अब नहीं चलेगा कोई बहाना और बंद होगी घूसखोरी! मुंबई की लोकल ट्रेनों में बॉडी कैमरों से लैस टीटीई करेंगे चेकिंग
मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों में बिना टिकट यात्रा करने वाले दैनिक यात्रियों और टिकट जांच के दौरान होने वाले विवादों व घूसखोरी की शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक और हाई-टेक कदम उठाया है। मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर तैनात टिकट जांच कर्मियों यानी ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर्स (TTE) को अब अत्याधुनिक बॉडी-वॉर्न कैमरों (Body-Worn Cameras) से लैस कर दिया गया है। वेस्टर्न रेलवे (WR) और सेंट्रल रेलवे (CR) दोनों डिवीजनों ने संयुक्त रूप से यह डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की है। अब जब भी कोई टिकट चेकर किसी यात्री से टिकट की मांग करेगा, तो पूरी बातचीत, व्यवहार, टिकट सत्यापन और जुर्माने की रसीद काटने की प्रक्रिया सीधे कैमरे में उच्च-गुणवत्ता वाले ऑडियो और वीडियो के साथ कैद होगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल टिकट जांच में पारदर्शिता आएगी, बल्कि झूठे आरोपों, बदसलूकी और रिश्वतखोरी के मामलों पर भी पूरी तरह से ताला लग जाएगा।
टीटीई की वर्दी पर लगे बॉडी कैमरे कैसे करेंगे काम
टिकट चेकिंग स्टाफ की वर्दी पर कॉलर या छाती के पास लगाए गए ये बॉडी कैमरे वजन में बेहद हल्के, कॉम्पैक्ट और अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं। इन कैमरों में हाई-डेफिनिशन (HD) वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ-साथ वाइड-एंगल लेंस लगा हुआ है, जिससे भीड़भाड़ वाले लोकल ट्रेन के डिब्बों में भी आसपास का पूरा दृश्य साफ-साफ रिकॉर्ड हो जाता है। कैमरों में नाइट विजन और कम रोशनी में भी साफ तस्वीर लेने की क्षमता मौजूद है, जिससे देर रात की लोकल ट्रेनों में भी चेकिंग के दौरान कोई धुंधलापन नहीं रहेगा। इन कैमरों की बैटरी लाइफ 8 से 10 घंटे की है, जो टीटीई की पूरी शिफ्ट के दौरान बिना रुकावट काम करने में सक्षम है। सबसे खास बात यह है कि इन कैमरों में छेड़छाड़-रोधी (Tamper-proof) सॉफ्टवेयर तकनीक दी गई है, यानी ड्यूटी के दौरान टीटीई अपनी मर्जी से किसी फुटेज को न तो डिलीट कर सकते हैं और न ही एडिट कर सकते हैं।
घूसखोरी, मिलीभगत और 'सेटिंग' के खेल पर लगेगा सीधा अंकुश
मुंबई लोकल में हर रोज 70 से 80 लाख यात्री सफर करते हैं। इतनी भारी भीड़ का फायदा उठाकर कई यात्री बिना वैध टिकट या बिना उचित पास के यात्रा करते हैं। अक्सर यह भी शिकायतें आती थीं कि कुछ टिकट चेकर बिना टिकट पकड़े गए यात्रियों से निर्धारित सरकारी जुर्माना वसूलने और उसकी पक्की कम्प्यूटरीकृत रसीद देने के बजाय, मौके पर ही कुछ पैसों की 'सेटिंग' कर लेते थे और अपनी जेब गर्म कर लेते थे। बॉडी कैमरों की लाइव और सुरक्षित रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद यह खेल पूरी तरह नामुमकिन हो गया है। कैमरे में हर लेन-देन की आवाज और दृश्य रिकॉर्ड होगा, जिससे कोई भी टीटीई न तो घूस मांग सकेगा और न ही कोई यात्री पैसे देकर छूटने का प्रस्ताव दे सकेगा। रेलवे सतर्कता विभाग (Vigilance Department) इन रिकॉर्डिंग्स की रैंडम ऑडिटिंग करेगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
