फ्रांस में स्कूलों के लिए ज्यादा फंड की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन मंगलवार को देशव्यापी प्रदर्शन में बदल गया। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में 2.66 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया, जिनमें अकेले पेरिस में 56 हजार लोग शामिल थे। छात्रों ने कई हाईस्कूलों की नाकेबंदी की, जबकि मार्सेई, स्ट्रासबर्ग और दूसरे शहरों में बड़ी संख्या में लोग झंडे और पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे।
यह आंदोलन सितंबर के मध्य में पेरिस क्षेत्र के एक हाईस्कूल से शुरू हुआ था। अब यह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यकाल में हुए कई बड़े प्रदर्शनों के बीच एक नए देशव्यापी आंदोलन के रूप में सामने आया है। प्रदर्शन में शामिल लीआ मोनिमार्ट ने कहा कि सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए, क्योंकि वे 17 साल के हैं और अपने मुद्दों को समझते हैं।
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पुलिस ने आंसू गैस क्यों छोड़ी?
ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन पेरिस में मार्च खत्म होने के बाद एक चौक पर प्रदर्शनकारियों के छोटे समूहों और दंगा नियंत्रण पुलिस के बीच झड़प हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। गृह मंत्रालय के मुताबिक, मंगलवार को करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस की कार्रवाई को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है और कुछ छात्र संगठनों ने गुरुवार को फिर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।
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गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि लगभग सभी मामलों में प्रतिक्रिया अनुपातिक थी और कुछ प्रदर्शन दंगों में बदल गए थे। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने छात्रों की चिंताओं को सुनने और समाधान निकालने की बात कही। संसद में प्रदर्शन को लेकर सवालों के जवाब में उन्होंने स्कूलों को प्रभावित करने वाली ‘अत्यधिक हिंसा’ की निंदा की और पुलिस पर नस्लभेद के आरोपों को झूठ बताया।
छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा क्यों?
दो हफ्ते से ज्यादा समय से चल रहे कक्षा बहिष्कार और स्कूलों की नाकेबंदी के साथ पुलिस की कार्रवाई भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा बन गई है। खबर के मुताबिक, अब तक 6,500 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और इनमें ज्यादातर नाबालिग हैं। पुलिस के दंगा नियंत्रण हथियारों से गंभीर चोटें लगने के आरोपों के बीच सोमवार को एक घटना में 15 साल के एक लड़के का हाथ चला गया। गृह मंत्री नुनेज ने बताया कि 715 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। विश्वविद्यालय के छात्र फेलिक्स बार्नी ने पुलिस की कार्रवाई को अनुपातहीन बताया और कहा कि नाबालिगों के साथ ऐसा व्यवहार समझ से परे है।
वामपंथी फ्रांस अनबाउड पार्टी के सांसद ऑरेलियन ले कोक ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए लाठी, रबर की गोलियों और आंसू गैस के इस्तेमाल का जिक्र किया। आंदोलन को फ्रांस में व्यापक असंतोष का समर्थन मिल रहा है। छात्रों की शिक्षा से जुड़ी शिकायतों के अलावा महंगाई, सार्वजनिक खर्च में कटौती, बढ़ती गरीबी और संपत्ति की असमानता को लेकर भी नाराजगी है।
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छात्रों का क्या कहना है?
पेरिस के 20वें जिले के हेलेन बुशे हाईस्कूल में प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदान और साइकिलें सड़क पर गिराकर अस्थायी बैरिकेड बना दिए। देशभर के सैकड़ों अन्य स्कूलों की तरह यह स्कूल भी बंद रहा। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को 891 स्कूलों में पढ़ाई पूरी या आंशिक रूप से बाधित रही। अधिकारियों ने पिछले सप्ताह कई स्कूलों को बंद करना शुरू किया था, जिससे प्रदर्शन के दौरान स्कूलों को हो रहे नुकसान और छात्रों, कर्मचारियों तथा पुलिस के घायल होने के मामलों को कम किया जा सके।
छात्रों की शिकायत है कि कई स्कूलों में डेस्क और कुर्सियों जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। कुछ कक्षाएं गर्मियों में इतनी गर्म हो जाती हैं कि पढ़ाई मुश्किल हो जाती है, जबकि कुछ स्कूलों में चूहों की समस्या भी है। स्टाफ की कमी और थकाऊ कामकाज को लेकर भी शिकायतें हैं। पेरिस के एक स्कूल के बाहर लगे हाथ से लिखे पोस्टर पर लिखा था, 'आप कहते हैं युवा भविष्य हैं, तो उनकी सुनिए।' अभिभावक संगठन की सदस्य एमिलिया सिचिली सुरियम ने कहा कि बच्चे उनके हैं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
आंदोलन अब कहां पहुंचा?
छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज करने के आरोपों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। इसके जरिए हाईस्कूल के छात्र गुमनाम तरीके से अपने स्कूल की समस्याएं और वे बदलाव दर्ज करा सकते हैं, जिन्हें वे देखना चाहते हैं। छात्र संगठनों ने साफ किया है कि जब तक सरकार उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं देती, प्रदर्शन जारी रहेंगे। छात्र संगठनों के महासंघ की अध्यक्ष सुजैन नीडजाम ने कहा कि अब कार्रवाई करना जरूरी है और यह सरकार पर निर्भर है कि वह युवाओं और देश के भविष्य को राजनीतिक प्राथमिकता देती है या नहीं। इस आंदोलन का असर पड़ोसी बेल्जियम में भी दिखाई दिया, जहां मंगलवार को पूर्वी शहर लीज में 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। ब्रसेल्स और दूसरे शहरों में भी छोटे प्रदर्शन हुए।