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बिहार के एक करोड़ परिवार बनेंगे उद्यमी, 'मेड इन बिहार' को मिलेगी प्राथमिकता; सीएम सम्राट ने बताया सरकार का प्लान

October 8, 2026

Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने को लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक बिहार के एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का है। इसके साथ ही राज्य में बनने वाले उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है। 

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पटना के बापू सभागार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के चयनित लाभुकों के उन्मुखीकरण और प्रथम किस्त वितरण कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने उद्योग, रोजगार और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की योजनाओं की जानकारी दी।

सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार ने 'पर्चेस प्रेफरेंस एक्ट' बनाया है। इसके तहत बिहार में बनने वाले उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि स्टील, कपड़ा या अन्य कच्चे माल से जुड़े उत्पाद यदि बिहार के उद्यमी तय मानकों के अनुसार तैयार करते हैं, तो सरकारी खरीद में उन्हीं उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य सरकार की खरीद में बिहार में निर्मित उत्पादों को 25 से 40 प्रतिशत तक हिस्सेदारी देने का प्रावधान बताया गया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें बिहार में ही उत्पादन को बढ़ावा मिले। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई उद्यमी साइकिल बनाता है तो उसे दूसरे राज्य से लाकर बिहार में बेचने के बजाय बिहार में ही उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी तरह दूसरे राज्यों से स्टील या अन्य उत्पादों की खरीद तभी प्राथमिकता होगी, जब बिहार में उस उत्पाद का उत्पादन उपलब्ध न हो।

राज्य के उद्यमियों को सरकारी काम में भागीदारी बढ़ाने के लिए टेंडर नियमों में भी बदलाव की बात मुख्यमंत्री ने कही। उनके अनुसार, 50 करोड़ रुपये तक की सरकारी योजनाओं के टेंडर में यदि कोई बिहारी उद्यमी L2, L3 या L4 पर है और L1 की दर पर काम करने के लिए तैयार है, तो उसे काम देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों को सरकारी परियोजनाओं में अधिक अवसर उपलब्ध कराना बताया गया है।

सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार फिलहाल करीब 45 हजार नए उद्यमियों को तैयार कर रही है। कार्यक्रम के दौरान करीब सात हजार लाभुकों को पहली या अगली किस्त की राशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। इसके लिए करीब 3,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। चयनित लाभुकों में अनुसूचित जाति और जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, महिलाएं, युवा और अल्पसंख्यक वर्ग के उद्यमी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक उद्यमी को कुल 10 लाख रुपये तक का सहयोग दिया जा रहा है। इसमें पांच लाख रुपये अनुदान और पांच लाख रुपये ऋण के रूप में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि करीब 44 हजार उद्यमी औसतन पांच-पांच लोगों को भी रोजगार देते हैं, तो इससे लगभग ढाई लाख लोगों को सीधे रोजगार मिल सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का एक प्रमुख लक्ष्य उन करीब 12 लाख लोगों का पलायन रोकना है, जो मजदूरी और अन्य रोजगार के लिए बिहार से बाहर जाते हैं। इसके लिए MSME और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। बिहार में 12 लाख प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की बात मुख्यमंत्री पहले भी कह चुके हैं। सरकार के मुताबिक, उद्यमिता और उद्योगों के विस्तार के जरिए राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि GeM पोर्टल के माध्यम से उद्यमी अपने उत्पाद सीधे अपलोड कर सकते हैं और सरकारी खरीद प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और सरकारी खरीद से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का फोकस बिहार में उत्पादन, उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।