराइटिस भी हो सकता है। इसमें जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर सोरायसिस से पीड़ित व्यक्ति को लंबे समय तक जोड़ों में दर्द या अकड़न महसूस हो रही है, उंगलियों या पैर की उंगलियों में सूजन है या सुबह उठने पर जोड़ों में ज्यादा जकड़न महसूस होती है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
समय पर पहचान और उपचार से बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
सोरायसिस का इलाज कैसे किया जाता है?
सोरायसिस का इलाज हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर बीमारी की गंभीरता, प्रभावित त्वचा का क्षेत्र, रोजमर्रा की जिंदगी पर असर, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं और मरीज की व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखकर उपचार तय करते हैं।
इलाज में इनमें से एक या एक से ज्यादा विकल्प शामिल हो सकते हैं:
1. क्रीम और टॉपिकल दवाएं
हल्के सोरायसिस में त्वचा पर लगाने वाली दवाएं कई मरीजों के लिए पर्याप्त हो सकती हैं। इनमें कॉर्टिकोस्टेरॉयड, विटामिन-D आधारित दवाएं और अन्य टॉपिकल उपचार शामिल हो सकते हैं।
2. फोटोथेरेपी
कुछ मरीजों में डॉक्टर फोटोथेरेपी, यानी नियंत्रित तरीके से विशेष प्रकार की पराबैंगनी रोशनी से उपचार की सलाह दे सकते हैं। सोरायसिस के लिए नैरोबैंड UVB समेत कई प्रकार की फोटोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।
3. ओरल और सिस्टमेटिक दवाएं
अगर सोरायसिस ज्यादा गंभीर है या शरीर के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहा है, तो डॉक्टर ऐसी दवाएं दे सकते हैं जो पूरे शरीर पर काम करती हैं। इनमें कुछ ओरल दवाएं और अन्य सिस्टमेटिक उपचार शामिल हैं।
4. बायोलॉजिक और टारगेटेड थेरेपी
मध्यम से गंभीर सोरायसिस में कुछ मरीजों के लिए बायोलॉजिक या अन्य टारगेटेड उपचार विकल्प हो सकते हैं। इनका चुनाव डॉक्टर मरीज की स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर करते हैं।
इकोट्रोकिनरा क्या है? सोरायसिस के इलाज में क्यों चर्चा में है?
सोरायसिस के इलाज के क्षेत्र में इकोट्रोकिनरा (Icotrokinra) एक नई टारगेटेड ओरल थेरेपी के रूप में चर्चा में आया है। यह IL-23 रिसेप्टर को चुनिंदा रूप से टारगेट करने वाली ओरल पेप्टाइड दवा है।
2025 में The Lancet में प्रकाशित दो Phase-III ट्रायल्स—ICONIC-ADVANCE 1 और 2- में इकोट्रोकिनरा की तुलना प्लेसीबो और ड्यूक्रावासिटिनिब से की गई। अध्ययन में moderate-to-severe plaque psoriasis वाले मरीज शामिल थे और दवा ने प्लेसीबो की तुलना में त्वचा की स्थिति में बेहतर सुधार दिखाया।
इसके बाद मार्च 2026 में अमेरिकी FDA ने ICOTYDE (icotrokinra) को moderate-to-severe plaque psoriasis के लिए मंजूरी दी। FDA के अनुसार यह 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उन मरीजों के लिए स्वीकृत है जिनका वजन कम से कम 40 किलोग्राम है और जिन्हें systemic therapy या phototherapy की जरूरत है।
इस दवा से जुड़ी Phase-III रिसर्च में चार क्लिनिकल ट्रायल्स और करीब 2,500 प्रतिभागियों का डेटा FDA के निर्णय का आधार बना।
हालांकि, किसी भी नई दवा को मरीज अपनी मर्जी से शुरू न करें। इसकी जरूरत, उपयुक्तता और संभावित जोखिमों का आकलन विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं।
IL-23 रिसेप्टर क्या है?
IL-23 यानी इंटरल्यूकिन-23 शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सिग्नलिंग प्रोटीन है। इसका संबंध शरीर में होने वाली सूजन और इम्यून रिस्पॉन्स से है।
इकोट्रोकिनरा IL-23 रिसेप्टर को चुनिंदा रूप से ब्लॉक करता है, जिससे IL-23 से जुड़ी इंफ्लेमेटरी सिग्नलिंग को कम करने में मदद मिलती है। 2025 के Phase-III ट्रायल्स में इसी टारगेटेड मैकेनिज्म की प्रभावशीलता का अध्ययन किया गया था।
क्या सोरायसिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?
सोरायसिस एक क्रॉनिक बीमारी है, इसलिए इसका इलाज केवल त्वचा के लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। सही उपचार का लक्ष्य बीमारी को नियंत्रित करना, त्वचा के घावों को कम करना, जीवन की गुणवत्ता बेहतर करना और बीमारी के दोबारा भड़कने के जोखिम को कम करना होता है।
किस मरीज के लिए कौन-सा उपचार बेहतर होगा, यह उसकी बीमारी की गंभीरता और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करता है। आधुनिक उपचारों की मदद से कई मरीजों में बीमारी को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
स्टेरॉयड क्रीम के इस्तेमाल में सावधानी जरूरी
सोरायसिस में स्टेरॉयड वाली क्रीम का इस्तेमाल कई बार उपचार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक स्टेरॉयड क्रीम लगाना उचित नहीं है।
मरीज को खुद से दवा शुरू करने, बंद करने या उसकी मात्रा बदलने से बचना चाहिए। सोशल मीडिया, परिचितों या किसी गैर-विशेषज्ञ की सलाह पर सोरायसिस की दवा लेना भी नुकसानदायक हो सकता है।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर त्वचा पर बार-बार लाल, मोटे या पपड़ीदार चकत्ते बन रहे हैं, खुजली और सूखापन लगातार बना हुआ है, नाखूनों में बदलाव आ रहे हैं या सोरायसिस के साथ जोड़ों में दर्द और अकड़न भी होने लगी है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।
सबसे जरूरी बात: सोरायसिस छूत की बीमारी नहीं है और इसे लेकर मरीज को सामाजिक दूरी या शर्मिंदगी महसूस करने की जरूरत नहीं है। सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर उपचार शुरू करने से बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख डॉ. जवाहरलाल मनसुखानी, सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल जागरूकता और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी बीमारी या उपचार के लिए डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह जरूर लें।