पुणे में छात्रों का जश्न: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ढोल-ताशों संग मनी खुशी, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
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Written By:
रूपम सिंह
Updated On: Jul 26, 2026 | 01:25 PM IST
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सार
Pune Student Celebration: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद पुणे में छात्रों ने जश्न मनाया। ढोल-ताशों और मिठाइयों के साथ इसे छात्र शक्ति की जीत बताया।

छात्रों का जश्न फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Pune Student Celebration Dharmendra Pradhan Resignation: पुणे में पेपर लीक मामले में छात्रों के संघर्ष को बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को पुणे में छात्र आंदोलन का अनूठा दृश्य देखने को मिला। सुबह विभिन्न छात्र एवं सामाजिक संगठनों ने पेपर लीक, शिक्षा के निजीकरण और बढ़ती बेरोजगारी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं शाम होते-होते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने पर शहर के कई हिस्सों में जश्न का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे छात्रों के लंबे संघर्ष की बड़ी सफलता बताया।
गुडलक चौक के कलाकार कट्टा, जिलाधिकारी कार्यालय और कांग्रेस भवन सहित कई स्थानों पर ढोल-ताशों की धुन, देशभक्ति के नारों और मिठाइयों के वितरण के बीच लोगों ने खुशी मनाई। आंदोलनकारियों का कहना था कि नीट परीक्षा में कथित धांधली, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर देशभर में उठी आवाज ने सरकार पर दबाव बनाया।
विपक्षी दलों का भी CJP को समर्थन मिला
आंदोलनकारियों के अनुसार, पर्यावरणविद सोनम वांगचुक और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के युवा नेता अभिजीत दीपके की पहल से शुरू हुए इस अभियान को विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का समर्थन मिला। उनका दावा है कि लंबे समय से जारी आंदोलन और जनदबाव के बाद सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा।
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मृतक विद्यार्थियों को दी गई श्रद्धांजलि
जश्न के दौरान छात्रों ने ‘भारत माता की जय’, ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ‘दिल्ली चे ही तख्त राखितो महाराष्ट्र माझा‘ जैसे नारे लगाए। हाथों में तिरंगा लेकर युवाओं ने एक-दूसरे को मेलोडी चॉकलेट और मिठाइयां बांटी। साथ ही परीक्षा विवाद से जुड़े मृतक विद्यार्थियों को श्रद्धांजलि देते हुए
दो मिनट का मौन भी रखा।
प्रतिनिधियों ने कहा कि केवल एक मंत्री का इस्तीफा अंतिम समाधान नहीं है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होने तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने ‘पेपर अभी झांकी है, ईवीएम अभी बाकी है’ के नारे लगाए और संकेत दिया कि अन्याय के खिलाफ उनका अगला बड़ा संघर्ष चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर होगा।
