Prahlad Joshi: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी है. ऐसे में हर कोई देश के नए शिक्षा मंत्री के बारे में जानना चाहता है कि आखिर नए शिक्षा मंत्री कितने पढ़े-लिखे हैं? चलिए जानते हैं...
Prahlad Joshi: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी है. ऐसे में हर कोई देश के नए शिक्षा मंत्री के बारे में जानना चाहता है कि आखिर नए शिक्षा मंत्री कितने पढ़े-लिखे हैं? चलिए जानते हैं...
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कितने पढ़े-लिखे हैं प्रह्लाद जोशी? जानें देश के नए शिक्षा मंत्री के बारे में सबकुछ Photograph: (X@JoshiPralhad)
Prahlad Joshi: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है. शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद शनिवार देर रात उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें अभी-अभी जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है. मैं कर्तव्य, विनम्रता और पूरी निष्ठा के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूं तथा इसके लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करता हूं.
कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं नए शिक्षा मंत्री
बता दें कि प्रह्लाद जोशी अपने लंबे राजनीतिक करियर और कई कैबिनेट विभागों को संभालने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन अब उन्हें मोदी कैबिनेट में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. ऐसे में तमाम लोग उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि और देश के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में से एक तक पहुंचने के उनके सफर के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं.
- वर्तमान में प्रह्लाद जोशी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं. ऐसे में सबसे प्रह्लाद जोशी की शिक्षा, शुरुआती जीवन और राजनीतिक करियर के बारे में विस्तार से जानते हैं.
कितने पढ़े लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी के पास बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री है. उन्होंने हुबली के K.S. आर्ट्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया, जो धारवाड़ की कर्नाटक यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ है. उच्च शिक्षा लेने से पहले, उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रेलवे स्कूल में की और बाद में उन्होंने हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल में पढ़ाई की है.
कैसा बीता प्रह्लाद जोशी का शुरुआती जीवन?
27 नवंबर, 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (पहले बीजापुर) में जन्मे प्रह्लाद जोशी एक साधारण परिवार में पले-बढ़े. उनके पिता इंडियन रेलवे में काम करते थे और जोशी ने आर्ट्स में ग्रेजुएशन करने से पहले अपनी ज्यादातर स्कूली शिक्षा कर्नाटक में ही पूरी की. वे कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे और बाद में कर्नाटक में संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक जीवन में आए.
कैसा रहा है कि जोशी का राजनीतिक सफर?
प्रह्लाद जोशी 2004 से लोकसभा में धारवाड़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और लगातार पांच बार चुने गए हैं, जिससे वे कर्नाटक के सबसे अनुभवी BJP सांसदों में से एक बन गए हैं. बीते 22 सालों में प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक में पार्टी के अलावा केंद्र में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं.
- प्रह्ललाद जोशी 2014 से 2026 तक BJP की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, केंद्रीय कोयला मंत्री, केंद्रीय खान मंत्री, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय क्यों दिया गया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2026 NEET विवाद और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के खराब मैनेजमेंट के कारण धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर करने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा. जोशी शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ अपने मौजूदा विभागों का काम भी देखते रहेंगे.
- मंत्रालय का कार्यभार संभालते हुए जोशी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदों पर खरा उतरने और भारत के शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में काम करने की कोशिश करेंगे.
25 जुलाई को दिया धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा
बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले एक महीने से चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
- देशभर के छात्र दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 36 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इसके बाद ये विरोध प्रदर्शन देश के कई शहरों तक फैल गया. सीजेपी के बैनर तले हो रहे इस विरोध प्रदर्शन के 36वें दिन आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.
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