यात्रियों और रेलवे स्टाफ के बीच होने वाले विवादों और झूठे आरोपों का होगा त्वरित निपटारा
लोकल ट्रेनों में अक्सर टिकट चेकिंग के दौरान यात्रियों और टीटीई के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और मारपीट तक की नौबत आ जाती है। कई बार बिना टिकट पकड़े गए उद्दंड यात्री टीटीई पर बदसलूकी, गाली-गलौज या पैसे छीनने के झूठे आरोप लगाकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या जीआरपी (GRP) में शिकायत दर्ज करा देते थे। वहीं कई बार यात्रियों का यह आरोप रहता था कि वैध टिकट होने के बावजूद टीटीई ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। अब बॉडी-वॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग एक निष्पक्ष और अकाट्य डिजिटल सबूत (Electronic Evidence) के रूप में काम करेगी। किसी भी विवाद की स्थिति में कंट्रोल रूम में बैठे वरिष्ठ अधिकारी फुटेज देखकर महज कुछ मिनटों में दूध का दूध और पानी का पानी कर सकेंगे, जिससे ईमानदार रेलकर्मियों को सुरक्षा मिलेगी और यात्रियों के साथ भी कोई ज्यादती नहीं हो सकेगी।
डिजिटल चालान और हैंडहेल्ड टर्मिनल्स (HHT) से सीधे लिंक होगी प्रणाली
बॉडी कैमरों के साथ-साथ मुंबई उपनगरीय नेटवर्क के टीटीई को पहले से दिए गए हैंडहेल्ड टर्मिनल्स (HHT मशीन) का उपयोग भी अब अनिवार्य कर दिया गया है। जैसे ही किसी यात्री को बिना टिकट पकड़ा जाएगा, टीटीई तुरंत डिजिटल मशीन से ई-चालान काटेगा। यात्री नकद भुगतान के साथ-साथ यूपीआई (UPI), क्यूआर कोड, डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए मौके पर ही डिजिटल रूप से जुर्माना भर सकेंगे। जुर्माना जमा होते ही यात्री के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर डिजिटल पावती (SMS Receipt) पहुंच जाएगी और डेटा सीधे रेलवे के सेंट्रल सर्वर पर अपडेट हो जाएगा। बॉडी कैमरे की वीडियो फुटेज और एचएचटी मशीन के टाइम-स्टैम्प का मिलान होने से कागजी रसीदों में होने वाली किसी भी हेराफेरी का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया है।
रेलवे के राजस्व में भारी बढ़ोतरी और अनधिकृत यात्रा पर नकेल की उम्मीद
मुंबई लोकल नेटवर्क पर एसी लोकल ट्रेनों (AC Local Trains) की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सामान्य द्वितीय श्रेणी के पासधारक अक्सर एसी लोकल के ठंडे डिब्बों में घुस जाते हैं, जिससे एसी लोकल के वैध टिकट धारकों को भारी असुविधा होती है। बॉडी कैमरों से लैस टीमों को अब विशेष रूप से एसी लोकल, प्रथम श्रेणी (First Class) और दिव्यांग डिब्बों में सघन जांच के लिए तैनात किया जा रहा है। पश्चिम रेलवे और मध्य रेलवे के वाणिज्यिक अधिकारियों का मानना है कि इस पारदर्शी और सख्त व्यवस्था से बिना टिकट यात्रा करने वालों के मन में कानून का खौफ पैदा होगा, जिससे वे टिकट खिड़की या यूटीएस (UTS) मोबाइल ऐप से टिकट खरीदकर ही यात्रा करेंगे। इससे भारतीय रेलवे के उपनगरीय राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लोकल ट्रेनों में यात्रा करने वाले आम यात्रियों का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, सुगम और अनुशासित बन सकेगा।